भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए भारत में बनी पहली स्वदेशी वैक्सीन ‘सर्वावैक’ को प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी का सीधा मतलब यह है कि यह भारतीय टीका अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह सुरक्षित, असरदार और उच्च गुणवत्ता वाला साबित हुआ है. इस टीके को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने तैयार किया है. यह टीका सर्वाइकल कैंसर की मुख्य वजह बनने वाले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के चार प्रमुख स्ट्रेन 16, 18, 6 और 11 के खिलाफ सुरक्षा देता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेन 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होते हैं, जबकि 6 और 11 जेनिटल वार्ट्स (मस्सों) का कारण बनते हैं. WHO के आंकड़ों के मुताबिक, 9 से 14 साल की उम्र में यह टीका लगवाने से लड़कियों में कैंसर का खतरा 90 फीसदी तक कम हो जाता है.
वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी पहुंच
WHO की प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी मिलने के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और दुनिया भर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए इस भारतीय वैक्सीन को खरीदना बेहद आसान हो जाएगा. इससे गरीब और विकासशील देशों में भी कम कीमत पर टीका पहुंचाया जा सकेगा. हालांकि, हर देश अपनी स्वास्थ्य नीति और बजट के अनुसार इसे अपने टीकाकरण अभियान में शामिल करने का फैसला करेगा.
भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है. चिंता की बात यह है कि अब 20 से 30 साल की युवतियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं और शुरुआती दौर में इसके लक्षण आसानी से पकड़ में नहीं आते. भारत सरकार पहले ही अपने राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में एचपीवी वैक्सीन को शामिल करने पर जोर दे रही है. ऐसे में ‘सर्वावैक’ को मिली वैश्विक मान्यता महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में गेमचेंजर साबित होगी.