पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के नजदीक भारत अपनी रणनीतिक कनेक्टिविटी को और पुख्ता करने की तैयारी में है. देश की सुरक्षा और रसद आपूर्ति को मजबूत करने के लिए श्योक नदी के किनारे 150 किलोमीटर लंबी एक नई सड़क बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है. सीमा सड़क संगठन (BRO) इस समय श्योक नदी के पूर्वी तट के साथ दौलत बेग ओल्डी (DBO) तक बनने वाली इस 150 किलोमीटर लंबी सड़क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
पांच चरणों में बनेगी यह सड़क
प्रस्तावित योजना के अनुसार, इस 150 किलोमीटर लंबे मार्ग को पांच अलग-अलग भागों में बांटकर तैयार किया जाएगा. यह पूरी परियोजना पहले से मौजूद रणनीतिक ‘दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी’ (DS-DBO) सड़क नेटवर्क का ही एक हिस्सा है. इसे नेशनल हाईवे डबल लेन (NHDL) के मानकों के अनुरूप विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे भारी वाहनों और सैन्य साजो-सामान की आवाजाही सुगम हो सके.
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह नया मार्ग?
प्रस्तावित सड़क का लोकेशन भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है. दौलत बेग ओल्डी (DBO) पूर्वी लद्दाख के उत्तरी उप-क्षेत्र में चीन से सटी LAC के ठीक पास स्थित है. इसी दायरे में रणनीतिक डेपसांग मैदान आते हैं और यह इलाका विश्व प्रसिद्ध काराकोरम दर्रे के भी बेहद करीब है.
वर्तमान में सक्रिय दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क ने पहले ही इस इलाके में जवानों और जरूरी सामान की आवाजाही को बहुत आसान बना दिया है. हालांकि, श्योक नदी के पूर्वी तट से बनने वाला यह नया मार्ग सेना को एक मजबूत अतिरिक्त क्षमता देगा. किसी भी आपात स्थिति में यह नया रास्ता एक भरोसेमंद वैकल्पिक मार्ग साबित होगा, जिससे सीमांत अग्रिम मोर्चों तक रसद और सुरक्षा बलों की पहुंच कभी बाधित नहीं होगी.
मुश्किल हालात में मिलेगा वैकल्पिक रास्ता
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सेना को अग्रिम मोर्चों तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त और सुरक्षित विकल्प मिल जाएगा. लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सड़कें अक्सर अचानक आने वाली बाढ़, ग्लेशियर पिघलने, लैंडस्लाइड और खराब मौसम के चलते बंद हो जाती हैं. ऐसे में अगर मौजूदा रास्ते का कोई हिस्सा बाधित भी होता है तो यह नया मार्ग सेना और रसद की आवाजाही को बिना रुके जारी रखेगा.
इंजीनियरिंग के लिए कड़ी परीक्षा
हालांकि, इस सड़क को तैयार करना आसान नहीं होगा. श्योक नदी लद्दाख के बेहद दुर्गम और पथरीले रास्तों से होकर बहती है. यहां अत्यधिक ऊंचाई, हाड़ कंपाने वाली सर्दियां और गर्मियों में बर्फ पिघलने से नदी के जलस्तर में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इस वजह से नदी के किनारे सड़क बनाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए मजबूत सुरक्षा दीवारें, बड़े पुल और खास इंजीनियरिंग की जरूरत होगी. तैयार की जा रही DPR में इन्हीं तकनीकी चुनौतियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि 150 किमी के इस हिस्से के लिए सबसे सुरक्षित और सही रास्ता तय किया जा सके.
सीमा पर बढ़ेगी सेना की ताकत
पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार एलएसी के अग्रिम क्षेत्रों में सड़कों, पुलों और सुरंगों का जाल बिछाने पर लगातार काम कर रही है. सीमा पर बेहतर सड़कें सीधे तौर पर सेना की लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाती हैं. नया रास्ता बनने से सैनिकों, सैन्य वाहनों, गोला-बारूद और ईंधन को सीमांत चौकियों तक बेहद कम समय में पहुंचाया जा सकेगा. अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो यह लद्दाख में भारत के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई मजबूती देगा.