सरकारी दफ्तरों में कुर्सी पर सफेद तौलिया क्यों दिखता है? जानिए इससे जुड़े फैक्ट्स

सरकारी ऑफिस में रखी कुर्सी पर सफेद तौलिया बिछा आपने देखा होगा. आखिर क्यों ऐसा किया जाता है, यह परंपरा कहां से जुड़ी हुई हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.  

why are white towels palced on chair
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ब्रिटिश दौर से जुड़ा है इतिहास. Image Credit- Freepik

सरकारी दफ्तर की तस्वीर सामने आते ही कुछ चीजें आमतौर पर ध्यान खींचती हैं. फाइलों से भरी मेज, बड़ी कुर्सी और उस कुर्सी पर करीने से बिछा हुआ सफेद तौलिया. आपने भी कई सरकारी कार्यालयों में बड़े अधिकारी की कुर्सी पर सफेद तौलिया जरूर देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर कुर्सी पर तौलिया रखने की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या यह सिर्फ साफ-सफाई के लिए है या इसके पीछे कोई पुरानी परंपरा भी जुड़ी है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि तौलिया बिछाने की क्या परंपरा है.

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गर्मी और पसीने से बचाना 

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भारत के कई हिस्सों में गर्मी काफी ज्यादा पड़ती है पुराने समय में सरकारी दफ्तरों में आज जैसी एसी की सहुलियत नहीं थी. अधिकारी लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते थे, ऐसे में कुर्सी पर रखा तौलिया पसीना सोखने और कपड़े या कुर्सी को गंदा होने से बचाने में मदद करता था. इसे भी पढ़ें- ट्रक के पीछे ‘Horn OK Please’ लिखने की क्या है वजह? जानिए इसके पीछे की कहानी 

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कुर्सी को गंदा होने से बचाना 

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पुराने दौर में लकड़ी या दूसरे फर्नीचर की कुर्सियों को बार-बार साफ करना आज की तुलना में मुश्किल था. इसके अलावा, बालों में तेल लगाने की आदत भी आम थी. ऐसे में कुर्सी की पीठ पर तौलिया लगाने से पसीने, धूल और तेल के निशानों से फर्नीचर को बचाया जा सकता था.

धीरे-धीरे बन गई अधिकारी की पहचान

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समय के साथ सफेद तौलिया सिर्फ इस्तेमाल कपड़ा नहीं रहा. सरकारी दफ्तर में वरिष्ठ अधिकारी की कुर्सी बाकी कुर्सियों से अलग होती थी और सफेद तौलिया इस अंतर को और साफ दिखाने लगा. कई रिपोर्टों में इसे पुराने लोग पद या रैंक की पहचान से जोड़ते थे.

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ब्रिटिश दौर से जुड़ा है इतिहास 

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इस परंपरा को अक्सर ब्रिटिशकालीन प्रशासनिक संस्कृति से जोड़ा जाता है. उस समय सरकारी दफ्तरों में अधिकारी का पद कई चीजों से अलग दिखाई देता था जैसे मरा, मेज, कुर्सी और बैठने की सुविधा तक में अंतर होता था. इसलिए इसे ब्रिटिशकालीन दफ्तर संस्कृति से जुड़ी एक मान्यता है.

सफेद रंग ही क्यों?

सफेद रंग ही क्यों?6 / 7

अब सवाल आता है कि तौलिया सफेद ही क्यों होता है? इसकी कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन सफेद कपड़े पर धूल और दाग आसानी से दिखाई देते हैं. इसलिए सफाई का पता जल्दी चल जाता है. सफेद तौलिये को धोना और जरूरत पड़ने पर ब्लीच करना भी आसान माना जाता है.

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क्या यह सिर्फ सरकारी अफसरों की कुर्सी पर होता है?

क्या यह सिर्फ सरकारी अफसरों की कुर्सी पर होता है?7 / 7

कई नेताओं और दूसरे सार्वजनिक पदों से जुड़े लोगों की कुर्सियों पर भी सफेद तौलिया देखने को मिलता है. यही वजह है कि समय के साथ यह सिर्फ एक कुर्सी कवर नहीं, बल्कि कुछ जगहों पर वीआईपी या वरिष्ठ पद की पहचान जैसा नजर आने लगा. इसे भी पढ़ें- होटल रूम में रखी स्लीपर्स का क्या होता है काम? जानिए क्यों दी जाती हैं यूज एंड थ्रो चप्पल

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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