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रूट कैनाल करवाना चाहिए या नहीं? डेंटिस्ट ने बताया किन लोगों के लिए सही नहीं है यह ट्रीटमेंट

Root Canal Treatment: दांत सड़ जाने पर या इंफेक्शन होने पर लोग रूट कैनाल ट्रीटमेंट करवाते हैं. लेकिन, डेंटिस्ट बता रहे हैं कि हर स्थिति में रूट कैनाल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है. ऐसे में यहां जानिए किन लोगों को नहीं करवाना चाहिए यह ट्रीटमेंट.

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Root Canal: रूट कैनाल ट्रीटमेंट एक डेंटल प्रोसीजर है जिसे सड़न वाले खराब, क्रैक्ड या इंफेक्टेड दांत को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. रूट कैनाल में खराब हुए दांत पर जमे बैक्टीरिया को हटाया जाता है और दांत दोबारा इंफेक्टेड ना हो यह देखा जाता है. दांतों की बाहरी परत के अंदर सॉफ्ट टिशू होता है जिसे पल्प कहते हैं. इस टिशू में ब्लड वेसल्स, नर्व्स और कनेक्टिव टिशूज होते हैं जो दांतों को ग्रोथ के समय बढ़ने में मदद करते हैं. ऐसे में इस पल्प को हटाने के बाद भी पूरी तरह से परिपक्व दांत ठीक रह सकता है. लेकिन, रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद मुंह कई दिनों तक सुन्न रह सकता है और असहजता महसूस होती है सो अलग. ऐसे में डेंटिस्ट डॉ. राहुल भाड़गे ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि किन लोगों को रूट कैनाल ट्रीटमेंट करवाए बिना भी आराम मिल सकता है और किस स्थिति में रूट कैनाल करवाने की जरूरत नहीं पड़ती है.

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रूट कैनाल करवाना चाहिए या नहीं

डेंटिस्ट ने बताया कि रूट कैनाल ट्रीटमेंट की जरूरत तब पड़ती है जब आपके दांत में जो कीड़ा होता है या कहें जो सड़न है वो नसों तक पहुंच जाती है जिससे आपको बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है. ऐसे में रूट कैनाल ट्रीटमेंट करना जरूरी है. लेकिन, कई बार यह देखा गया है कि दांतों में गड्ढा होने के बावजूद लोग डेंटिस्ट के पास ट्रीटमेंट के लिए नहीं आते. इससे होता यह है कि जब दांतों में दर्द शुरू होता है और तब ही वे डेंटिस्ट से दांत चेक करवाते हैं.

इस स्थिति में डेंटिस्ट उन्हें रूट कैनाल ट्रीटमेंट की या फिर दांत निकालने की सलाह देते हैं. लेकिन, डॉ. राहुल का कहना है कि उनकी मानिए तो टाइम, पैसा और एनर्जी बचाने के लिए रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बजाय फिलिंग करवाना चुनें. अगर आपके दांतों में सड़न से छोटा सा ही छेद है और उस छेद में खाना फंस रहा है या अगर काला डॉट ही बन रहा है तो अपने डेंटिस्ट को दिखाइए. डेंटिस्ट उसी समय अच्छे से कंसल्ट करके बताएंगे कि आपको फिलिंग करवाने की जरूरत है या नहीं है. अगर दांतों को सीमेंट भरकर ही रिपेयर किया जा सकता है तो रूट कैनाल करवाने की जरूरत नहीं पड़ती है.

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रूट कैनाल ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट्स

  • रूट कैनाल ट्रीटमेंट से मसूड़ों में सूजन आ सकती है
  • दर्द और असहजता महसूस होती है
  • थोड़ी बहुत ब्लीडिंग हो सकती है
  • जबड़ों में सूजन महसूस हो सकती है
  • जिस दांत का रूट कैनाल किया गया है उसका रंग बदल सकता है
  • मुंह में अजीब सा टेस्ट आने लगता है
  • चबाने या कुछ काटने में दिक्कत आ सकती है
  • मुंह से बदबू आ सकती है
  • डेंटल स्ट्रेस के कारण सिर में दर्द हो सकता है
  • डेंटल एंजाइटी या स्ट्रेस हो सकता है
  • गम इरिटेशन हो सकती है.

रूट कैनाल ट्रीटमेंट के कुछ ज्यादा हानिकारक इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे – सिस्टेमेटिक इंफेक्शंस, लगातार दर्द रहना, साथ वाले दांत का डैमेज होना, रिट्रीटमेंट की जरूरत पड़ना, साइकोलॉजिकल इफेक्ट्स या साथ के दांत का फ्रैक्चर होना.

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First published on: Jul 01, 2026 11:14 AM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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