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दुनिया का अनोखा द्वीप, जहां हर 6 महीने में बदलता है देश का प्रशासन; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

फ्रांस और स्पेन के बीच बिदासोआ नदी में मौजूद फीजेंट आइलैंड दुनिया के सबसे अनोखे इलाकों में शामिल है. इस छोटे से द्वीप का प्रशासन हर छह महीने में दोनों देशों के बीच बदलता है. 1659 की ट्रीटी ऑफ द पाइरेनीज से जुड़ी इस जगह की कहानी बेहद दिलचस्प है.

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दुनिया में सीमा विवाद को लेकर कई देशों के बीच तनाव और संघर्ष की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों के बीच जमीन और सीमाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चले आ रहे हैं. लेकिन दुनिया में एक ऐसा छोटा सा द्वीप भी है, जिसे लेकर दो देशों के बीच कोई झगड़ा नहीं है. उल्टा, दोनों देश तय व्यवस्था के तहत हर छह महीने में बारी-बारी से इसका नियंत्रण एक-दूसरे को सौंपते हैं. यह अनोखा द्वीप फीजंट आइलैंड (Pheasant Island) है, जो फ्रांस और स्पेन के बीच स्थित है. साल के छह महीने यह फ्रांस के प्रशासन में रहता है और अगले छह महीने स्पेन इसकी जिम्मेदारी संभालता है. दोनों देशों के बीच इस व्यवस्था को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है. इस अनोखी व्यवस्था के कारण फीजंट आइलैंड दुनिया के सबसे दिलचस्प इलाकों में गिना जाता है.

यह छोटा सा द्वीप बिदासोआ नदी के बीच स्थित है. यही नदी फ्रांस और स्पेन के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है और आगे जाकर अटलांटिक महासागर में मिल जाती है. नदी के एक तरफ फ्रांस का हेंदाए शहर है, जबकि दूसरी ओर स्पेन का इरुन क्षेत्र पड़ता है. करीब 200 मीटर लंबा यह छोटा-सा भूभाग स्थायी रूप से किसी एक देश का हिस्सा नहीं है. अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में इसे कंडोमिनियम कहा जाता है, यानी दो देशों के बीच साझा संप्रभुता वाला क्षेत्र.

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1659 की संधि से जुड़ा है इतिहास

फीजंट आइलैंड का इतिहास भी काफी दिलचस्प है. साल 1659 में फ्रांस और स्पेन के प्रतिनिधि इसी द्वीप पर मिले थे. यहां दोनों देशों के बीच ट्रीटी ऑफ द पाइरेनीज नाम की महत्वपूर्ण संधि हुई थी. इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच करीब 30 साल से चला आ रहा युद्ध खत्म हुआ था.

संधि में सीमा तय करने के लिए बिदासोआ नदी के बीच को आधार माना गया. ऐसे में नियम के हिसाब से द्वीप को भी दो हिस्सों में बांटा जा सकता था, क्योंकि इसका क्षेत्रफल करीब 1.6 एकड़ ही है. एक हिस्सा फ्रांस और दूसरा स्पेन के पास जा सकता था. लेकिन दोनों देशों ने ऐसा करने के बजाय एक अलग और शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाई. उन्होंने पूरे द्वीप को ‘कंडोमिनियम’ घोषित कर दिया. इसका मतलब है कि इस इलाके पर दोनों देशों का साझा अधिकार रहेगा.

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छह महीने बाद बदल जाता है नियंत्रण

इस द्वीप का प्रशासन हर साल दो बार बदलता है. 1 फरवरी से 31 जुलाई तक स्पेन इसकी जिम्मेदारी संभालता है, जबकि 1 अगस्त से 31 जनवरी तक नियंत्रण फ्रांस के पास रहता है. यानी अगस्त की शुरुआत में फ्रांस को प्रशासन मिलता है और फरवरी में यह जिम्मेदारी फिर स्पेन को सौंप दी जाती है.

नियंत्रण बदलने की प्रक्रिया भी सामान्य प्रशासनिक बदलाव जैसी नहीं है. दोनों देशों के अधिकारी औपचारिक रूप से एक-दूसरे को जिम्मेदारी सौंपते हैं. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रतीक मानी जाती है.

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आम लोगों के लिए नहीं खुलता

इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद फीजेंट आइलैंड में आज के समय में लोग नहीं रहते हैं. यहां आम लोगों की आवाजाही भी सामान्य रूप से नहीं होती है. द्वीप की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी दोनों देशों के संबंधित अधिकारी संभालते हैं.

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दिलचस्प बात यह है कि नाम भले ही ‘फीजेंट आइलैंड’ यानी तीतर के द्वीप का हो, लेकिन यहां तीतर नहीं पाए जाते. यही वजह है कि यह छोटा-सा द्वीप अपने आकार से कहीं ज्यादा अपने इतिहास और अनोखी राजनीतिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है. फ्रांस और स्पेन के बीच इसका छह-छह महीने का प्रशासन आज भी दुनिया में साझा संप्रभुता का एक दुर्लभ उदाहरण है.

First published on: Aug 16, 2026 02:26 PM

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