जोर-जोर से खर्राटे और रात में सांस रुकना मामूली बात नहीं, Sleep Apnea का हो सकता है संकेत
Raat Me Kharrate Aane Ka Karan: क्या आप भी नींद में जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं, जिस कारण आपके परिवार के लोग आपको आधी रात में नींद से उठाकर आपको टोकते हैं? खर्राटों की ये समस्या आम लग सकती है, लेकिन है नहीं; क्योंकि यह कई तरह के गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है.
नींद में जोर-जोर से खर्राटे लेना किन समस्याओं के खतरे को बढ़ाती है? (Image: AI)
खबर की मुख्य बातें:
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NIH के अनुसार, खर्राटे लेना स्लीप एप्निया का एक लक्षण हो सकता है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है.
स्लीप एप्निया के दो मुख्य प्रकार हैं: ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया और सेंट्रल स्लीप एप्निया.
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया सबसे आम प्रकार है, जो ऊपरी सांस की नली के रुकावट होने के कारण होता है.
अगर स्लीप एप्निया का इलाज न किया जाए, तो यह स्ट्रोक, हार्ट अटैक और टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है.
कई लोगों की शिकायत रहती है कि रात में जब वह सो रहे होते हैं और गहरी नींद में होते हैं, तब वह जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं, जिसकी खबर उनको नहीं रहती है, लेकिन साथ सोने वाला व्यक्ति को इन खर्राटों की आवाज से काफी परेशानी हो जाती है और रात भर नींद नहीं आती है. नींद में खर्राटे की समस्या को कई लोग मामूली या आम समस्या समझते हैं और थकान से जोड़ देते हैं. लेकिन स्टडी बताती है कि खर्राटों के पीछे थकान ही कारण हो, ऐसा जरूरी नहीं है. इस स्टोरी में हम खर्राटों की समस्या के पीछे क्या गंभीर कारण हो सकते हैं और आने वाले खतरों के बारे में कुछ अहम जानकारी बताएंगे, ताकि अगर आप या परिवार में कोई खर्राटों की समस्या से जूझ रहा है, तो वक्त रहते वह इस समस्या का सही इलाज करा लें. NIH (National Institute of Health) के अनुसार, रिसर्च बताती है कि अगर सही समय पर इस समस्या का इलाज नहीं कराया जाए, तो स्थिति गंभीर बीमारी की ओर मुड़ सकती है, जिससे भविष्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
NIH के अनुसार, स्लीप एप्निया (Sleep Apnea) एक आम स्थिति है, जिसमें सोते समय सांस कई बार रुकती है और फिर शुरू हो जाती है. इससे आपके शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है. अगर आपके साथ सोने वाला व्यक्ति आपको बताता है कि आप रात में जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं, तो इस समस्या को जरा भी नजरअंदाज न करें, बल्कि वक्त रहते डॉक्टर से इसकी जांच कराए. NIH के अनुसार, स्लीप एप्निया (Sleep Apnea) के दो प्रकार होते हैं, जो अक्सर लोगों को परेशान करते हैं.
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ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive sleep apnea) तब होता है जब सोते समय आपका ऊपरी सांस की नली (airway) कई बार ब्लॉक हो जाता है. इस रुकावट के कारण हवा का बहाव कम हो सकता है या पूरी तरह से रुक सकता है. यह स्लीप एप्निया का सबसे आम प्रकार है. मोटापा, बड़े टॉन्सिल, या हार्मोन के स्तर में बदलाव जैसे कारक आपके सांस की नली को पहले से छोटा (संकरा) कर सकते हैं. इनमें से कोई भी कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के खतरे को बढ़ा सकता है. सेंट्रल स्लीप एप्निया (Central sleep apnea) तब होता है जब आपका दिमाग सांस लेने के लिए जरूरी संकेत नहीं भेज पाता है. ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां, जो इस बात को प्रभावित करती हैं कि आपका दिमाग आपके सांस की नली और छाती की मांसपेशियों को कैसे कंट्रोल करता है, सेंट्रल स्लीप एप्निया का कारण बन सकती हैं.
सिर्फ खर्राटे ही नहीं, ये भी है स्लीप एप्निया के लक्षण
NIH के अनुसार, जरूरी नहीं कि सिर्फ खर्राटे ही स्लीप एप्निया के लक्षण हो, बल्कि ये भी हो सकता है कि आपको पता ही न चले कि आपको स्लीप एप्निया है, जब तक कि कोई और आपको आपके लक्षणों के बारे में न बताएं. सोते समय, आपको ये अनुभव हो सकते हैं:
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सांस का बार-बार रुकना और फिर शुरू होना
तेज आवाज में खर्राटे लेना (पुरुषों में ज्यादा आम)
सांस लेने के लिए हांफना या छटपटाना
आप खुद भी इन लक्षणों को महसूस कर सकते हैं:
दिन में नींद आना और थकान महसूस होना, जिससे सीखने, ध्यान लगाने और प्रतिक्रिया देने में दिक्कत आ सकती है
मुंह सूखना
थकान (महिलाओं में ज्यादा आम)
सिरदर्द (महिलाओं में ज्यादा आम)
नींद न आना (महिलाओं में ज्यादा आम)
यौन समस्याएं या यौन इच्छा में कमी
रात में बार-बार पेशाब करने के लिए जागना
डिप्रेशन या एंग्जायटी
महिलाओं में स्लीप एप्निया के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं. चूंकि महिलाओं में खर्राटे लेने जैसे आम लक्षण नहीं दिखते, इसलिए उन्हें शायद पता ही न चले कि उन्हें स्लीप एप्निया है. अगर आपमें इनमें से कोई भी लक्षण हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करना जरूरी है.
क्या होगा अगर खर्राटों की समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाए?
अब सवाल उठता है कि क्या हो अगर आप खर्राटों की समस्या को नजरअंदाज कर दें या फिर जरूरत से ज्यादा देर में इलाज के कराएं? NIH के अनुसार, अगर स्लीप एप्निया का पता न चले या इसका इलाज न हो, तो आपको अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं मिल लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इससे ध्यान लगाने, फैसले लेने, चीजें याद रखने या अपने व्यवहार को कंट्रोल करने में दिक्कत आ सकती हैं. स्लीप एप्निया का इलाज न कराने से स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है, इसलिए इस समस्या को जरा भी नजरअंदाज न करें और वक्त रहते इलाज करा लें.
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इसके अलावा, सोते समय बार-बार सांस फिर से शुरू करने के लिए शरीर को बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जिससे आपके अंगों और खून वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंच सकता है. स्लीप एप्निया का इलाज न कराने से नीचे दी गई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
दिल और खून वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां, जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन, एथेरोस्क्लेरोसिस, हाई ब्लड प्रेशर (जिसे कंट्रोल करना मुश्किल हो), हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक
टाइप 2 डायबिटीज
क्रोनिक किडनी डिजीज (गुर्दे की पुरानी बीमारी)
बुजुर्गों में डिमेंशिया
आंखों की समस्याएं, जैसे ग्लूकोमा, ड्राई आई या केराटोकोनस
मेटाबोलिक सिंड्रोम
प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) से जुड़ी दिक्कातें
कैंसर, जैसे पैंक्रियाटिक, रीनल (गुर्दे) और स्किन कैंसर
अस्थमा के दौरों का और गंभीर हो जाना
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रिफ्लक्स डिजीज: इसमें भोजन नली (esophagus) के निचले हिस्से की मांसपेशी ठीक से बंद नहीं हो पाती, जिससे पेट में मौजूद खाना वापस ऊपर आ जाती है और जलन पैदा करता है. इससे नींद में और भी खलल पड़ सकता है.
किन लोगों को रहता है स्लीप एप्निया का खतरा?
NIH के अनुसार, स्लीप एप्निया कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जो हवा से फैल जाए, बल्कि कोई भी व्यक्ति इस समस्या का शिकार बन सकता है. लेकिन कुछ कारण जरूर हैं, जो इस समस्या की वजह बनते हैं. इसमें;
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आपकी उम्र
परिवार का इतिहास
लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें जैसे शराब पीना या स्मोकिंग करना
हेल्थ से जुड़ी कुछ समस्याएं
बड़े टॉन्सिल, गर्दन या जीभ: इनके कारण आपकी ऊपरी सांस की नली संकरी हो सकती है, या सोते समय आपकी जीभ के कारण सांस की नली के रुकावट होने की संभावना बढ़ सकती है.
कैसे पाएं इस समस्या से राहत?
अब आते हैं मुख्य सवाल पर की क्या स्लीप एप्निया का की समस्या से राहत मिल सकता है या इसके खतरे को कम किया जा सकता है? NIH के अनुसार, इस समस्या से राहत पाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे, तभी जाकर इसका खतरा कम होगा या समस्या कम हो सकेगी. इन बदलावों में;
अच्छी हार्ट हेल्थ डाइट को अपनाना
हेल्दी वजन बनाए रखना
धूम्रपान की आदत से दूरी
शराब का सेवन कम करना या फिर पूरी तरीके से बंद कर देना.
इसके अलावा, रात में वक्त पर सोना और पूरी नींद लेने की आदत अपनाना शामिल है.