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हेल्थ

रोज नींद नहीं हो रही पूरी तो दिमाग पर हो सकता है ऐसा असर, जानिए नींद की कमी से क्या होता है

Lack Of Sleep Effects On Brain: नींद की कमी दिमाग को एक नहीं बल्कि कई तरह से प्रभावित कर सकती है. ऐसे में यहां जानिए नींद की कमी से शरीर में कौन-कौन से बदलाव होने लगते हैं.

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Written By: Seema Thakur Updated: Mar 5, 2026 18:02
Lack Of Sleep Effects
नींद पूरी नहीं करने से क्या होता है?

Lack Of Sleep Effects: एक या 2 दिन नींद पूरी ना होना ज्यादा चिंता की बात नहीं है लेकिन अगर रोज-रोज नींद पूरी ना हो तो इससे शरीर को कई तरह से नुकसान हो सकता है. नींद की कमी ना सिर्फ थकान की वजह बनती है बल्कि इससे साइकोलॉजिकल इफेक्ट्स भी पड़ने लगते हैं. ऐसे में रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेनी जरूरी होती है. यहां जानिए अगर आप रोजाना 7 घंटे से कम नींद लेते हैं तो इसका आपके दिमाग पर क्या असर पड़ता है और किस-किस तरह से ब्रेन प्रभावित होता है.

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नींद की कमी का दिमाग पर असर | Lack Of Sleep Effects On Brain

इमोशनल रेग्यूलेश पड़ पड़ता है असर

नींद की कमी (Neend Ki Kami) से इमोशनल अलार्म सिस्टम ज्यादा रिएक्टिव होने लगता है. यह 60% ज्यादा रिएक्टिव होने लगता है जिससे इमोशंस और ज्यादा इंटेंस हो जाते हैं, व्यक्ति ज्यादा इरिटेट होने लगता है, एंजाइटी बढ़ जाती है और व्यक्ति इमोशनली सेंसिटिव हो जाता है.

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बढ़ जाता है स्ट्रेस

खराब नींद या कहें नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल लेवल्स बढ़ जाते हैं. कोर्टिसोल स्ट्रेस हार्मोन है. इसके बढ़ने से स्ट्रेस बढ़ जाता है. समय के साथ-साथ ना सिर्फ चिंता बल्कि एंजाइटी, मूड स्विंग्स और बर्नआउट व्यक्ति को प्रभावित करने लगते हैं.

प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स की क्षमता कम होने लगती है

दिमाग का प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स डिसीजन मेकिंग, इंपल्स कंट्रोल और रैशनल थिंकिंग के लिए उत्तरदायी होता है. जब नींद में कमी आती है तो व्यक्ति को फोकस करने में दिक्कत होने लगती है, याद्दाश्त कम होने लगती है, जजमेंट पर फर्क पड़ता है और मेंटल क्लैरिटी नहीं रहती. साफ शब्दों में कहा जाए तो दिमाग की कार्यक्षमता कम होने लगती है.

इमोशनल मेमोरीज प्रोसेस्ड नहीं हो पाती

नींद इमोशनल एक्सपीरियंस को बेहतर करती है और नींद की कमी का प्रभाव बिल्कुल विपरीत होता है. नींद की कमी से इमोशनल बिल्ड अप बढ़ जाता है और व्यक्ति पहले से ज्यादा इमोशनली ओवरवेल्म्ड रहने लगता है यानी अपनी ही भावनाओं को कंट्रोल नहीं कर पाता है.

क्यों होने लगी हैं नींद की दिक्कतें

अधिकतम लोगों को नींद से जुड़ी दिक्कतें होने लगी हैं. इसकी बड़ी वजह सोने से पहले घंटों तक फोन की स्क्रीन स्क्रॉल करना हो सकता है. फोन की ब्लू लाइट मेलाटॉनिन के प्रोडक्शन को कम करती है जिससे समय से नींद नहीं आती है. इससे हाई वर्क प्रेशर बढ़ता है और रात के समय ओवरथिंकिंग बढ़ जाती है. ऐसे में मेंटल फॉग होने लगता है, इरिटेटेड फील होता है और घंटों तक नींद नहीं आती है.

समय से सोने के लिए क्या करें

  • सोने के समय से एक से डेढ़ घंटे पहले से ही फोन चलाना बंद कर दें.
  • कमरे की रोशनी कम कर दें और सोने के समय के आस-पास गंभीर बातें करने से परहेज करें.
  • ब्लू लाइट एक्सपोजर को कम करें.
  • दिमाग को शांत करने के लिए सोने से पहले अपने ख्याल डायरी में लिखे जा सकते हैं.
  • शाम के समय कैफीन के सेवन से परहेज करें.
  • ज्यादा पानी पीकर सोने से परहेज करें, इससे देररात नींद टूट सकती है.
  • अगर आपको लंबे समय से ठीक तरह से नींद लेने में दिक्कत हो रही है या नींद नहीं आती है तो किसी प्रोफेशनल की हेल्प लेने से झिझकें नहीं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Mar 05, 2026 06:01 PM

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