Joint Pain Problem: जोड़ों की पुरानी समस्याओं से पीड़ित कई लोगों के लिए मानसून का आना सिर्फ ठंडे मौसम के साथ-साथ जोड़ों में दर्द और अकड़न में बढ़ोतरी भी लेकर आता है. हालांकि, मरीजों द्वारा इस मौसमी पैटर्न की शिकायत लंबे समय से की जाती रही है, लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मौसम में बदलाव वास्तव में यह प्रभावित कर सकता है कि जोड़ कैसा महसूस करते हैं, भले ही इसके होने की वजह पर अभी अध्ययन चल रहा है. हालांकि, इसको लेकर डॉक्टर प्रवीण टित्तल (निदेशक ऑर्थोपेडिक्स, सीके बिड़ला अस्पताल) का कहना है कि इसकी वजह वायुमंडलीय या बैरोमीटर बदलने से होता है.
क्या है जोड़ों में दर्द होने की असल वजह?
मानसून के दौरान, बारिश से पहले और बारिश के समय बैरोमीटर का दबाव कम हो जाता है. दबाव में इस कमी की वजह से जोड़ों के आसपास के टिशू थोड़े फैल सकते हैं, जिससे पहले से ही सूजे हुए जोड़ों पर दबाव पड़ता है. इसकी वजह से ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस या जोड़ों की पुरानी चोटों से पीड़ित लोगों को दर्द और अकड़न और ज्यादा महसूस हो सकती है.
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किन परेशानियों का करना पड़ता है सामना?
ठंडा और नम मौसम भी मांसपेशियों की अकड़न को बढ़ा सकता है. कम तापमान में मांसपेशियां, टेंडन और लिगामेंट्स कम लचीले हो जाते हैं, जिससे जोड़ अधिक जकड़े हुए महसूस होते हैं और उनकी हिलने-डुलने की क्षमता कम हो जाती है. यही कारण है कि कई लोगों को सुबह उठने पर या बरसात के दिनों में लंबे समय तक बैठने के बाद अधिक असुविधा महसूस होती है.
दूसरी क्या हो सकती है वजह?
मानसून के दौरान जोड़ों का दर्द बढ़ने का एक और कारण शारीरिक गतिविधि का कम होना है. बरसात का मौसम अक्सर बाहर व्यायाम करने और टहलने का मन नहीं करता, जिससे लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं. जब जोड़ लंबे समय तक काम नहीं करते तो इसमें चिकनाई जमने लगती है.
रूमेटाइड अर्थराइटिस समस्या होने पर क्या करें?
रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी सूजन संबंधी स्थितियों वाले लोगों के लिए, मौसम में बदलाव सीधे बीमारी को बदतर नहीं बनाता है, लेकिन वे दर्द के अहसास को बढ़ा सकते हैं. इसी तरह, पुराने फ्रैक्चर, लिगामेंट की चोटों या पुरानी सर्जरी वाले लोग अक्सर मौसमी मौसम बदलने की वजह से दिक्कत होती है.
जोड़ों के दर्द को कम करने के कई तरीके
मानसून में जुड़े जोड़ों के दर्द को कम करने के कई तरीके हैं. इस दौरान, आप नियमित रूप से कम प्रभाव वाले व्यायाम जैसे कि घर के अंदर टहलना, स्ट्रेचिंग, योग या स्विमिंग जोड़ों को गतिशील रखने में मदद कर सकते हैं. शरीर का वजन स्वस्थ बनाए रखने से घुटनों और कूल्हों जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों पर तनाव कम होता है. गर्म सेक करना, गर्म पानी से नहाना और लंबे समय तक ठंड और नमी के संपर्क में रहने से बचना भी राहत दे सकता है.
कब स्थिति हो सकती है गंभीर?
अगर दर्द गंभीर है, सूजन, लालिमा, बुखार या हिलने-डुलने में रुकावट के साथ है तो यह किसी अंतर्निहित सूजन की स्थिति या जोड़ों के संक्रमण का संकेत हो सकता है जिसके लिए तुरंत डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए.
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