Kaalchakra Today 15 May 2026

Kaalchakra: आज या कल, वट सावित्री व्रत कब? पंडित सुरेश पांडेय से जानें सही तिथि और महाउपाय

Kaalchakra Today: हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है, जिसकी तिथि को लेकर साल 2026 में कन्फ्यूजन बन रहा है. इसलिए प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आज वट सावित्री व्रत की सही तिथि, महत्व और विशेष उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं.

Kaalchakra Today 15 May 2026: विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का खास महत्व है, जो कि हर वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है. इस बार 16 मई 2026 की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है, जिसका समापन अगले दिन 17 मई 2026 की सुबह 1 बजकर 30 मिनट पर होगा. ऐसे में कल 16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाएगा. इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है.

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आज 15 मई 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको वट सावित्री व्रत के महत्व और उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं.

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वट सावित्री व्रत का महत्व

वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु जी, डालियों और पत्तियों में शिव जी का निवास स्थान है, जबकि पूरे वट के पेड़ में माता सावित्री या मां सरस्वती का वास होता है. मान्यता है कि वट के पेड़ की पूजा करने से लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. वट के पेड़ को ज्ञान और निर्माण का प्रतीक माना जाता है. बता दें कि भगवान बुद्ध को वट के पेड़ के नीचे ही ज्ञान प्राप्त हुआ था. इसके अलावा ये पेड़ हवा को शुद्ध करने में भी सहायक होता है.

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वट सावित्री व्रत के दिन करने वाले महाउपाय

  • जो व्यक्ति 5 वट के पेड़ लगाता है और उसकी सेवा करता है, उसकी 7 पीढ़ियां पुण्य कमाती हैं. बता दें कि घर की पूर्व दिशा में वट का पेड़ लगाना शुभ होता है, जबकि पश्चिम दिशा में इसे लगाना अशुभ माना गया है.
  • जिन कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल रहा है, वो वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा जरूर करें. कुंवारी कन्याएं सबसे पहले पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें. परिक्रमा करते हुए हल्दी की गांठ और मेहंदी बरगद के पेड़ पर चढ़ाएं. ऐसा करने से आपकी इच्छा जरूर पूरी हो सकती है.
  • वैवाहिक जीवन में चल रहे क्लेश से छुटकारा पाने के लिए वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा करें. साथ ही वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करते हुए उस पर कच्चा सूत लपेटें. साथ ही जड़ में मिट्टी से मीठा दूध मिलाकर माथे पर तिलक लगाएं. इसके अलावा इस उपाय से मांगलिक दोष का प्रभाव भी कम हो सकता है.
  • अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा करें. साथ ही वृक्ष के नीचे विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें, जबकि पेड़ की 12 बार परिक्रमा करें. परिक्रमा के दौरान पेड़ पर कच्चा सूत लपेटें. हर परिक्रमा के दौरान श्रृंगार का कोई न कोई सामान पेड़ के नीचे रखें. इसके बाद विष्णु जी को नारियल और पीले फूलों का भोग लगाएं. पूजा समाप्त होने के बाद विष्णु जी की प्रतिमा और प्रसाद अपने पुरोहित या विद्वान ब्राह्मण को दान करें.

यदि आप वट सावित्री व्रत के बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं तो उसके लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देखें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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