भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने एक ऐसी बात पर विचार करने के लिए इंस्पायर किया है जिसके बारे में धरती पर लोग शायद ही कभी सोचते हों, कि अपने आस-पास के माहौल की वजह से वो कितनी आसानी से इंफॉर्मेशन हासिल सकते हैं और रोजमर्रा की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन स्पेस में हालात कुछ और होते हैं.
स्पेस में क्या परेशानियां आती हैं?
बेंगलुरु में स्पेस एक्सपो में बोलते हुए सुनीता विलियम्स ने कहा कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स के लिए सवालों के जवाब खोजना कहीं ज्यादा मुश्किल होता है. पृथ्वी पर लोग जानकारी तलाश करने के लिए बस अपने फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों के पास इतनी भरपूर जानकारी का डेटाबेस नहीं होता है.
एस्ट्रोनॉट्स को ज्यादा फ्रीडम की जरूरत क्यों?
सुनीता विलियम्स ने बताया कि ISS की टीमें अक्सर तकनीकी सवालों को हल करने और प्रॉब्लम्स को ठीक करने के लिए जमीन पर मौजूद टीमों से बातचीत पर डिपेंड रहती हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य के स्पेस स्टेशनों में एडवांस्ड ऑनबोर्ड नॉलेज सिस्टम होने चाहिए, ताकि अंतरिक्ष यात्री धरती पर मौजूद एक्सपर्ट्स पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना जरूरी जानकारी पा सकें.
ऐसी आजादी तब और भी जरूरी हो जाएगी जब इंसान अंतरिक्ष में और दूर तक ट्रैवल करेंगे, जहां बातचीत में देरी की वजह से तुरंत मदद मिलना मुश्किल हो सकता है. फ्यूचर की टीमों को प्रॉब्लम्स को एनालाइज करने, मेडिकल टेस्ट करने और साइंटिफिक डेटा को खुद समझने की जरूरत पड़ सकती है.
स्पेस में प्रिंटिंग कैसे मुमकिन है?
सुनीता ने माइक्रोग्रैविटी में मशीनें चलाने की चुनौतियों पर भी बात की. विलियम्स के मुताबिक नॉर्मल प्रिंटिंग भी मुश्किल हो सकती है क्योंकि कई मशीनें अर्थ की ग्रैविटी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं. उन्होंने भरोसेमंद 3D-प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी और ऐसे इक्विपमेंट डेवलप करने की अहमियत पर जोर दिया जो खास तौर पर बिना ग्रैविटी के काम करने के लिए बनाए गए हों.
भारत के स्पेस फ्यूचर के लिए सीख
सुनीता विलियम्स ने कहा कि भारत भविष्य के स्पेस स्टेशन डेवलप करने की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि नए सरकारी और कमर्शियल स्पेस स्टेशन ISS से मिली सीख का इस्तेमाल करके शुरू से ही ज्यादा एडवांस्ड क्षमताएं ला सकते हैं.
अपने तीन अंतरिक्ष मिशनों के तजुर्बे के आधार पर सुनीता विलियम्स ने लंबे समय तक चलने वाले साइंटिफिक रिसर्च की अहमियत के बारे में बात की, जिसमें तरल पदार्थों की गति, पौधों, डीएनए सीक्वेंसिंग, स्टेम सेल और लंबे समय तक अंतरिक्ष की यात्रा का मानव शरीर पर पड़ने वाले असर से जुड़ी स्टडीज शामिल हैं. उन्होंने कहा कि दशकों के रिसर्च ने अंतरिक्ष की खोज के अगले दौर के लिए एक मजबूत बेस तैयार किया है, जिसमें फ्यूचर के स्टेशन, मून मिशन और नए स्पेस क्राफ्ट्स शामिल हैं.