मॉनसून के जाते-जाते अब बंगाल की खाड़ी में बना एक मौसम का सिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है. उम्मीद है कि ये जल्द ही आंध्र-प्रदेश-ओडिशा तट को पार कर सकता है. IMD ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बारे में जानकारी देते हुए एक पोस्ट किया, जिसमें लिखा है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना डिप्रेशन जल्द ही डीप डिप्रेशन में बदल सकता है. मौसम विभाग ने लिखा- “पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना डिप्रेशन पिछले 6 घंटों के दौरान 18 किमी/घंटा की गति से पश्चिम की ओर बढ़ा और आज, 22 सितंबर, 2026 को ये गोपालपुर (ओडिशा) से लगभग 200 किमी दक्षिण-पूर्व, कलिंगपट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 200 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व, पुरी (ओडिशा) से 210 किमी दक्षिण और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) से 290 किमी पूर्व में मौजूद था.” बंगाल की खाड़ी से इस सिस्टम को ‘अर्नब’ नाम दिया गया है.
अर्नब नाम कैसे पड़ा?
बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले हर चक्रवात का नाम अचानक तय नहीं होता, बल्कि इसकी लिस्ट पहले से तैयार रहती है. ये सूची WMO/ESCAP पैनल के 13 सदस्य देशों ने मिलकर बनाई है. इसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार समेत बाकी देश शामिल हैं. चक्रवातों के नामों का इस्तेमाल करना का क्रम पहले से तय होता है. जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में कोई सिस्टम निर्धारित चक्रवाती तीव्रता तक पहुंचता है, तो RSMC नई दिल्ली लिस्ट में मौजूद अगला नाम देता है. इस बार बारी बांग्लादेश की है. अर्नब नाम उसी ने प्रस्तावित किया गया है. इसका उच्चारण Ornab है. बांग्लादेश की लिस्ट में Nisarga, Biparjoy, Arnab और Upakul नाम भी शामिल हैं.
अर्नब चक्रवात का मतलब क्या है?
अर्नब बंगाली संस्कृ का मूल शब्द है, जिसका मतलब है समुद्र, सागर या विशाल जलराशि. हालांकि WMO की आधिकारिक चक्रवाती नाम सूची में Arnab का मतलब नहीं बताया गया है. लिस्ट में सिर्फ नाम, उसे प्रस्तावित करने वाला देश और उच्चारण का रिकॉर्ड है. वहीं, बंगाल की खाड़ी से उठे इस सिस्टम का सबसे ज्यादा असर दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में दिखाई दे सकता है. IMD के मुताबिक, 22 सितंबर को बारिश की गतिविधि बढ़ने वाली है. 23 सितंबर तक सिस्टम दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंच सकता है. इस बीच दो दिनों तक मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं.