खाने के साथ-साथ हमारे शरीर को मिनरल्स, विटामिन्स और कैल्शियम की जरूरत होती है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से हेल्दी रखने का काम करते हैं. हड्डियों से लेकर मांसपेशियों आदि को मजबूत बनाने के लिए विटामिन डी काफी अच्छा माना जाता है. इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द और ऐंठन की शिकायत हो सकती है. अगर आपके भी रात में अक्सर पैर की नसें चढ़ती हैं तो डॉक्टर विटामिन डी का टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं. हालांकि, कैंसर हीलर सेंटर के एक्सपर्ट डॉक्टर तरंग कृष्णा का कहना है कि आजकल विटामिन डी की कमी ज्यादातर लोगों में पाई जाती है, जिसे सिर्फ धूप से कम नहीं किया जा सकता. आप विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए गोली या कोई सप्प्लिमेंट्स ले सकते हैं, लेकिन इसे लेने का सही तरीका पता होना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि विटामिन डी की गोली सिर्फ पानी से खाना ठीक नहीं है. अगर आप सिर्फ पानी से बिना सोचे-समझे सप्प्लिमेंट्स लेते हैं तो शरीर को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.
विटामिन डी की कमी क्यों हो रही है?
डॉक्टर का कहना है कि आजकल विटामिन डी की कमी से हर कोई जूझ रहा है. इसकी वजह से लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं, मांसपेशियों में दर्द रहने लगा है और मूड भी ज्यादातर खराब ही रहता है. इसलिए कई लोग धूप में बैठकर इसकी कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. मगर फिर भी विटामिन डी की कमी को दूर नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें लगता है कि विटामिन डी की कमी होने की असल वजह धूप की कमी होना है. हालांकि, इसकी कमी को दूर करने के लिए आप विटामिन डी का कोई सप्प्लिमेंट ले सकते हैं.
विटामिन D की कमी के संकेत
- विटामिन D की कमी होने से शरीर में कुछ संकेत नजर आते हैं. इस दौरान, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न, हड्डियों में दर्द या कमजोरी आदि चीजें महसूस हो सकती हैं. इसलिए जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट करवाना जरूरी हो सकता है.
- बार-बार गिरना सिर्फ उम्र बढ़ने से नहीं होता, क्योंकि अगर कोई इंसान बार-बार गिर रहा है तो इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं.
- ऐसा आंखों की कमजोर रोशनी होने, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं या संतुलन संबंधी दिक्कतें होने की वजह से हो सकता है. इसलिए बार-बार गिरने की स्थिति में डॉक्टर से टेस्ट कराना जरूरी है.
विटामिन D की कमी से कैसे बचें?
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के मुताबिक, शरीर में विटामिन डी को बनाए रखने के लिए आपको नियमित रूप से सुबह की धूप लेनी होगी. फैटी फिश और अंडे की जर्दी खाना होगा. इसके अलावा, अपनी डाइट पर खूब ध्यान देना होगा.
ज्यादा सप्लीमेंट लेना सही नहीं
कई लोग बिना टेस्ट और डॉक्टर की सलाह के विटामिन D सप्लीमेंट लेने लगते हैं, जो नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए सप्लीमेंट हमेशा ब्लड टेस्ट रिपोर्ट की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए.
विटामिन D ओवरडोज क्या है?
विटामिन डी का ओवरडोज होने से खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है, जिसे हाइपरकैल्सीमिया कहा जाता है. इसकी वजह से भूख न लगना, उल्टी होना, बार-बार पेशाब होना या किडनी खराब होना आदि शामिल है. ध्यान न देने पर दिल की बीमारी भी हो सकती है.
विटामिन D ओवरडोज होने के लक्षण
- विटामिन डी खाने से शरीर में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा हो जाती है. इससे पेट खराब होने और उल्टा होने का खतरा बढ़ जाता है.
- बार-बार पेशाब आने लगता है, जिसकी वजह से प्यास भी लगती है. इसलिए आपको यह लक्षण नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
- विटामिन डी का ओवरडोज दिमाग पर भी असर डालता है. इसलिए बेहतर है कि आप डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें.
विटामिन D की गोली पानी के साथ लेनी चाहिए या नहीं?
कई बार विटामिन डी की गोली लेने के बाद भी इसकी कमी दूर नहीं होती है तो इसका मतलब है कि आप उन्हें सही तरीके से नहीं ले रहे हैं. पानी के साथ लेने से भी इफेक्ट हो सकता है, क्योंकि यह फैट्स में घुलने वाला सप्लीमेंट है. इसे फैट के साथ लेना बेहतर हो सकता है और अगर आप खाली पेट या पानी के साथ लेते हैं तो कुछ फायदा आपको देखने को नहीं मिलेगा. इसलिए भरे हुए पेट पर विटामिन डी की गली खाएं और इस दौरान आप पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं.
विटामिन डी के साथ हमेशा लें विटामिन के सप्लीमेंट्स
अगर आप विटामिन डी का सप्लीमेंट ले रहे हैं और शरीर में विटामिन के2 की कमी भी है तो शरीर को काफी नुकसान हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जब कोई विटामिन डी का कोई सप्लीमेंट लेता है तो इससे मिला पोषण हड्डियों में जाकर जमा हो जाता है. हड्डियों को मजबूत करने या सप्लीमेंट्स को सही तरह से शरीर में पहुंचाने का काम विटामिन के2 करता है. अगर इसकी कमी होती है तो सारा कैल्शियम किडनी में चला जाता है. इससे स्टोन की शिकायत ज्यादा बढ़ जाती है.
विटामिन डी कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर को उसकी कितनी जरूरत है. इसलिए डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी का सेवन करें. हालांकि, हर रोज एक इंसान को सिर्फ 600 IU विटामिन डी की मात्रा लेनी चाहिए. अगर इससे ज्यादा करेंगे तो पहले अपने डॉक्टर से बात करें. हार्वर्ड विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब किसी इंसान में विटामिन D का लेवल बहुत कम पाया जाता है तो अक्सर सलाह दी जाती है कि वे कुछ हफ्तों तक ज्यादा मात्रा में लेनी की सलाह दी जाती है. इसलिए कई डॉक्टर 6 से 8 हफ्तों तक, हफ्ते में एक बार 50000 IU विटामिन D सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं. हालांकि, 2 महीने तक हर 2 हफ्ते में एक बार इतनी ही खुराक लेना भी काफी है. इसके बाद, रोजाना 1000 इंटरनेशनल यूनिट की खुराक लेना शुरू कर देते हैं.