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ज्वाइनिंग के अगले दिन कर्मचारी ने छोड़ी नौकरी, CEO से बोलीं- घर से ले जाइए कंपनी का लैपटॉप

एक कंपनी के सीईओ ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बताया कि कैसे एक नई कर्मचारी ने ज्वाइनिंग के महज 24 घंटे के भीतर नौकरी छोड़ दी और कंपनी से कहा कि वे उसका लैपटॉप घर से ही कलेक्ट करवा लें.

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राजस्थान की राजधानी जयपुर से ऐसा मामला सामने आया है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई एथिक्स को लेकर नई बहस छिड़ गई है. एक कंपनी के सीईओ ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बताया कि कैसे एक नई कर्मचारी ने ज्वाइनिंग के महज 24 घंटे के भीतर नौकरी छोड़ दी और कंपनी से कहा कि वे उसका लैपटॉप घर से ही कलेक्ट करवा लें.

ज्वाइनिंग से पहले मांगे 50 हजार एक्स्ट्रा

वांशिव टेक नाम की कंपनी के सीईओ और एआई नेटिव फाउंडर गौरव खेत्रपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भड़ास निकालते हुए बताया कि उन्होंने इस कैंडिडेट को हायर करने के लिए पूरा 3 महीने का नोटिस पीरियड का इंतजार किया था. गौरव के मुताबिक, ज्वाइनिंग से महज तीन दिन पहले उस कैंडिडेट ने 50,000 रुपये एक्सट्रा पैकेज की मांग कर दी. कंपनी ने इस डर से उसकी यह शर्त भी मान ली कि कहीं वह आखिरी वक्त में भाग ना जाए और उनकी महीनों की मेहनत पर पानी न फिर जाए.

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सिर्फ एक दिन काम

ज्वाइनिंग के पहले दिन कैंडिडेट ने ऑफिस आकर ऑनबोर्डिंग की फॉर्मेलिटीज पूरी कीं, कंपनी का लैपटॉप और अन्य गैजेट्स लिए और पर्सनल वजहों का हवाला देते हुए ‘वर्क फ्रॉम होम’ मांगा, जिसके बाद उसे मंजूरी दे दी गई. दूसरे दिन महिला कर्मचारी ने कंपनी के फोन, ईमेल्स और मैसेजेस का जवाब देना बंद कर दिया. जब काफी मशक्कत के बाद उससे संपर्क हुआ तो उसने बताया कि पर्सनल वजहों से वह नौकरी कंटिन्यू नहीं कर पाएंगी. इसके साथ ही उसने सीईओ से दिया कि कंपनी का दिया हुआ लैपटॉप उसके घर से कलेक्ट करवा लें.

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25 हजार का लालच

कर्मचारी के इस गैर-पेशेवर रवैये से परेशान होकर सीईओ गौरव खेत्रपाल को खुद दखल देना पड़ा. उन्होंने ईमेल भेजकर चेतावनी दी कि अगर रात 8 बजे तक कंपनी का लैपटॉप और अन्य संपत्तियां वापस नहीं सौंपी गईं, तो वे उसके खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद कर्मचारी ने लैपटॉप लौटा दिया. बाद में पता चला कि उस कर्मचारी ने किसी दूसरी कंपनी में 25,000 रुपये ज्यादा के पैकेज पर तुरंत ज्वाइन कर लिया था.

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सीईओ ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘3 महीने के लंबे इंतजार के बाद हम फिर वहीं खड़े हैं, जबकि कैंडिडेट ने 25 हजार के लालच के लिए अपनी प्रोफेशनलिज्म की बलि चढ़ा दी. उम्मीद है कि एआई जल्द ही ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों की जगह ले लेगा.’

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सीईओ की यह पोस्ट वायरल हो गई और इंटरनेट पर दो तरह की राय सामने आने लगीं. कुछ लोग जहां कंपनी के समर्थन में आए तो वहीं, दूसरे लोग कर्मचारी को सही बताने लगे. कई एचआर प्रोफेशन्ल्स ने कहा कि ऐसे वर्क कल्चर से कंपनियों का समय और संसाधन बर्बाद होता है. वहीं कुछ अन्य लोगों का मानना था कि आज का फ्री मार्केट एम्प्लॉई-सेंट्रिक है. जब कंपनियां बिना नोटिस दिए कर्मचारियों को रातों-रात निकाल सकती हैं, तो कर्मचारियों के पास भी बेहतर विकल्प चुनने का पूरा अधिकार होना चाहिए.

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First published on: Aug 09, 2026 05:27 PM

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