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क्या कच्छ में जमीन के नीचे छिपी थी बस्ती? भारत-पाक सीमा के पास मिले 100 से ज्यादा कंकाल

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास ग्रेट रण ऑफ कच्छ के इलाके में एक प्राचीन बस्ती के अवशेष मिले हैं. इसी जगह पर 100 से ज्यादा मानव कंकाल भी पाए गए हैं.

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गुजरात के कच्छ से एक ऐसी पुरातात्विक खोज सामने आई है, जिसने इतिहास और पुरातत्व के एक्सपर्ट्स का ध्यान खींच लिया है. भारत-पाकिस्तान सीमा के पास ग्रेट रण ऑफ कच्छ के इलाके में एक प्राचीन बस्ती के अवशेष मिले हैं. इसी जगह पर 100 से ज्यादा मानव कंकाल भी पाए गए हैं. हैरानी की बात ये है कि आज जिस इलाके में दूर-दूर तक नमक और बंजर जमीन नजर आती है, वहां कभी एक आबाद बस्ती हुआ करती थी. पुरातत्वविदों को यहां मानव बस्तियों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन, तेल के दीये, तांबे के सिक्के और खिलौने जैसी चीजें भी मिली हैं.

BSF की गश्त के दौरान मिली थी जगह

इस पुरातात्विक स्थल पर सबसे पहले 2023-24 में BSF के जवानों की नियमित गश्त के दौरान ध्यान गया था. जमीन पर असामान्य संरचनाओं के अवशेष दिखाई देने के बाद विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दी गई. इसके बाद 2024 से क्रांतिगुरु श्यामजी कृष्ण वर्मा कच्छ यूनिवर्सिटी, PRL-BSIP, पुणे के डेक्कन कॉलेज और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स BSF की मदद से इस इलाके का अध्ययन कर रहे हैं.

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एक ही इलाके में मिले करीब 100 कंकाल

खोज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वो इलाका है, जहां करीब 100 मानव कंकाल एक साथ दफन मिले हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, ज्यादातर कंकालों की स्थिति एक जैसी है. कई कंकालों का सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा की ओर पाए गए हैं. कुछ अवशेषों में एक बच्चे के होने की संभावना भी जताई गई है. हालांकि एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि इतने सारे कंकाल मिलने का मतलब ये जरूरी नहीं कि यहां किसी सामूहिक मौत की घटना हुई थी. ये जगह एक पुराना कब्रिस्तान भी हो सकता है. इसका सही कारण वैज्ञानिक जांच के बाद ही सामने आएगा.

600-1000 साल पुरानी हो सकती है बस्ती

शुरुआती जांच में इस बस्ती के मध्यकालीन काल की होने की संभावना जताई जा रही है. अनुमान है कि ये जगह करीब 600 से 1,000 साल पुरानी हो सकती है, हालांकि इसकी सही उम्र अभी तय नहीं हुई है. शोधकर्ता ये भी जांच रहे हैं कि क्या कभी इस इलाके से गुजरने वाली सिंधु नदी के बहाव में बदलाव, बाढ़ या किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से ये बस्ती धीरे-धीरे जमीन के नीचे दब गई थी. आगे की जांच में कंकालों की रेडियोकार्बन डेटिंग, मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण, विस्तृत मैपिंग और DNA अध्ययन किया जा सकता है. इन रिसर्च से ये पता लगाने में मदद मिलेगी कि यहां रहने वाले लोग कौन थे, उनका लाइफस्टाइल कैसा था और आखिर इस बस्ती के खत्म होने के पीछे क्या वजह रही.

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First published on: Aug 11, 2026 07:19 PM

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