Space Food for Gaganyaan: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में जब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी, तब वे अपने साथ भारतीय स्वाद का अनुभव भी ले गए थे. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की डिफेंस फूड रिसर्च लेबोरेटरी (DFRL) ने उनके लिए एक बड़ा मेन्यू तैयार किया था, लेकिन बेहद सख्त टेस्टिंग के बाद केवल तीन व्यंजन ही अंतरिक्ष में ले जाने के लिए पास हो सके.
पोडकास्ट में शुभांशु शुक्ला ने बताया कि DFRL आगामी गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष भोजन तैयार कर रहा है और वे ज्यादा से ज्यादा व्यंजनों को प्रमाणित कराना चाहते थे. मूल मेन्यू में खिचड़ी, पुलाव और कई तरह की सब्जियां शामिल थीं, लेकिन सख्त परीक्षणों के बाद केवल गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा और आमरस ही सर्टिफाई हो पाए. इन व्यंजनों के फेल होने का सबसे बड़ा कारण समय की कमी थी, क्योंकि सभी टेस्ट पूरे करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं था.
अंतरिक्ष में भोजन पास करने की कड़ी चुनौतियां
अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले भोजन को बेहद कठिन और सुरक्षा से जुड़े मानकों से गुजरना पड़ता है. खाना महीनों तक बिना फ्रिज के सुरक्षित, पौष्टिक और खराब हुए बिना रहना चाहिए. इसके अलावा भोजन ऐसा होना चाहिए जो लॉन्च के समय होने वाले कंपन को सह सके, जीरो ग्रेविटी में बिखरे नहीं और माइक्रोबियल सुरक्षा मानकों पर खरा उतरे. शुभांशु शुक्ला खुद इन तीन भारतीय व्यंजनों का स्वाद नहीं ले पाए, क्योंकि ये तीनों व्यंजन उनके अंतरराष्ट्रीय साथी क्रू मेंबर्स के साथ शेयर किए गए थे, जिन्हें यह स्वाद बहुत पसंद आया.
जीरो ग्रेविटी में स्वाद का बदलना
अंतरिक्ष में रहने के दौरान शरीर में तरल पदार्थ ऊपर की तरफ बहते हैं, जिससे नाक बंद होने जैसी स्थिति बनती है और स्वाद व गंध महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है. इसके अलावा नासा के खाने में नमक कम होता है, जिस कारण मिशन के 13वें दिन शुभांशु को तीखे और नमकीन खाने की तीव्र इच्छा होने लगी थी. धरती पर वापस लौटने के बाद फ्लाइट सर्जन ने उनका स्वागत केला चिप्स और भाकरवड़ी से किया. यह अनुभव अब DFRL को गगनयान मिशन के लिए बेहतर मेन्यू तैयार करने में मदद करेगा.