दिल्ली में महिला प्रदर्शनकारियों से मारपीट के दावे बेबुनियाद, DCP बोले- महिला पुलिस ने संभाला

सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों को नई दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है. दिल्ली के DCP ने साफ किया कि महिला कर्मियों ने ही महिला प्रदर्शनकारियों को संभाला और पूरी प्रक्रिया कानून के तहत की गई. वहीं हिरासत में लिए गए पुरुषों को भी तय समय पर छोड़ दिया.

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जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान यौन शोषण की शिकायत दिल्ली पुलिस को महिला पत्रकारों ने दी थी. Credit- ScreenGrab

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राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के दावों पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान सामने आया है. नई दिल्ली के के पुलिस उपायुक्त (DCP) ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है। सोशल मीडिया के कुछ हैंडल्स पर यह दावा किया जा रहा था कि प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई. इन दावों का खंडन करते हुए DCP ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन स्थल पर महिला प्रदर्शनकारियों को केवल महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ही संभाला गया था. उनके साथ पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ व्यवहार किया गया है.

डीसीपी ने आगे बताया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और बाद में उन्हें छोड़ने की पूरी कार्रवाई तय कानूनी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की गई है.उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पुरुष प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए तय समय सीमा के भीतर रिहा कर दिया गया. पुलिस प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे किसी भी दावे में सच्चाई नहीं है और वे वास्तविक घटनाक्रम को नहीं दर्शाते हैं. जो भी बातें इसके उलट फैलाई जा रही हैं, वे तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत हैं.

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कवरेज के दौरान बदसलूकी का आरोप

घटना 3 अक्टूबर की है. नई दिल्ली इलाके में धारा 163 BNSS लागू होने के बावजूद छात्र संगठन आइसा (AISA) और अन्य दल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटने की चेतावनी दी और न मानने पर उन्हें हिरासत में लेना शुरू किया. इसी दौरान शाम करीब 6 बजे वहां रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया. एक महिला पत्रकार ने लिखित शिकायत में कहा कि जब महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा था, तब वहां महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं.

इस बारे में सवाल पूछने पर एक एसीपी स्तर के अधिकारी ने कथित तौर पर उनके साथ यौन उत्पीड़न किया और उन्हें धक्का दे दिया.डीसीपी नेहा यादव ने बताया कि तीनों महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दी थी. पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज कर उनका मेडिकल कराया.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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