करोड़ों की जान लेने वाला 'अल नीनो', अब फिर आ रहा वापस; भारत पर कितना बड़ा है खतरा?

दुनिया में एक फिर से मौसम का सबसे खतरनाक खतरा मंडरा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है जो बेहद ताकतवर रूप ले सकती है. मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह स्थिति विकसित हो रही है, जो बेहद ताकतवर रूप ले सकती है.

AL NINO.jpg
1 / 9

विज्ञापन

2026 में भी आ रहा सुपर अल नीनो?

2026 में भी आ रहा सुपर अल नीनो?2 / 9

मौसम वैज्ञानिकों के लिए यह किसी बुरे सपने के सच होने जैसा है, क्योंकि 1877 में जब इसी तरह का भयंकर 'सुपर अल नीनो' आया था, तब दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. ताजा मौसम जानकारी के अनुसार, 2026 में भी कुछ ऐसे ही हालात बनते दिख रहे हैं, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.

विज्ञापन

1877 का वो खौफनाक इतिहास

1877 का वो खौफनाक इतिहास3 / 9

जब हम इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और 1877-1878 के इतिहास को देखते हैं तो इसमें 'सुपर अल नीनो' को सबसे विनाशकारी मौसमी घटनाओं में गिना जाता है. उस दौरान इसके प्रभाव से भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों में भयंकर सूखा पड़ा था. बारिश न होने के कारण फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थीं. इतिहास में इसे 'ग्रेट फेमाइन' कहा जाता है. इस अकाल के कारण भुखमरी और बीमारियों से दुनिया भर में करोड़ों लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की सतह के तापमान में अत्यधिक वृद्धि उस सदी के सबसे बड़े जलवायु संकट का कारण बनी थी.

क्या 2026 में बन रहे वैसे ही हालात?

क्या 2026 में बन रहे वैसे ही हालात?4 / 9

वहीं, ताजा वैज्ञानिक आकलनों (NOAA और WMO) के अनुसार, इस साल मई से जुलाई के बीच अल नीनो के पूरी तरह से उभरने की प्रबल आशंका है. प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (SST) सामान्य से काफी तेजी से बढ़ रहा है. दुनिया भर के जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस बार यह मौसमी घटना और भी भयानक रूप ले सकती है.

विज्ञापन

भारत पर कितना पड़ेगा असर?

भारत पर कितना पड़ेगा असर?5 / 9

भारत के लिए यह खबर किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है. प्रशांत महासागर में होने वाले इस बदलाव का सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर पड़ता है. 'सुपर अल नीनो' के कारण इस साल मानसून कमजोर पड़ सकता है. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सूखे और भीषण लू का गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है.

कम बारिश की है आशंका

कम बारिश की है आशंका6 / 9

सामान्य तौर पर भारत में मानसून के दौरान लगभग 780 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके घटकर 800 मिमी के आसपास या फिर उससे भी कम रहने की आशंका है.

विज्ञापन

किसानों पर पड़ेगी दोहरी मार

किसानों पर पड़ेगी दोहरी मार7 / 9

भारत की लगभग 60 फीसदी खेती आज भी मानसून पर निर्भर है. अगर बारिश कम होती है तो इसका असर खरीफ की फसलों पर पड़ेगा. फसल उत्पादन घटने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ सकता है.

महंगाई और पानी की किल्लत

महंगाई और पानी की किल्लत8 / 9

खराब मानसून का अर्थ है खाद्य पदार्थों (सब्जियों और दालों) की कीमतों पर पड़ेगा और इनके दामों में भारी उछाल हो सकता है और पीने के पानी की भी कमी हो सकती है.

विज्ञापन

IMD रख रही बदलावों पर नजर

IMD रख रही बदलावों पर नजर9 / 9

मौसम विज्ञान विभाग और तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं प्रशांत महासागर में हो रहे इन बदलावों पर करीब से नजर रख रही हैं. हालांकि, अल नीनो का असर हर बार विनाशकारी हो, यह जरूरी नहीं है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में इसकी तीव्रता ने नीति निर्माताओं को अलर्ट मोड पर ला दिया है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन