फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार घायल होने के बावजूद 180 लोगों की जान बचाकर दुनियाभर में मशहूर हो गए हैं. उड़ती फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर को-पायलट के हमले में घायल होने बाद भी उन्होंने यात्रियों की मदद से फ्लाइट की इमरजेसी लैंडिंग कराई. इसके लिए पूरे भारत और पूरी दुनिया में उनकी सराहना हो रही है, लेकिन लोगों में उनके सरनेम ‘मच्छार’ को लेकर भी जिज्ञासा है और लोग इस सरनेम के बारे में जानना चाहते हैं. बता दें कि गुजरात से ताल्लुक रखने वाले इस सरनेम का इतिहास बेहद दिलचस्प है. गुजरात के लोहाना और नागर ब्राह्मण समाज से ऐतिहासिक जुड़ाव है.
क्या है मच्छार का अर्थ और कैसे बना सरनेम?
कैप्टन स्मित मच्छार के सरनेम का हिंदी और गुजराती में शाब्दिक अर्थ मच्छर होता है. इतिहासकार और भाषाई विशेषज्ञ कहते हैं कि ‘मच्छार’ के सरनेम बनने के 3 कारण हो सकते हैं. पहली वजह प्राचीन गुजराती शब्द ‘मत्सर’ है, जिसका मतलब ‘ईर्ष्या’ होता है, जो समय के साथ-साथ बोलने में मच्छर से मच्छार बन गया. दूसरी वजह भौगोलिक स्थिति है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ज्यादा मच्छरों वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को मच्छार कहा जाने लगा था. तीसरी वजह मजाक उड़ाना है, जो पीढ़ियों के साथ-साथ फैमिली सरनेम बन गया. आमतौर पर दोस्तों के ग्रुप में दुबले-पतले शरीर वाले व्यक्ति को मजाकिया लहजे में मच्छर कहा जाता है.
कहां से आए मच्छार और किससे है कनेक्शन?
मच्छर सरनेम पाकिस्तान में भी प्रचलित है. कराची शहर में एक बहुत बड़े रिहायशी इलाके को मच्छर कॉलोनी कहते है. लेकिन इस कॉलोनी का नाम मच्छरों से नहीं, बल्कि मछुआरों से जुड़े सिंधी शब्द से बना, जहां बड़ी संख्या में लोहाना समुदाय के मछुआरे रहते थे, जो पेशे से बड़े व्यापारी थे.जब वे सिंधी व्यापार करने के लिए भारत आए तो मुंबई में बसे और वहां से होते हुए गुजरात पहुंचे.
हाथी-मच्छर का चर्चित और ऐतिहासिक किस्सा
बता दें कि गुजरात में मच्छार सरनेम को लेकर 1960 का एक किस्सा काफी प्रचलित है. देश के पूर्व सांसद जयसुखलाल हाथी का स्वागत समारोह हुआ तो ‘मच्छार’ सरनेम वाले नामी गिरामी शख्सियत ने उनका अभिनंदन किया था. इस मौके पर उस समय के मीडिया ने चुटकी ली. जिसे देखकर लोगों ने मजाक में कहना शुरू कर दिया था कि अब हाथी का सम्मान मच्छर के हाथों हो रहा है.
मुंबई नगर निगम के पूर्व पार्षद और भाजपा की गुजराती प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख मंगल भानुशाली कहते हैं कि कैप्टन स्मित मच्छार गुजराती ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय से हैं. पौराणिक मान्यता है कि यह समुदाय नागर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का मिश्रण है, जो गुजरात में सरनेम की उस आकर्षक दुनिया की याद दिलाता है, जहां परिवारों के नाम हाथी, घोड़ा, मनकड़ (कीड़े से जुड़ा है) और पोपट (जिसका अर्थ तोता होता है) जैसे होते हैं.