Jantar Mantar Protest: दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को राजधानी में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर 3 एफआईआर दर्ज की हैं. राजनीतिक दलों, स्टूडेंट ग्रुप्स और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं के इन प्रदर्शनों का मकसद वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करना था.
BNS की इन धाराओं के तहत FIR दर्ज
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ये मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशनों में डेली डायरी एंट्री के आधार पर दर्ज किए गए. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी सरकारी अधिकारी के आदेश का पालन न करने से जुड़ा है. अधिकारियों ने बताया कि FIR में आरोपी के तौर पर किसी शख्स या संगठन का नाम नहीं है. हालांकि मामलों की डिटेल में प्रदर्शनों में शामिल ग्रुप्स और आयोजकों का जिक्र किया गया है.
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा के बाद हुई. इस आदेश के तहत बिना इजाजत लिए अनऑथराइज्ड गैदरिंग, प्रोटेस्ट, जुलूसों, भाषणों और दूसरी एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई थी.
कितने प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए?
ये प्रतिबंध जंतर-मंतर पर सुबह 11 बजे होने वाले प्रदर्शन से पहले लगाए गए थे. पुलिस ने प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं दी थी और सेंट्रल दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात किया था. प्रोटेस्ट साइट तक पहुंचने की कोशिश कर रहे तकरीबन 1000 लोगों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया गया. डिटेन किए गए लोगों में दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी सिंह, AAP नेता सौरभ भारद्वाज, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव शामिल थे.
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में 5000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे ताकि आंदोलन को रोका जा सके. ये प्रदर्शन AAP, AISA, SFI, NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस जैसे ग्रुप्स की तरफ से किए गए थे. इस प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली पुलिस की सख्ती देखने को मिली थी, जिसकी जद में कई पत्रकार भी आ गए थे.