‘बेबुनियाद और गलत’, ISRO ने निजीकरण की अफवाहों पर दिया करारा जवाब, जानिए क्या है पूरा मामला?
ISRO के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली नौ संस्थाओं ने 4 सितंबर को ISRO चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन को पत्र लिखकर निजीकरण से जुड़ी खबरों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Sep 6, 2026 23:03
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Sep 6, 2026 23:03
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ISRO चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन. (Photo: ANI)
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया की एक प्रतिष्ठित स्पेस एजेंसी है. इसरो की टक्कर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) से की जाती है, और हो भी क्यों ना? इसरो ने मंगल मिशन समेत कई अभियानों को सफलता पूर्वक पूरा कर अपना लोहा मनवाया है. इसरो की सफलता के बीच बीते कुछ दिनों से स्पेस एजेंसी के निजीकरण की खबरें खूब चर्चा में रहीं. अब इसरो ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है. इसरो का कहना है कि भारतीय स्पेस एजेंसी का न तो निजीकरण होगा और न ही भूमिका कम होगी.
निजीकरण की अफवाहों पर इसरो ने क्या कहा?
ISRO ने अपने एक्स पोस्ट में स्पष्ट किया कि उसका न तो निजीकरण किया जा रहा है और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी अहमियत कम की जाएगी. स्पेस एजेंसी ने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को उसके कमजोर होने के तौर पर नहीं, बल्कि देश के पूरे अंतरिक्ष इकोसिस्टम के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए.
ISRO tweets, "The Next Frontier: Space Station, Moon and Planetary Exploration. This transition is particularly important in the context of Space Vision 2047. India’s ambitions include establishing the Bharatiya Antariksh Station by 2035, undertaking an Indian crewed mission to… https://t.co/20j4XdOB7xpic.twitter.com/pgxXDBAQVk
ISRO ने अपने बयान में कहा कि वह भारत में उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी विकास, राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान एवं खोज से जुड़े महत्वपूर्ण अभियानों की लीडिंग स्पेस एजेंसी बनी रहेगी. इसरो के मुताबिक, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य मौजूदा क्षमताओं को कम करना नहीं, बल्कि उनका विस्तार करना है.
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2047 तक बड़े अंतरिक्ष मिशन का लक्ष्य
ISRO ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार भारत के Space Vision 2047 का हिस्सा हैं. इसके तहत 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने, 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने, अगली पीढ़ी के और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लॉन्च सिस्टम विकसित करने और दूसरे ग्रहों की खोज जैसे लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं.
क्या है पूरा विवाद?
आप अगर खबरों से वाकिफ हैं तो आपको पता होगा कि जुलाई के महीने में एक साथ इसरो के कई वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबरें सामने आई थीं. इस मामले पर केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा और तत्काल प्रभाव से इस्तीफों पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद ISRO के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली नौ संस्थाओं ने 4 सितंबर को ISRO चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन को पत्र लिखकर निजीकरण से जुड़ी खबरों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी. कर्मचारी संगठनों ने सरकार की प्रस्तावित नीति, ISRO की भूमिका, कर्मचारियों और आने वाली भर्तियों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी.