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क्या रेड मीट खाने से कैंसर होता है? एक्सपर्ट ने बताया पकाने का तरीका आंतों को करता है प्रभावित

Meat Causes In Cancer: रेड मीट खुद में पूरी तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन इससे ज्यादा मात्रा में और गलत तरीके से पकाकर खाना जोखिम बढ़ा सकता है. खासकर आंतों की सेहत पर इसका असर पड़ता है. 

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क्या सच में रेड मीट से कैंसर होता है? Image Credit- anadolu medical center

Ghost Khane Se Cancer Hota Hai: आजकल लोग खानपान और अपनी हेल्थ को लेकर लोगों ज्यादा जागरूक हो गए हैं. डाइट में वेज और नॉन वेज चीजों भी शामिल होती हैं. फिट रहने के लिए लोग रेड मीट को भी अपनी डाइट में शामिल करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाना हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है. कुछ लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या रेड मीट का ज्यादा सेवन कैंसर का कारण बन सकता है. इस विषय पर डॉक्टर मनदीप सिंह (आर्ट ऑफ हेल्थ कैंसर सेंटर में कैंसर विशेषज्ञ) का कहना है कि कैंसर से इसका संबंध हो सकता है, लेकिन इसे संतुलित तरीके से समझना जरूरी है. रेड मीट जैसे मटन, बीफ और पोर्क का अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ प्रकार के कैंसर, खासकर आंतों से जुड़े कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति जो रेड मीट खाता है और उसे कैंसर हो ही जाए. किन शर्तों में कैंसर हो सकता है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.  

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क्या सच में रेड मीट से कैंसर होता है?

यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति जो रेड मीट खाता है, उसे कैंसर हो ही जाए. यह जोखिम व्यक्ति की खाने की आदतों, मात्रा और जीवन शैली पर निर्भर करता है. इस जोखिम के पीछे कुछ कारण भी माने जाते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रेड मीट पूरी तरह से छोड़ देना जरूरी है. समस्या तब होती है जब इसे ज्यादा मात्रा में और गलत तरीके से पकाकर खाया जाता है.

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पकाने का तरीका क्यों है खतरनाक?

जब रेड मीट को बहुत ज्यादा तापमान पर पकाया जाता है, जैसे ग्रिल करना या तलना, तो उसमें कुछ हानिकारक तत्व बन सकते हैं. ये तत्व शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लंबे समय में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, रेड मीट में मौजूद कुछ तत्व शरीर में ऐसे रासायनिक बदलाव ला सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होते हैं.  

शरीर पर नकारात्मक असर कब होता है?

प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज, बेकन और सलामी का प्रभाव और भी अधिक चिंता का विषय माना जाता है. इनमें प्रिजर्व करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रेड मीट को पूरी तरह से अपनी डाइट से हटा देना जरूरी है.

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कैसे खाएं?

मीट में प्रोटीन, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना ज्यादा बेहतर होता है. संतुलित आहार जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल हों, शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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