Pancreatic Cancer Treatment: पैंक्रियाटिक कैंसर या अग्नाश्य का कैंसर एक गंभीर कैंसर है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें पैंक्रियाज में हेल्दी सेल्स काम करना बंद कर देते हैं और कंट्रोल से बाहर बढ़ने लगते हैं. एब्नॉर्मल सेल्स के बढ़ने पर पैंक्रियाज में ट्यूमर पनपने लगता है. ऐसे में शरीर में एक नहीं बल्कि कई तरह के लक्षण नजर आने लगते हैं. इन लक्षणों (Pancreatic Cancer Symptoms) को समय रहते पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. ऐसे में नेशनल हेल्थ सर्विस, यूके के मुताबिक पैंक्रियाटिक कैंसर के क्या लक्षण होते हैं, जानिए यहां. साथ ही, जानिए पैंक्रियाज के कैंसर के क्या कारण हो सकते हैं और इलाज कैसे किया जाता है.
पैंक्रियाटिक कैंसर के क्या लक्षण हैं
पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षणों को शुरुआती स्टेज में पहचानना मुश्किल हो सकता है, लेकिन जब लक्षण नजर आते हैं तो वे कुछ ऐसे दिख सकते हैं –
- आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ सकता है
- त्वचा पर खुजली महसूस हो सकती है
- पेशाब का रंग गहरा हो सकता है
- मल का रंग फीका नजर आ सकता है
- भूख में कमी आ जाती है
- बिना कोशिश किए ही वजन कम हो सकता है
- हर समय थकान महसूस होती है और शरीर में एनर्जी की कमी रहती है
- शरीर का तापमान बढ़ सकता है, गर्मी लग सकती है, ठंड लग सकती है या कंपकंपाहट भी हो सकती है
- बीमार महसूस होता है
- दस्त या कब्ज की दिक्कत हो सकती है या मल से जुड़े कुछ और बदलाव हो सकते हैं
- पेट के ऊपरी हिस्से में या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है, खाते समय या लेटते समय तकलीफ बढ़ सकती है
- अक्सर अपच के लक्षण दिख सकते हैं, जैसे हर समय पेट फूला हुआ महसूस होना.
ये लक्षण पेट या आंतों से जुड़ी समस्याओं में भी दिख सकते हैं, इसीलिए जब दिक्कतें शुरू हों तो डॉक्टर से जांच करवाकर समस्या की जड़ तक जाना जरूरी होता है जिससे समय रहते सही इलाज मिल सके.
पैंक्रियाज का कैंसर किन कारणों से होता है
पैंक्रियाज कैंसर के होने का सटीक कारण (Pamncreatic Cancer Causes) हमेशा पता नहीं चलता है, लेकिन यह तब होता है जब पैंक्रियाटिक सेल्स में जेनेटिक बदलाव होने लगते हैं और सेल्स की ग्रोथ को प्रभावित करने वाले जीन्स प्रभावित होते हैं. इन बदलावों के कारण सेल्स तेजी से बढ़ती हैं और ट्यूमर बना सकती हैं. मोटेतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर के ये लक्षण हो सकते हैं –
जेनेटिक बदलाव – सेल्स की ग्रोथ को रेग्यूलेट करने वाले जीन्स में बदलाव होने लगता है, डिविजन और रिपेयर के कारण पैनक्रियाटिक सेल्स बिना कंट्रोल हुए बढ़ने लगती हैं.
आनुवांशिक जेनेटिक बदलाव – कुछ लोगों में पैनक्रियाटिक कैंसर उनके माता-पिता से जुड़ा हुआ हो सकता है. आनुवांशिक तौर पर होने वाला पैनक्रियाटिक कैंसर जीवन में कभी भी हो सकता है.
एक्वायर्ड DNA चेंजेस – समय के साछ जेनेटिक बदलाव होने पर पैंक्रियाटिक सेल्स बार-बार बढ़ती और बंटती हैं.
कैंसर का कारण बनने वाली चीजों के संपर्क में आना – तंबाकू, धुएं में मौजूद चीजें वगैरह सेलुलर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इनसे जेनेटिक बदलाव हो सकते हैं और व्यक्ति कैंसर का शिकार हो सकता है.
पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज कैसे होता है
कैंसर ट्रीटमेंट में कैंसर के टाइप और स्टेज के आधार पर इलाज किया जाता है. ट्यूमर को सर्जरी से हटाया जा सकता है या नहीं और मरीज को पूरी सेहत कैसी है इसपर भी कैंसर का इलाज निर्भर करता है. आमतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरैपी, रेडिएशन थेरैपी, टारगेटेड थेरैपी और इम्यूनोथेरैपी शामिल हो सकती है. इलाज में कोई एक तरीका या सभी तरीके भी आजमाए जा सकते हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.