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क्या 1 सितंबर को बदलेंगे गैस के दाम
हर महीने की पहली तारीख को जैसे ही घड़ी की सुइयां बदलती हैं, करोड़ों गृहिणियों, ढाबा मालिकों और होटल चलाने वालों की नजर एक ही खबर पर टिकी होती है कि LPG सिलेंडर के दाम घटे या बढ़े? 1 सितंबर को लेकर भी हर तरफ यही सुगबुगाहट है. कभी सितंबर का महीना जेब पर भारी पड़ता है और 115 रुपये तक दाम बढ़ा देता है, तो कभी 166 रुपये तक की रिकॉर्ड कटौती कर राहत की सांस देता है. इंडियन ऑयल (IOCL) के पिछले 12 सालों (2014 से 2025) के आंकड़ों के आईने में आइए समझते हैं कि सितंबर का महीना एलपीजी सिलेंडरों के लिए कैसा रहा है.
कमर्शियल सिलेंडर (19 Kg): 6 बार राहत, 5 बार झटका!

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होटल, रेस्टोरेंट और कारोबारियों के इस्तेमाल में आने वाले 19 किलो के इंडेन कमर्शियल सिलेंडर की बात करें, तो दिल्ली के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 12 सालों में 6 बार दाम घटे हैं, 5 बार दाम बढ़े हैं और 1 बार कीमतें स्थिर रही हैं.
सितंबर की सबसे बड़ी कटौती कब हुई?

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साल 2023 का सितंबर कारोबारियों के लिए सबसे राहत भरा रहा था.1 अगस्त को जो सिलेंडर 1680 रुपये का था, वह 1 सितंबर को सीधे 157.50 रुपये सस्ता होकर 1522.50 रुपये का रह गया था. कोलकाता में तो यह कटौती रिकॉर्ड 166.50 रुपये की थी. इसके अलावा 2014, 2015, 2022 और 2025 में भी सितंबर में कीमतें घटी थीं.
सितंबर की सबसे बड़ी बढ़ोतरी (2017):

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इसके ठीक उलट 2017 में सितंबर महीने ने जोरदार झटका दिया था. दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अचानक 115 रुपये महंगा होकर 966 रुपये से 1081 रुपये पर पहुंच गया था. इसके अलावा 2018, 2019, 2021 और 2024 में भी सितंबर में कीमतें बढ़ाई गई थीं.
घरेलू रसोई गैस (14.2 Kg): कैसा रहा है आम जनता का बजट?

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घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है. साल 2014 में सितंबर आते-आते घरेलू सिलेंडर 19 रुपये और 2015 में करीब 25.50 रुपये सस्ता हुआ था. लेकिन साल 2017 के सितंबर में घरेलू सिलेंडर पर सीधे 73.50 रुपये का उछाल आया. 2018 और 2019 में भी इसमें हल्की बढ़ोतरी देखी गई. इसके उलट, साल 2023 के अगस्त अंत में सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सीधे 200 रुपये की भारी कटौती की थी, जिससे दिल्ली में रेट घटकर करीब 803 रुपये पर आ गए थे.
सरप्राइजिंग रहा है सितंबर का महीना

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आंकड़ों के इस खेल से साफ है कि सितंबर का महीना एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए हमेशा सरप्राइज भरा रहता है. अब देखना यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्रूड ऑयल की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 1 सितंबर को राहत का तोहफा देती हैं या जेब का बोझ बढ़ाती हैं.