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Gold Loan Interest & Risks: लोन लेने से पहले जान लें ये नियम (photo credit- ai)
गोल्ड लोन इमरजेंसी के समय सबसे जल्दी और आसानी से मिलने वाले लोन में से एक है. लेकिन इसे लेते समय केवल आसानी से मिलने वाले पैसे को देखना ही काफी नहीं है, बल्कि इसकी ब्याज दरों, चुकाने के तरीकों (Repayment Options) और इससे जुड़े जोखिमों को भी समझना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि गोल्ड लोन पर कितना ब्याज लगता है, इसके क्या फायदे-नुकसान हैं और किन छिपे हुए खर्चों (Hidden Charges) से आपको सावधान रहना चाहिए.
ब्याज दरें और लोन चुकाने के तरीके

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गोल्ड लोन पर ब्याज दरें आमतौर पर 8% से 15% प्रति वर्ष के बीच होती हैं, जो इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप किस बैंक या एनबीएफसी (NBFC) से लोन ले रहे हैं और कौन सी स्कीम चुन रहे हैं.
लोन रीपेमेंट के लिए बैंक मुख्य रूप से ये विकल्प देते हैं:

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रेगुलर ईएमआई (Regular EMI): इसमें आप हर महीने मूलधन (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों की किस्त जमा करते हैं.
बुलेट रीपेमेंट (Bullet Repayment): इसमें आपको लोन की अवधि के दौरान हर महीने केवल ब्याज चुकाना होता है, और पूरा मूलधन लोन खत्म होने पर एक साथ देना पड़ता है. इससे महीने का बोझ तो कम होता है, लेकिन अंत में एक बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ता है.
गोल्ड लोन कब लेना फायदेमंद है?

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अगर आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) कम है, तो बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन की तुलना में गोल्ड लोन आसानी से और कम ब्याज पर मिल जाता है, क्योंकि इसमें आपका सोना गारंटी के तौर पर रखा होता है. जब आपको अचानक किसी मेडिकल इमरजेंसी या बिजनेस के लिए तुरंत फंड चाहिए, तो अपना कीमती सोना हमेशा के लिए बेचने के बजाय उसे गिरवी रखकर अस्थायी रूप से काम चलाया जा सकता है.
गोल्ड लोन से जुड़े जोखिम और सावधानियां

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गोल्ड लोन के कई फायदे हैं, लेकिन इससे जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जैसे कि भारतीय परिवारों के लिए गहनों का केवल आर्थिक मूल्य ही नहीं होता, बल्कि उनसे भावनाएं भी जुड़ी होती हैं. अगर आप लोन नहीं चुका पाते हैं, तो बैंक को सोना नीलाम करने का पूरा अधिकार होता है, जिससे बड़ा भावनात्मक झटका लग सकता है. केवल विज्ञापन में दी गई ब्याज दर न देखें. प्रोसेसिंग फीस, गोल्ड वैल्यूएशन चार्ज (Valuation Fee), लोन रिन्यूअल फीस और लेट पेमेंट पेनल्टी जैसे एक्स्ट्रा चार्ज आपके लोन को काफी महंगा बना सकते हैं.
सोने की कीमतों में गिरावट का जोखिम:

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लोन अवधि के दौरान अगर सोने के बाजार भाव तेजी से गिरते हैं, तो बैंक आपसे LTV (Loan-to-Value) रेशियो बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सोना गिरवी रखने या समय से पहले लोन का कुछ हिस्सा चुकाने को कह सकते हैं. गोल्ड लोन को एक अल्पकालिक वित्तीय पुल (Short-term Financial Bridge) की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, न कि लंबी अवधि के कर्ज की आदत बनाना चाहिए. इसका उपयोग केवल जरूरी और उत्पादक कामों के लिए करें, गैर-जरूरी खर्चों या शौक पूरे करने के लिए नहीं.