---विज्ञापन---

हेल्थ angle-right

क्या डायबिटीज से बढ़ सकता है गॉल ब्लैडर कैंसर का खतरा? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Gallbladder Cancer Risk: क्या आप जानते हैं जिस डायबिटीज को आप आम बीमारी समझ रहे हैं, वह गॉल ब्लैडर कैंसर का भी खतरा बढ़ा सकता है. आइए जानते हैं कैसे और कैसे दिखते हैं इस कैंसर में लक्षण?

---विज्ञापन---

अच्छी और हेल्दी लाइफ के लिए अच्छी लाइफस्टाइल को अपनाना काफी जरूरी है. वरना कुछ खराब आदतें, धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला बना देती हैं और कई तरह के गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार बना देती है. आज के हालात ऐसी हो चले हैं, कि खराब खानपान की आदतों ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों को डायबिटीज का शिकार बना दिया है. डायबिटीज इतनी खतरनाक बीमारी है, जिसके कारण शरीर बीमारियों का घर बनता चला जाता है, जिसकी आड़ में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी शरीर में अपनी जड़ों को मजबूत करता रहता है. ICMR – National Institute of Cancer Prevention and Research की रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज शरीर को इतना कमजोर बना देती है कि वह गॉल ब्लैडर कैंसर के खतरे को बढ़ाने लगती है. आइए जानते हैं कैसे डायबिटीज गॉल ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ाती है और इसके लक्षण कैसे दिखाई देते हैं.

यह भी पढ़ें: Sugar in Cold Drinks: एक गिलास कोल्ड ड्रिंक में कितनी चीनी होती है? जानिए WHO की डेली

---विज्ञापन---

क्या है डायबिटीज और गॉल ब्लैडर कैंसर?

किसी बीमारी का क्या खतरा है, उससे पहले ये जानना जरूरी होता है कि आखिर वह बीमारी है क्या और कैसे अपनी जड़ों को मजबूत बनाती है. डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा हो जाता है. यह तब होता है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता. वहीं, गॉल ब्लैडर कैंसर की बात करें, तो यह कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित बढ़ोतरी के कारण होता है. गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय लिवर के नीचे मौजूद एक छोटा अंग है, जो पित्त को जमा करता है और पाचन में मदद करता है. दोनों बीमारियां अलग हैं, लेकिन ICMR की रिसर्च में पाया गया कि डायबिटीज और गॉल ब्लैडर कैंसर के बीच कोई कनेक्शन है. हालांकि, डायबिटीज होना कैंसर होने की गारंटी नहीं है, बल्कि कुछ कारण है जो कैंसर के खतरे को बढ़ाती है.

डायबिटीज कैसे बढ़ाता है गॉल ब्लैडर कैंसर का खतरा

ICMR – National Institute of Cancer Prevention and Research की रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज भी एक रिस्क फैक्टर है, ऐसे में अगर कोई व्यक्ति शुगर का मरीज है और ज्यादा प्रोटीन, फैट और कोलेस्ट्रॉल वाला और कम फाइबर, सब्जियों और फलों वाला खानपान करत है, तो GBC यानी गॉल ब्लैडर कैंसर का खतरा इससे बढ़ता है. हालांकि, भारत की कुछ स्टडीज में भी इसके बीच संबंध का संकेत मिलता है, लेकिन खानपान और GBC के बीच पक्का संबंध साबित करने के लिए आबादी के स्तर पर वैज्ञानिक सबूतों की कमी है, इसलिए इस स्टडी पर अभी ओर रिसर्च चल रही है.

---विज्ञापन---

गॉल ब्लैडर कैंसर के लक्षण

  • गॉल ब्लैडर कैंसर में अक्सर शुरुआती स्टेज में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देता है. कई मामलों में इसका पता किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान अचानक चलता है. मरीज में इसके कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे;
  • आमतौर पर पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है.
  • पित्त की नली में पथरी या ट्यूमर के कारण रुकावट होने पर दर्द तेज भी हो सकता है.
  • कुछ मरीजों में लगातार मतली या उल्टी की समस्या दिखाई दे सकती है.
  • गॉल ब्लैडर कैंसर के कुछ मरीजों में पीलिया हो सकता है. इसमें स्किन और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है.
  • इसके साथ तेज खुजली, गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल भी हो सकता है.
  • पेट में गांठ या सूजन
  • भूख कम लगना
  • बिना कारण वजन कम होना
  • कुछ मामलों में मरीज को बुखार भी हो सकता है.

लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि इन लक्षणों का दिखना जरूरी नहीं कि ये गॉल ब्लैडर कैंसर का संकेत है. पित्त की पथरी, हेपेटाइटिस और अन्य सामान्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, इसलिए बेहतर रहेगा कि आप अपना हेल्थ चेकअप कराते रहे.

कैसे रखें अपने आपको हेल्दी?

ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, गॉल ब्लैडर कैंसर से बचने का कोई पक्का तरीका नहीं है. लेकिन कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है. इसमें मोटापा एक अहम है, हेल्दी रहने के लिए हमेशा स्वस्थ वजन बनाए रखें और एक्टिव जीवन जीने की सलाह दी जाती है.

---विज्ञापन---
  • रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज और मोटे अनाज वाला स्वस्थ आहार लें.
  • रोजाना कम से कम ढाई कप फल और सब्जियां खाना, और प्रोसेस्ड फूड व रेड मीट का सेवन कम करने से गॉल ब्लैडर कैंसर सहित कई तरह के कैंसर का खतरा कम हो सकता है.
  • अगर गॉल स्टोन (पित्त की पथरी) से कोई ऐसी समस्या होती है जिसके लिए गॉल ब्लैडर को निकालने की जरूरत पड़ सकती है, तो इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह से इसे निकलवा लेना बेहतर हो सकता है.

यह भी पढ़ें:  ठंडा पसीना, सांस लेने में तकलीफ, हार्ट अटैक की स्थिति में कैसे दिखाई देते हैं लक्षण? कहीं आप भी

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

---विज्ञापन---

First published on: Aug 14, 2026 12:34 PM

End of Article

About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

Read More

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola