अमेरिका को डर है कि अगर चीन इस मिशन में पहले कामयाब हो गया तो वह अंतरिक्ष के उस क्षेत्र पर अपना एकाधिकार जमा लेगा. नासा के मुताबिक चीन वहां दूसरे देशों की रिसर्च को रोक सकता है और उस इलाके पर अपनी स्थायी संपत्ति का दावा ठोक सकता है.
चीन का प्लेनेटरी डिफेंस

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चीन अंतरिक्ष में धरती की सुरक्षा के नाम पर अपना पहला 'प्लेनेटरी डिफेंस टेस्ट' शुरू करने की पूरी तैयारी में है. इस मिशन के तहत चीन एक विशाल एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) से अपना एडवांस्ड स्पेसक्राफ्ट टकराकर उसकी दिशा बदलने की कोशिश करेगा.
मैक 26 की रफ्तार

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चीन का यह स्पेसक्राफ्ट ध्वनि की गति से 26 गुना ज्यादा यानी मैक 26 की खौफनाक स्पीड से एस्टेरॉयड से सीधे टकराएगा. लगभग 9 किलोमीटर प्रति सेकंड की इस भयानक रफ्तार को देखकर दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां हैरान और हैरान-परेशान हैं.
नासा से बड़ा प्लान

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अमेरिका ने 2022 में 'डार्ट' (DART) मिशन के जरिए एस्टेरॉयड की दिशा बदलने में सफलता हासिल की थी. लेकिन चीन का यह नया प्रोजेक्ट नासा के उस मिशन से कहीं ज्यादा बड़ा, ताकतवर और तकनीक के मामले में बेहद एडवांस्ड है.
दो स्पेसक्राफ्ट का मिशन

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इस मिशन के लिए चीन एक साथ दो स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करेगा जो अंतरिक्ष में जाकर अलग-अलग हो जाएंगे. इनमें से एक एस्टेरॉयड को जोरदार टक्कर मारेगा और दूसरा दूर रहकर इस पूरे टकराव और उसके असर की बारीकी से निगरानी करेगा.
निशाने पर खास एस्टेरॉयड

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चीन ने इस साहसिक प्रयोग के लिए 30 मीटर आकार वाले '2015 XF261' नाम के एस्टेरॉयड को अपना मुख्य टारगेट चुना है. यह जोरदार टक्कर साल 2029 या 2030 के आसपास धरती से लाखों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में अंजाम दी जाएगी.
मानवता की नई उम्मीद

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करोड़ों साल पहले एक एस्टेरॉयड के टकराने से ही धरती से डायनासोरों का वजूद हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म हो गया था. चीन का दावा है कि उसकी यह कोशिश भविष्य में इंसानियत को ऐसे किसी भी बड़े विनाशकारी खतरे से सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगी.