पेरिस जलवायु समझौता, 60 संस्थाएं-संगठन… 12 महीने में कितने अंतर्राष्ट्रीय समझौते और संबंध तोड़ चुके हैं ट्रंप?

US International Relations: अमेरिका ने एक साल में 70 संस्थाओं और संगठनों से नाता तोड़ लिया है. ताजा संबंध विश्व स्वास्थ्य संगठन से तोड़ा गया है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. पिछले करीब एक साल में ही राष्ट्रपति ट्रंप ने कई संयुक्त राष्ट और गैर-संयुक्त राष्ट,

Donald Trump

Credit: Social Media

विज्ञापन

Donald Trump News: अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से नाता तोड़ लिया है. WHO से 78 साल पुराना रिश्ता तोड़ने का औपचारिक ऐलान राष्ट्रपति कर चुके हैं और सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल भी पूरा हो गया है और अपने इस एक साल के कार्यकाल में उन्होंने अमेरिका फर्स्ट की पॉलिसी के तहत करीब 70 अंतर्राष्ट्रीय समझौते, संगठनों और संस्थाओं से नाते तोड़े हैं, जिनका असर अमेरिका पर तो नहीं पड़ा, लेकिन बाकी दुनिया पर जरूर किसी न किसी तरह पड़ा.

यह भी पढ़ें: Explained: WHO क्या है? कब बना, कितने सदस्य और क्या काम करता है? जानिए हर डिटेल

विज्ञापन

इन संगठनों से अलग हुआ है अमेरिका

बता दें कि अमेरिका ने WHO से नाता तोड़ने के साथ ही खुद को 65 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संबंधों से बाहर किया है, जिनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं. जिन 31 संस्थाओं से अमेरिका बाहर निकला है, उनमें आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, पश्चिम एशिया के लिए आर्थिक आयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र, पीसबिल्डिंग कमीशन और फंड, UN Women, UNFCCC यानी जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन, UN पॉपुलेशन फंड, UN वाटर, UN यूनिवर्सिटी समेत कई संगठन शामिल हैं.

इन संस्थाओं से भी अलग हुआ अमेरिका

अमेरिका ने जिन 35 गैर-यूएन संगठनों से खुद को अलग किया है, उनमें इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, ग्लोबल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस और कई क्षेत्रीय एवं पर्यावरण से जुड़े संगठन शामिल हैं. इनके अलावा जनवरी 2025 में अमेरिका ने पेरिस जलवायु समझौते से खुद को अलग किया था और वह फैसला 27 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा.

विज्ञापन

इनका सदस्य तो अभी बना रहेगा अमेरिका

अमेरिका प्रशासन ने अब पेरिस जलवायु समझौते की बुनियाद UNFCCC से भी देश को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं सीनेट से मंजूर संधि होने के नाते ट्रंप सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती मिल सकती है. ट्रंप प्रशासन सरकार ने देश-दुनिया को पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और शरणार्थी एजेंसी UNHCR का सदस्य बना रहेगा, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय हितों के लिए यह जरूरी हैं. इसलिए ट्रंप सरकार ने ऐलान किया कि इन संस्थाओं का सहयोग बढ़ाएंगे.

WHO से अलगाव का यह होगा नुकसान

बता दें कि WHO से नाता तोड़ने का सबसे बड़ा असर दुनिया की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा. अमेरिका के वैज्ञानिकों और दवा कंपनियों का लाभ नहीं मिलेगा. नए टीके और दवाएं विकसित करना मुश्किल हो जाएगा. वहीं अमेरिका को करीब 2600 करोड़ रुपये का बकाया विश्व स्वास्थ्य संगठन को चुकाना होगा. अमेरिका को अब दुनियरा में फैली किसी महामारी का अलर्ट नहीं मिलेगा. बीमारी से बचने के लिए इंटरनेशनल गाइडलाइन अमेरिका में लागू नहीं हो पाएंगी. महामारी से बचने के लिए जब सभी देश एकजुट होंगे तो अमेरिका हिस्सा नहीं बनेगा.

विज्ञापन

किसी राष्ट्रपति का सबसे विनाशकारी फैसला

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ लॉ एक्सपर्ट लॉरेंस गोस्टिन ने राष्ट्रपति ट्रंप के विश्व स्वास्थ्य संगठन से नाता तोड़ने के फैसले को अपने जीवनकाल का सबसे विनाशकारी राष्ट्रपति फैसला बताया है. WHO संयुक्त राष्ट्र की स्पेशल हेल्थ एजेंसी है, जो दुनियाभर में फैली चिकनपॉक्स, इबोला और पोलियो जैसी बीमारियों से निपटने में देशों को आर्थिक सहयोग करती है. गरीब देशों को वैक्सीन और दवाइयां उपलब्ध कराती है. मानसिक स्वास्थ्य और कैंसर समेत कई बीमारियों के लिए जरूरी दिशा निर्देश तय करने उनका पालन सुनिश्चित कराती है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ