महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के एक होने की अटकलें फिर तेज हो गईं. इससे एक दिन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में शरद पवार द्वारा विपक्ष के साथ मंच साझा किया था. यह चर्चा उस समय शुरू हुई जब अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. हालांकि, सूत्रों और पार्टी के आधिकारिक बयानों ने दोनों गुटों के किसी भी विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है.
एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस बैठक में अजित पवार के निधन के बाद पार्टी चलाने और कॉर्डिनेशन पर चिंता जाहिर की. भाजपा नेतृत्व ने एनसीपी नेताओं से साफ कहा कि वे अपने अंदरूनी मतभेदों को जल्द सुलझाएं और पार्टी ठीक करें, ताकि महाराष्ट्र में महायुति और एनडीए गठबंधन को मजबूती मिल सके.
मीटिंग में चर्चा मुख्य रूप से अजित पवार के बिना एनसीपी के भविष्य पर केंद्रित रही, जिसमें भाजपा ने इस बात पर चिंता जताई कि पार्टी को अभी किस तरह चलाया जा रहा है.
सुनेत्रा और पार्थ पवार बैठक से रहे दूर
दिल्ली में अमित शाह से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और छगन भुजबल शामिल थे. गौर करने वाली बात यह रही कि अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार इस बैठक में शामिल नहीं हुए. इधर दिल्ली में बैठक खत्म हुई, उधर मुंबई में सुनेत्रा पवार के आवास पर एनसीपी कोर कमेटी की एक आपात बैठक बुलाई गई. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों गुटों के किसी भी संभावित विलय का कड़ा विरोध करना था. अजित पवार खेमे के अधिकांश नेता शरद पवार गुट के साथ दोबारा जाने के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं.
शरद पवार गुट का भी इनकार
दूसरी ओर शरद पवार गुट ने भी विलय की संभावनाओं को पूरी तरह नकार दिया है. बता दें, रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी महीने में अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के एक होने की योजना लगभग तैयार हो चुकी थी और कई नेताओं के मुताबिक 12 फरवरी को इसका औपचारिक ऐलान होना था. लेकिन अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद चीजें बदल गईं. शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले पहले ही साफ कर चुकी हैं कि अजित पवार के जाने के बाद वह दरवाजा बंद हो चुका है.
क्या बोले एनसीपी नेता
विलय की उड़ती अफवाहों पर पूर्णविराम लगाते हुए एनसीपी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि इस बैठक को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और पार्टी में दरार की मनगढ़ंत कहानी गढ़ी जा रही है. उन्होंने कहा कि गठबंधन के सहयोगियों के बीच होने वाली औपचारिक और नियमित बैठकों का राजनीतिकरण न किया जाए.
विपक्षी रैली के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
यह सियासी घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब रविवार को इंडिया ब्लॉक ने दिल्ली के रामलीला मैदान में चुनाव आयोग के खिलाफ एक विशाल महारैली की थी. इसमें शरद पवार और राहुल गांधी सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे.