ट्रक के पीछे 'Horn OK Please' लिखने की क्या है वजह? जानिए इसके पीछे की कहानी 

Horn Ok Please Logic: रास्ते में चलते या सफर करते वक्त आपने ट्रक पर हॉर्न ओके प्लीज लिखा जरूर देखा होगा. अगर नहीं देखा तो इस बार गौर कीजिएगा, क्योंकि हम आपको इसका मतलब बता रहे हैं जो इस हिस्से को और मजेदार बना सकता है. 

meaning of horn ok please on trucks
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हॉर्न प्लीज क्यों लिखा होता है? Image Credit- Freepik

भारत की सड़कों पर सफर करते वक्त आपने ट्रकों के पीछे रंग-बिरंगे शब्दों में लिखा हॉर्न ओके प्लीज जरूर देखा होगा. यह लाइन किसी एक ट्रक पर नहीं, बल्कि हर ट्रक पर देखी जा सकती है. ऐसे में कई बार मन में सवाल आता है कि आखिर ट्रक के पीछे यह लाइन क्यों लिखी जाती है? क्या यह कोई सरकारी नियम है या इसके पीछे कोई खास वजह है? अगर आपको इसका मतलब नहीं पता है तो आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.  

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हॉर्न प्लीज क्यों लिखा होता है? 

हॉर्न प्लीज क्यों लिखा होता है? 2 / 6

इस शब्द का इस्तेमाल पीछे से आने वाली गाड़ियों को ओवरटेक करने से पहले हॉर्न देने का संकेत है. पहले ट्रक में पीछे की ओर आसानी से नहीं देखा जा सकता था. ऐसे में पीछे चल रही गाड़ी का हॉर्न सुनकर ट्रक चालक को उसके ओवरटेक करने का अंदाजा हो जाता था. इसे भी पढ़ें- नीला या हरा… किस डस्टबिन में डालना है कूड़ा? ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे सही जवाब

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फिर ओके बीच में क्यों लिखा जाता है? 

फिर ओके बीच में क्यों लिखा जाता है? 3 / 6

यही इस पूरे वाक्य का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. ओके के पीछे कोई एक ऐतिहासिक कहानी नहीं है, बल्कि इसके कई फेमस होने के कई हिस्से मशहूर हैं. एक लोकप्रिय थ्योरी में Tata Oil Mills Company ने ओके नाम का डिटर्जेंट ब्रांड बाजार में उतारा था. माना जाता है कि इसे फेमस करने के लिए ट्रक पर ओके लिखा गया था.

नहीं है इसका कोई नियम और कानून

नहीं है इसका कोई नियम और कानून 4 / 6

दिलचस्प बात यह है कि इसको लेकर कोई नियम नहीं है. सरकारी नियम में ऐसा कुछ नहीं लिखा है कि ट्रक के पीछे यह लिखना जरूरी है. इसके बाद भी लोग ट्रक के पीछे यह लाइन लिखना पसंद करते हैं. साथ ही, कुछ शायरी या कोट्स भी लिखते हैं, ताकि ट्रक को और खूबसूरत बनाया जा सके.

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महाराष्ट्र सरकार ने लगा दी थी रोक

महाराष्ट्र सरकार ने लगा दी थी रोक5 / 6

इससे हॉर्न का शोर बढ़ने लगा था, जिससे परेशानी हो रही थी. लोग जरूरत से ज्यादा हॉर्न बजा रहे थे. इसलिए 2015 में महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने इस स्लोगन पर बैन लगाने की भी कोशिश की थी.

आज भी बरकरार है यह नियम

आज भी बरकरार है यह नियम 6 / 6

पहले यह एक तरह से सेफ्टी फीचर का काम करता था, लेकिन अब यह एक क्रेज बन गया है. भारतीय ट्रक आज भी किसी चलते-फिरते कैनवास की तरह लगते हैं, जो रंग-बिरंगी चीजें दिखाई देती हैं. इसे भी पढ़ें- होटल रूम में रखी स्लीपर्स का क्या होता है काम? जानिए क्यों दी जाती हैं यूज एंड थ्रो चप्पल

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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