Rishabh Sharma
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15 अगस्त का दिन हर हिंदुस्तानी के लिए सिर्फ़ आज़ादी के जश्न का प्रतीक नहीं है. यह हमारे स्वाभिमान और गर्व का वो पल है जब हर देशवासी का सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है. इस ऐतिहासिक तारीख पर जब भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ उसी के घर पर गॉल में टेस्ट सीरीज़ का पहला मुकाबला खेलने उतरेगी तो मैदान पर तिरंगे के साथ-साथ फैंस की उम्मीदें भी लहराएंगी. वैसे इस टेस्ट को लेकर एक अलग कहानी भी मैदान पर दिख सकती है.
दरअसल जब भी किसी खिलाड़ी को अपनी मेहनत का फल देर से मिलता है तो फैंस की भावनाएं उससे जुड़ जाती हैं. मुंबई के रन-मशीन बल्लेबाज़ सरफराज़ खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जब उन्हें टीम इंडिया से बाहर किया गया था तो कई फैंस और पूर्व क्रिकेटरों ने यही आवाज़ उठाई कि उन पर सिलेक्टर्स को थोड़ा और भरोसा दिखाना चाहिए था. अब जब साईं सुदर्शन की चोट की वजह से उनके लिए टेस्ट टीम के दरवाज़े दोबारा खुले हैं तो मन में यही सवाल तैर रहा है कि क्या पहले टेस्ट में सरफराज़ को फाइनल-11 में जगह मिलेगी?
श्रीलंका की धरती पर पिछले 2 दशकों में भारत का टेस्ट इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. वैसे इस बीच में भारतीय टीम ने श्रीलंका में टेस्ट मैच कम ही खेले हैं. मसलन 2010 में महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम श्रीलंका में 1-1 से सीरीज़ बराबर करने में सफल रही. फिर विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने 2015 में 2-1 से सीरीज़ जीती. बारी आई 2017 की तो यहां 3 मैच की सीरीज़ में टीम इंडिया ने 3-0 से बाज़ी मारी.
जिसके बाद से टीम इंडिया ने श्रीलंका में कोई भी टेस्ट सीरीज़ नहीं खेली है. यानी आंकड़ों के नज़रिए से देखें तो टीम इंडिया ने पिछले 18 साल से श्रीलंका में कोई भी टेस्ट सीरीज़ नहीं गंवाई है. लिहाज़ा कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर के कंधों पर इस पुराने अजेय रिकॉर्ड और दबदबे को बरकरार रखने की बड़ी जिम्मेदारी है. इस साख को बचाए रखने के लिए सही और संतुलित प्लेइंग-11 का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.
🚨 NEWS 🚨
— BCCI (@BCCI) August 9, 2026
Sai Sudharsan ruled out of the #SLvIND Test series; Sarfaraz Khan named replacement.
Details 🔽 #TeamIndia https://t.co/lF6h8jabZd pic.twitter.com/Dk0C4HI37p
गॉल टेस्ट से पहले कोलंबो में खेले गए तीन दिन के वॉर्म अप मैच के समय सरफराज़ खान श्रीलंका नहीं पहुंचे थे. इसलिए उन्हें इस मुकाबले में उतरने का मौका नहीं मिल सका. अगर इस मैच के प्रदर्शन को देखें तो देवदत्त पड्डिक्कल ने पहली पारी में नाबाद 142 रनों की शानदार पारी खेलकर अंतिम-11 में अपनी दावेदारी मजबूत रखी है. इसके अलावा केएल राहुल और रवींद्र जडेजा भी इस दौरान लय में दिखे. दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल ने भी 61 रन बनाए और कप्तान शुभमन गिल ने 44 रन बनाकर अपनी फिटनेस साबित की. अब टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या सरफराज़ खान को बिना किसी वॉर्मअप मैच सीधे गॉल जैसी स्पिनर्स की मददगार और मुश्किल पिच पर उतरना सही फैसला होगा?
Sarfaraz Khan has joined team India. (Revsportz). pic.twitter.com/JvoWBYblE0
— Mufaddal Vohra (@mufaddal_vohra) August 10, 2026
गौतम गंभीर के कोचिंग कार्यकाल में भारतीय टीम का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की रेस में बने रहने के लिए मौजूदा सीरीज़ कितनी अहम है ये बात भी फैंस बखूबी जानते हैं. उस पर रोहित और विराट जैसे दिग्गजों के जाने के बाद से अभी भी मौजूदा वक्त भारतीय क्रिकेट के लिए नए बदलावों का दौर चल रहा है. कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट सही कॉम्बिनेशन चुनने का है.
SARFARAZ KHAN IN COLOMBO pic.twitter.com/15DT4q84Cp
— Divyam sharma (@divyam_6801) August 10, 2026
साईं सुदर्शन अगर फिट होते तो वे नंबर-3 पर एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के रूप में पहली पसंद होते. लेकिन फिलहाल ये रेस पड्डिकल जीत चुके हैं. प्रैक्टिस मैच कैसा भी रहा हो, लेकिन ऋषभ पंत की वापसी के बाद पहले टेस्ट में बतौर विकेटकीपर पंत का खेलना तय माना जा रहा है. ज़रूरत को देखते ध्रुव जुरेल को भी एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर खिलाने की चर्चाएं गर्म हैं. कुल मिलाकर अगर जुरेल और पड्डिक्कल दोनों को मौका दिया गया तो इसका मतलब होगा कि सरफराज़ बाहर बैठेंगे.
वैसे यहां कोच गौतम गंभीर को तय करना होगा कि वे हालिया फॉर्म को तवज्जो देंगे या फिर सरफराज़ के उस फॉर्म को जो उन्होंने आईपीएल से पहले घरेलू क्रिकेट में दिखाया था. आईपीएल के पहले रणजी ट्रॉफी में सरफराज़ अच्छी लय में नज़र आए थे. मुंबई के लिए खेलते हुए रणजी ट्रॉफी के 7 मैच की 9 पारियों में सरफराज ने पिछले सीज़न 53.62 की औसत और 75.13 के स्ट्राइक रेट से कुल 429 रन निकाले. इस दौरान 227 रनों की सर्वश्रेष्ठ पारी के साथ उन्होंने एक शतक और एक अर्द्धशतक अपने नाम किया.
SARFARAZ KHAN ON THE WAY TO SRI LANKA 🔥 [Sahil Malhotra]
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 9, 2026
– All the best, Sarfaraz Khan. pic.twitter.com/dBp2cQ2RC7
अपनी टीम के लिए सीजन की रन-मशीन लिस्ट में वे तीसरे टॉप स्कोरर रहे और उनसे आगे सिर्फ 774 रनों के साथ सिद्धेश लाड और 446 रनों के साथ मुशीर खान थे. इसके अलावा भी आंकड़े सरफराज़ को नज़रअंदाज़ करने के हालात नहीं बनाते. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका औसत 64.73 का है. भारत के लिए खेले गए 6 टेस्ट मैच में उन्होंने 37.10 की औसत और 74.94 की आक्रामक स्ट्राइक रेट से 371 रन बनाए हैं. जिसमें 150 रनों की एक यादगार शतकीय पारी और 3 अर्द्धशतक शामिल हैं.
इतिहास गवाह रहा है कि श्रीलंका की पिचों पर हमेशा से स्पिनर्स का बोलबाला रहा है. भारत अगर बीते 18 सालों में लंकाई सरज़मीं पर टेस्ट सीरीज़ नहीं हारा तो इसकी वजह भारत की अच्छी बल्लेबाज़ी के साथ-साथ, टीम इंडिया में मौजूद अश्विन और जडेजा जैसे दिग्गज स्पिनर्स भी थे. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं क्योंकि घर तो छोड़ो कंडीशंस कहीं की भी हों, भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए स्पिनर्स को खेलना ही टेढ़ा सवाल बन गया है.
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गॉल का मैदान अपनी टर्न और बाउंस के लिए जाना जाता है, जहां स्थानीय स्पिन गेंदबाज़ मैच पर हावी रहेंगे. मेरी राय में इन हालात में सरफराज़ खान का टीम में होना एक बड़ा प्लस प्वाइंट बन जाता है. सरफराज़ स्पिन गेंदबाज़ी को खेलने में बेहद माहिर माने जाते हैं. घरेलू क्रिकेट से ही स्वीप और रिवर्स स्वीप खेलने की उनकी काबिलियत श्रीलंकाई स्पिनरों की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है. फिर भी अंतिम फैसला कप्तान और कोच को ही करना होगा.
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एक आम क्रिकेट प्रेमी के नज़रिए से सोचें तो दिल हमेशा यही कहता है कि जिस खिलाड़ी ने सालों तक पसीना बहाकर खुद को साबित किया हो, उसे बार-बार इंतज़ार न कराया जाए. जब सरफराज़ ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 150 रनों की पारी खेली थी तो लगा था कि वे अब टीम इंडिया का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन क्रिकेट का खेल कभी-कभी बहुत निर्दयी हो जाता है. मैनेजमेट की पसंद कहा जाए, टीम का संतुलन या परिस्थितियों का गणित… एक सच्चाई ये है कि कई बार बेहतरीन खिलाड़ियों को भी डगआउट में बैठना पड़ता है. गंभीर और गिल को यहां दिमाग से यह फैसला लेना होगा कि वे छह बल्लेबाज़ों के साथ मैदान में उतरेंगे या पांच गेंदबाजों के आक्रामक कॉम्बिनेशन को तरजीह देंगे.
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आखिर में यही कहूंगा कि 15 अगस्त का ऐतिहासिक दिन भारतीय क्रिकेट फैंस के साथ-साथ सरफराज़ खान के करियर के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. अगर उन्हें गॉल टेस्ट में अंतिम एकादश का हिस्सा बनाया जाता है, तो यह उनके कभी न टूटने वाले हौसले की जीत होगी. लेकिन अगर ध्रुव जुरेल को उन पर तरजीह मिलती है तो फैंस के दिलों में एक मलाल ज़रूर रह जाएगा कि सरफराज़ खान को अपनी काबिलियत साबित करने का एक और मौका नहीं मिल पाया.
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इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि ध्रुव जुरेल प्लेइंग-11 में मौका डिज़र्व नहीं करते. उन्होंने भी लगातार अच्छा किया है लेकिन एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ और विकेटकीपर बल्लेबाज़ के बीच में चयन करना ही तो इस मौके का धर्म संकट है. वैसे मैं ये भी मानता हूं कि अगर पहले टेस्ट में सरफराज़ खान नहीं खेलते तो उन्हें किसी दूसरे बल्लेबाज़ के नहीं चलने पर 23 से 27 अगस्त के बीच होने वाले दूसरे टेस्ट में मौका ज़रूर मिलेगा. देखना है कि गौतम गंभीर और शुभमन गिल इस मुश्किल सवाल का क्या जवाब ढूंढते हैं.
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