हर डिलीवरी बॉक्स का रंग भूरा ही क्यों होता है? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

Cardboard Colour History: ऑनलाइन आने वाला हर सामान हमेशा हल्के भूरे या ब्राउन रंग के डिब्बे में ही आता है? ऐसा क्यों है, अगर आपको इसके पीछे नहीं मालूम तो यह लेख मददगार साबित हो सकता है. यहां पर हम आपको इससे जुड़े फैक्ट्स साझा कर रहे हैं.

Cardboard Colour History
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बॉक्स का रंग भूरा क्यों होता है? Image Credit- Freepik

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बॉक्स का रंग भूरा क्यों होता है?

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ज्यादातर शिपिंग बॉक्स में क्राफ्ट पेपर से बने कोरुगेटेड बोर्ड का इस्तेमाल होता है. क्राफ्ट पेपर लकड़ी के पल्प से बनाया जाता है और जब इसे पूरी तरह ब्लीच करके सफेद नहीं किया जाता तो इसमें मौजूद नेचुरल रंग बना रहता है. इसी वजह से पेपर हल्का भूरा या मिट्टी जैसा दिखाई देता है. इसे भी पढ़ें- फ्लाइट से पहले लोग लगेज के पहियों पर क्यों लगा रहे टेप? वजह जानकर आप भी करेंगे ट्राई

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पैसों की होती है बचत

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बॉक्स को दूसरा रंग देने के लिए ब्लीच करने वाला प्रोसेस अपनाया जाता है, जिसे ब्लीचिंग कहा जाता है. इस दौरान केमिकल और दूसरी चीजों को इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लागत बढ़ जाती है. वहीं, यह बॉक्स एक बार इस्तेमाल करने के लिए बनाए जाते हैं तो इस प्रोसेस को अपनाया नहीं जाता.

मजबूती हो सकता है कारण

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डिलीवरी बॉक्स को सिर्फ देखने में अच्छा नहीं, बल्कि कोई भी सामान के लिए लिए अच्छे माने जाते हैं. रासायनिक ब्लीचिंग के प्रोसेस से कागज के रेशे कमजोर हो जाते हैं, लेकिन अनब्लिच्ड क्राफ्ट पेपर के रेशे बहुत और मोटे रहते हैं. इसलिए शिपिंग और डिलीवरी के लिए ऐसे बॉक्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं.

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रिसाइक्लिंग से भी है कनेक्शन

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ब्राउन कार्डबोर्ड का एक फायदा यह भी है कि इस्तेमाल के बाद इसे पेपर और कार्डबोर्ड की रीसाइक्लिंग के लिए भेज दिया जाता है. हालांकि, सिर्फ बॉक्स का भूरा रंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह 100% रिसाइकिल के लिए है या नहीं. उस पर लगी टेप, कोटिंग, प्लास्टिक लेमिनेशन और दूसरी सामग्री भी मायने रखती है.

पर्यावरण के लिए भी हैं सही

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ये बॉक्स पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल और रीसाइक्लिंग प्रोसेस को ध्यान में रखते हुए बनाए जाते हैं. इनमें कम से कम केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, इसलिए ये नेचुरल को नुकसान नहीं पहुंचाते और बॉक्स को आसानी से दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे भी पढ़ें- 9 से 5 जॉब से लेकर स्कूल की घंटी तक, किसने बनाया ये पूरा सिस्टम? जानिए पूरा इतिहास

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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