पहले सफेद होते थे गाड़ियों के टायर! फिर क्यों हमेशा के लिए हो गए काले? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की हर कार और बाइक के टायर काले ही क्यों होते हैं दिलस्प बात ये है कि पहले टायर सफेद रंग के बनाए जाते थे. आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूरी दुनिया ने काले टायर अपनाए.

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आज सड़क पर चलने वाली वाले सभी वाहनों के टायर काले रंग के होते हैं, लेकिन शुरूआत में ऐसा नहीं था. पहले टायर सफेद या हल्के क्रीम रंग के बनाए जाते थे. बाद में एक साख तकनीक के कार उनका रंग हमेशा के लिए बदल गया.

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शुरुआती टायर सफेद क्यों थे?

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करीब 100 साल पहले टायर प्राकृतिक रबर से बनाए जाते थे. इस रबर का रंग दूध जैसा सफेद या हल्का क्रीम होता है. यही वजह थी कि उस समय बनने वाले ज्यादातर टायर इसी रंग के दिखाई देते थे.

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सफेद टायर की सबसे बड़ी कमजोरी

सफेद टायर की सबसे बड़ी कमजोरी3 / 7

पहले के टायर आज के मुकाबले ज्यादा मजबूत नही होते थे. ज्यादा वजन और लगातार सड़क पर चलने से वे जल्दी घिस जाते थे. इसके कारण वाहन मालिकों को बार-बार नए टायर लगवाने पड़ते थे.

कार्बन ब्लैक ने बदल दी टायरों की दुनिया

कार्बन ब्लैक ने बदल दी टायरों की दुनिया4 / 7

टायर को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञनिकों ने रबर में कार्बन ब्लैक मिलाना शुरू किया. इसके बाद टायर पहले से ज्यादा मजबूत टिकाऊ और खराब सड़कों पर भी बेहतर प्रदर्शन करने लगे. साथ ही उनकी घिसने की रफ्तार भी कम हो गई. ये भी पढ़ें- लॉन्च से पहले लीक हुई नई Maruti Brezza! मिलेगा टर्बो इंजन, फीचर्स देख Tata Nexon की बढ़ सकती है टेंशन

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गर्मी से भी बचाता है कार्बन ब्लैक

गर्मी से भी बचाता है कार्बन ब्लैक5 / 7

तेज रफ्तार में चलते समय टायर और सड़क के बीच घर्षण से काफी ज्यादा गर्मी पैदा होती है. कार्बन ब्लैक टायर को ज्यादा तापमान सहने की क्षमता देता है. साथ ही यह सूरज की तेज किरणों और मौसम के असर से भी रबर की सुरक्षा करता है.

आज भी दिख जाते हैं सफेद किनारे वाले टायर

आज भी दिख जाते हैं सफेद किनारे वाले टायर6 / 7

आज भले ही ज्यादातर टायर पूरी तरह कालो होते हैं, लेकिन कुछ क्लासि और विंटेज कारों में व्हाइटवॉल टायर देखने को मिलते हैं. इनमें टायर का बाहरी किनारा सफेद होता है, जबकि सड़क से संपर्क में रहने वाला हिस्सा काला ही रहता है. ये भी पढ़ें- नई बाइक की वारंटी पर आंख बंद करके न करें भरोसा! ये जरूरी पार्ट्स फ्री में नहीं बदलती कंपनी

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सिर्फ रंग नहीं, इसके पीछे है विज्ञान

सिर्फ रंग नहीं, इसके पीछे है विज्ञान7 / 7

टायर का काला रंग केवल दिखावे के लिए नहीं होता. कार्बन ब्लैक की वजह से टायर ज्यादा मजबूत बनेत हैं, लंबे समय तक चल पाते हैं

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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