SpaceX का सुपर हैवी रॉकेट Starship लॉन्च, वहां जाने का इरादा जहां पहले कोई इंसान न पहुंचा हो

‘स्पेसएक्स’ ने सुपर हैवी रॉकेट स्टारशिप लॉन्च कर दिया है, एलन मस्क की कंपनी के लिए ये स्पेस की फील्ड में एक बड़ी एचीवमेंट है. इसके जरिए क ऐसा स्पेसक्राफ्ट बनाया जाएगा जिसको एक से ज्यादा दफा यूज किया जा सके.

@SpaceX

स्टारशिप रॉकेट (Photo-X/@SpaceX)

SpaceX Launches Starship: एलन मस्क की कंपनी ‘स्पेसएक्स’ ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को टेक्सास में स्टारबेस से अपना विशाल स्टारशिप रॉकेट लॉन्च किया. ये कंपनी की उस कोशिश का एक और बड़ा टेस्ट है, जिसका मकसद एक ऐसा स्पेसक्राफ्ट बनाना है जिसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सके और जो लोगों और सामान को अंतरिक्ष में दूर तक ले जा सके.

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मिशन के असल मकसद

इस मिशन का मकसद स्टारशिप को पहली बार अर्थ के ऑर्बिट में ले जाना और साथ ही 26 नई पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को तैनात करना है. SpaceX का कहना है कि इन नए सैटेलाइट्स से उसके ग्लोबल इंटरनेट नेटवर्क की कैपेसिटी और रिलायबिलिटी काफी बढ़ने की उम्मीद है.

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दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट

तकरीबन 407 फीट ऊंचे स्टारशिप में ‘सुपर हैवी बूस्टर’ और ‘शिप’ जशामिल हैं. दोनों हिस्सों को तेजी से दोबारा इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है. SpaceX इस क्षमता को स्पेसफ्लाइट को सस्ता और बार-बार करने लायक बनाने के लिए बहुत जरूरी मानता है.

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इस ऑर्बिटल टेस्ट के दौरान रॉकेट के धरती से लगभग 275 किलोमीटर ऊपर तक पहुंचने और करीब 10 घंटे तक चलने की उम्मीद है. प्लान के मुताबिक स्पेसक्राफ्ट प्रशांत महासागर (चिली के वेस्ट में) में कंट्रोल्ड तरीके से उतरने (स्प्लैशडाउन) से पहले पृथ्वी के तकरीबन 6 चक्कर लगाएगा.

कैसे होगी लैंडिंग?

‘सुपर हैवी बूस्टर’ से लॉन्च ऊपर की तरफ उड़ान (एसेंट), स्टेज अलग होने की प्रॉसेस, बूस्टबैक और गल्फ ऑफ अमेरिका में समंदर के बीच एक जगह पर लैंडिंग करके दिखाने की उम्मीद है. पिछली उड़ान के दौरान आई दिक्कतों के बाद SpaceX ने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए हैं.

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‘शिप’ के लिए मेजर गोल्स में ऑर्बिटल-इंसर्शन बर्न करना, स्टारलिंक सैटेलाइट्स को छोड़ना, रैप्टर इंजन का इस्तेमाल करके डी-ऑर्बिट प्रॉसेस करना और कंट्रोल्ड तरीके से वायुमंडल में री-एंट्री को पूरा करना शामिल है. डिप्लॉयमेंट के बाद स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स अपने एंटीना और सोलर एरे खोलेंगे और फिर रेडियो और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड स्टेशनों और बड़े नेटवर्क (कॉन्स्टेलेशन) के साथ संपर्क स्थापित करेंगे. इसके बाद वो अपने ऑर्बिट को ऊपर उठाने के लिए ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स का यूज करेंगे.

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3 सैटेलाइट्स में कैमरे भी लगे होंगे जो स्टारशिप की हीटशील्ड की तस्वीरें लेंगे, जिससे इंजीनियरों को भविष्य के मिशनों के लिए अतिरिक्त डेटा मिल सकेगा. SpaceX स्टारशिप को एम्बीशियस डीप-स्पेस मिशनों (जैसे फ्यूचर में चंद्रमा और मंगल पर इंसानी पहुंच) के लिए एक संभावित प्लेटफॉर्म के तौर पर देखता है. इससे पृथ्वी के आस-पास के इलाके से दूर की जगहों तक पहुंचने का उसका लंबे समय का सपना हकीकत के करीब आ रहा है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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