भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और इतिहास रचा है. ISRO ने आज सुबह करीब 2 बजकर 55 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से एक स्पेस मिशन लॉन्च किया. इस मिशन के तहत नॉटी ब्वॉय GSLV-F17 रॉकेट के साथ बाज सैटेलाइट EOS-05 (GISAT-1A) को लॉन्च किया गया है. ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि धरती से करीब 3600 किलोमीटर ऊपर ‘एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 05’ (जियो-इमेजिंग सैटेलाइट) को उसकी कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित कर दिया गया है. वहीं यह उड़ान GSLV रॉकेट की 19वां सफल उड़ान है और अंतरिक्ष से पूरे भारत की निगरानी करने के लिए महत्वपूर्ण मिशन है.
बॉर्डर पर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखेगा
ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि जियो सिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च हुआ है, जो अंतरिक्ष से पूरे भारत की निगरानी करेगा. 3600 किलोमीटर की ऊंचाई से हर 30 मिनट में भारतीय सीमाओं की तस्वीरें क्लिक करेगा और दुश्मनों की हरकतों पर नजर रखेगा. सैटेलाइट का वजन करीब 2367 किलोग्राम है और इसे अब तक का सबसे भारी पेलोड माना जा रहा है. हालांकि सामान्य रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कम ऊंचाई पर परिक्रमा करते हैं और किसी एक जगह का फोटो कुछ दिन में एक बार ही क्लिक कर पाते हैं. लेकिन बाज सैटेलाइट पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की फोटो लेगा और हर 30 मिनट में क्लिक करेगा. बाज सैटेलाइट में 700 मिलीमीटर का टेलीस्कोप है.
आपदा प्रबंधन के लिए रियल टाइम अपडेट देगा
700 मिलीमीटर के टेलीस्कोप के साथ बाज सैटेलाइट विजिबल, नियर-इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड बैंड में फोटो डेटा क्लेक्ट करेगा. वहीं यह सैटेलाइट आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होगा. बाढ़, चक्रवात, जंगल में आग जैसी घटनाओं के बारे में रियल टाइम अपडेट देगा. फसलों की स्थिति, मिट्टी में नमी आदि का आंकलन करेगा. सैटेलाइट बाज के जरिए देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी. यानी देश को सीमाओं की लगातार निगरानी करने के लिए एक औजार मिल गया है. इस मिशन से अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की स्थिति मजबूत होगी. आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम होगा.
2021 में असफल हो गया था EOS-03 मिशन
ISRO प्रमुख ने बताया कि GSLV -F17 तीन स्टेज वाला रॉकेट है, जिसकी ऊंचाई करीब 51.7 मीटर और लिफ्टऑफ वजन 420.5 टन है. इस रॉकेट की तीसरी स्टेज क्रायोजेनिक है. 2000 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाला सैटेलाइट बाज इस रॉकेट की नोज पर लगा है. साल 2021 में GSLV-F-10/EOS-03 मिशन असफल हो गया था. उड़ान के समय 307वें सेकंड में ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने मिशन को रोक दिया था. वह मिशन क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी के कारण मिशन फेल हुआ था. लेकिन नया मिशन GSLV-F17/EOS-05 उस मिशन की जगह लेगा, जो. 8 महीने के गैप के बाद लॉन्च किया गया.
2025 में भी फेल हो गया था एक बड़ा मिशन
दरअसल, 12 जनवरी को ISRO ने PSLV-C62 रॉकेट को 16 सैटेलाइट लेकर भेजा था, लेकिन लॉन्च के तीसरे चरण में ही ‘गड़बड़ी’ (anomal) के कारण सैटेलाइट अपने ऑर्बिट में नहीं पहुंचा सका था. यह साल 2026 में ISRO का एकमात्र लॉन्च था, जो असफल रहा. मई 2025 में भी PSLV-C61 को EOS-09 के साथ लॉन्च किया गया था, जो मोटर प्रेशर की समस्या के कारण असफल हो गया था. वहीं आज वाले मिशन को लॉन्च करने से पहले ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने तिरुमाला तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन करके मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की थी.