UP में कांग्रेस ने क्यों खेला 40 साल पुराना 'ट्रिपल कार्ड', जानिए- क्या है सोशल इंजीनियरिंग स्ट्रेटेजी?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ लगातार तीन बार से रामपुर खास सीट से विधानसभा चुनाव जीतती आ रही हैं. अब कांग्रेस ने उन्हें यूपी अध्यक्ष की कमान सौंपकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं.

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कांग्रेस ने चुनाव से पहले ब्राह्मण, दलित और मुसलमान को एक साथ साधने का दांव चला है. (Image - ANI)

उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा फेरबदल करते हुए अपने चार दशक पुराने सोशल इंजीनियरिंग वाले फॉर्मूले ब्राह्मण, दलित और मुसलमान को एक साथ साधने का दांव चला है. कांग्रेस ने रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है. वहीं, अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को राज्य का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है. इनके अलावा चौधरी वीरेंद्र सिंह को विधानमंडल दल का नया नेता चुना गया है. देविंदर निषाद और आलोक प्रसाद को प्रदेश कांग्रेस का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.

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‘मोना’ के जरिए कांग्रेस का ‘डबल दांव’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ लगातार तीन बार से रामपुर खास सीट से विधानसभा चुनाव जीतती आ रही हैं. अब कांग्रेस ने उन्हें यूपी अध्यक्ष की कमान सौंपकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं. एक वक्त वो था, जब ब्राह्मण समाज कांग्रेस पार्टी का कोर वोटर हुआ करता था. 90 के दशक के बाद यह वोट बैंक भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया. आराधना को आगे कर कांग्रेस सवर्ण वोट बैंक में अपनी खोई जमीन तलाश रही है.

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वहीं, दूसरा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के बाद से पार्टी महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर देती रही है. आराधना मिश्रा के रूप में पार्टी ने एक सशक्त महिला चेहरे को संगठन की कमान दी है. इसके जरिए पार्टी के निशाने पर महिला वोटर्स हैं. आज के वक्त महिलाओं के वोट कई चुनाव में जीत-हार तय करते दिखते हैं.

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ब्राह्मण वोटों पर इतना जोर क्यों?

यूपी में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10 से 12 फीसदी है. ब्राह्मण आबादी का करीब 110 से 115 विधानसभा सीटों पर दबदबा है, जहां ये नतीजे प्रभावित कर सकते हैं. बलरामपुर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज जैसे जिलों में यह समुदाय चुनावी दिशा तय करता है. रिपोर्ट्स के मुताबाकि, ब्राह्मणों के कुछ तबके योगी सरकार से नाराज हैं, जिनके चलते कांग्रेस इस मौके को भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

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मुस्लिम वोट बैंक पर निशाना

यूपी में मुस्लिम आबादी करीब 20 फीसदी है. भाजपा के खिलाफ लामबंद होने वाला यह वर्ग लंबे समय से समाजवादी पार्टी को पहली पसंद मानता रहा है. लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रति भी इस वोट बैंक का मजबूत रुझान दिखा था. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार रखने वाले इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है. इस कदम के जरिए कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक पर निशाना साधा है.

दलित-OBC समीकरण

यूपी में दलित आबादी करीब 20 फीसदी है. पहले यह समुदाय बहुजन समाज पार्टी का कोर वोट था, लेकिन मायावती पार्टी धीरे-धीरे कमजोर हो गई और उससे यह वोट बैंक छिटक गया. कांग्रेस ने आलोक प्रसाद को यूपी में पार्टी वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया है. इस नियुक्ति के जरिए कांग्रेस ने दलित वोटर्स को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश की है. इससे पहले दलित वोटर्स को खींचने के लिए जून महीने में राजेंद्र पाल गौतम को राज्य का प्रभारी बनाया था. वहीं, गैर-यादव पिछड़ी जातियों को साधने के लिए देविंदर निषाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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