नई बाइक खरीदने के बाद ज्यादातर लोगों को लगता है कि वारंटी रहने तक अगर बाइक में कोई भी पार्ट खराब हो जाए तो कंपनी उसे बिना पैसे लिए बदल देगी. लेकिन ऐसा नहीं है. बाइक की वारंटी सिर्फ कुछ खास तरह की तकनीकी या मैन्यूफैक्चरिंग खामियों पर लागू होती है. कई पार्ट्स ऐसे भी होते हैं, जो रोजाना इस्तेमाल के कारण धीर-धीर घिसते है और उन्हें बदलने का खर्च ग्राहक को खुद उठाना पड़ता है. ऐसे में वारंटी से जुड़ी ये जानकारी हर बाइक मालिक को जानना जरूरी है.
क्या होती है बाइक की वारंटी?
बाइक वारंटी का मकसद ग्राहकों को मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट और फैक्ट्री से जुड़ी तकनीकी खराबियों से सुरक्षा देना होता है. अगर इंजन गियरबॉक्स या किसी दूसरे मैकेनिकल पार्ट में निर्माण से जुड़ी कोई समस्या आती है तो कंपनी अपनी वारंटी की शर्तों के मुताबिक उसे ठीक करती है या जरूरत पड़ने पर बदल भी देती है. हालांकि सामान्य इस्तेमाल से होने वाली घिसावट, एक्सीडेंट, गलत तरीक से बाइक चलाने या समय पर सर्विस न कराने से हुई खराबी वार्टी में शामिल नहीं होती.
क्लच प्लेट वारंटी में नहीं आती
क्लच प्लेट बाइक का ऐसा पार्ट है जिसका इस्तेमाल हर बार गियर बदलते समय होता है. लगातार उपयोग की वजह से ये धीरे-धीरे घिसती रहती है. इसे कन्जूमेबल पार्ट माना जाता है, इसलिए सामान्य स्थिति में इसके खराब होने या घिसने पर कंपनी वारंटी के तहत इसे फ्री में नहीं बदलती.
ब्रेक पैड और ब्रेक शू भी नहीं होते कवर
बाइक की सेफ्टी में ब्रेक पैड और ब्रेक शू की अहम भूमिका होती है, लेकिन ये ऐसे पार्ट्स हैं, जो लगातार इस्तेमाल के कारण समय के साथ घिस जाते हैं. चूंकि इसका घिसना सामान्य प्रक्रिया माना जाता है, इसलिए इन्हें वारंटी के दायरे में शामिल नहीं किया जाता.
ये भी पढ़ें- Driving License Mobile Number Update: घर बैठे ऐसे बदलें DL से लिंक मोबाइल नंबर, नहीं लगाने पड़ेंगे RTO के चक्कर
चेन और स्प्रोकेट की देखभाल जरूरी
चेन और स्प्रोकेट को सही हालत में रखने के लिए नियमित सफाई और लुब्रिकेशन जरूरी होता है. अगर रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता या सामान्य इस्तेमाल से ये घिस जाते हैं, तो कंपनी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती. ऐसी स्थिति में इनकी मरम्मत या बदलाव का खर्च ग्राहक को ही उठान पड़ता है.
बैटरी पर अलग होती है वारंटी
ज्यादातर बाइक कंपनियां बैटरी पर अगल से सीमित अवधि की वारंटी देती हैं. अगर बैटरी सामान्य इस्तेमाल, खराब रखरखाव या समय के साथ कमजोर होती है, तो उसे बाइक की मुख्य वारंटी के तहत फ्री में नहीं बदला जाता है. इसलिए बैटरी की वांरटी की शर्तों को अलग से समझना जरूरी है.
इन वजहों से खत्म हो सकती है बाइक की वारंटी
अगर बाइक में कंपनी मंजरी के बिना बड़ा मॉडिफिकेशन कराया जाता है या किसी लोकर गैराज में गलत तरीके से रिपेयरिंग कराई जाती है, तो वारंटी प्रभावित हो सकती है. इसे अलावा तय समय पर सर्विस नहीं कराना, नकली-लोकल स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल करना, बाइक से रेसिंग या स्टंट करना या जरूरत से ज्यादा वजन लेकर चलाना भी वारंटी क्लेम खरीज होने की वजह बन सकते हैं.
ये भी पढ़ें- दोस्त चला रहा था आपकी कार, चालान आ गया आपके नाम? ऐसे में क्या कर सकते हैं आप, जानें नियम
नई बाइक खरीदने के बाद ज्यादातर लोगों को लगता है कि वारंटी रहने तक अगर बाइक में कोई भी पार्ट खराब हो जाए तो कंपनी उसे बिना पैसे लिए बदल देगी. लेकिन ऐसा नहीं है. बाइक की वारंटी सिर्फ कुछ खास तरह की तकनीकी या मैन्यूफैक्चरिंग खामियों पर लागू होती है. कई पार्ट्स ऐसे भी होते हैं, जो रोजाना इस्तेमाल के कारण धीर-धीर घिसते है और उन्हें बदलने का खर्च ग्राहक को खुद उठाना पड़ता है. ऐसे में वारंटी से जुड़ी ये जानकारी हर बाइक मालिक को जानना जरूरी है.
क्या होती है बाइक की वारंटी?
बाइक वारंटी का मकसद ग्राहकों को मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट और फैक्ट्री से जुड़ी तकनीकी खराबियों से सुरक्षा देना होता है. अगर इंजन गियरबॉक्स या किसी दूसरे मैकेनिकल पार्ट में निर्माण से जुड़ी कोई समस्या आती है तो कंपनी अपनी वारंटी की शर्तों के मुताबिक उसे ठीक करती है या जरूरत पड़ने पर बदल भी देती है. हालांकि सामान्य इस्तेमाल से होने वाली घिसावट, एक्सीडेंट, गलत तरीक से बाइक चलाने या समय पर सर्विस न कराने से हुई खराबी वार्टी में शामिल नहीं होती.
क्लच प्लेट वारंटी में नहीं आती
क्लच प्लेट बाइक का ऐसा पार्ट है जिसका इस्तेमाल हर बार गियर बदलते समय होता है. लगातार उपयोग की वजह से ये धीरे-धीरे घिसती रहती है. इसे कन्जूमेबल पार्ट माना जाता है, इसलिए सामान्य स्थिति में इसके खराब होने या घिसने पर कंपनी वारंटी के तहत इसे फ्री में नहीं बदलती.
ब्रेक पैड और ब्रेक शू भी नहीं होते कवर
बाइक की सेफ्टी में ब्रेक पैड और ब्रेक शू की अहम भूमिका होती है, लेकिन ये ऐसे पार्ट्स हैं, जो लगातार इस्तेमाल के कारण समय के साथ घिस जाते हैं. चूंकि इसका घिसना सामान्य प्रक्रिया माना जाता है, इसलिए इन्हें वारंटी के दायरे में शामिल नहीं किया जाता.
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चेन और स्प्रोकेट की देखभाल जरूरी
चेन और स्प्रोकेट को सही हालत में रखने के लिए नियमित सफाई और लुब्रिकेशन जरूरी होता है. अगर रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता या सामान्य इस्तेमाल से ये घिस जाते हैं, तो कंपनी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती. ऐसी स्थिति में इनकी मरम्मत या बदलाव का खर्च ग्राहक को ही उठान पड़ता है.
बैटरी पर अलग होती है वारंटी
ज्यादातर बाइक कंपनियां बैटरी पर अगल से सीमित अवधि की वारंटी देती हैं. अगर बैटरी सामान्य इस्तेमाल, खराब रखरखाव या समय के साथ कमजोर होती है, तो उसे बाइक की मुख्य वारंटी के तहत फ्री में नहीं बदला जाता है. इसलिए बैटरी की वांरटी की शर्तों को अलग से समझना जरूरी है.
इन वजहों से खत्म हो सकती है बाइक की वारंटी
अगर बाइक में कंपनी मंजरी के बिना बड़ा मॉडिफिकेशन कराया जाता है या किसी लोकर गैराज में गलत तरीके से रिपेयरिंग कराई जाती है, तो वारंटी प्रभावित हो सकती है. इसे अलावा तय समय पर सर्विस नहीं कराना, नकली-लोकल स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल करना, बाइक से रेसिंग या स्टंट करना या जरूरत से ज्यादा वजन लेकर चलाना भी वारंटी क्लेम खरीज होने की वजह बन सकते हैं.
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