8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को कम मिल रहा है DA? यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग से की नया महंगाई इंडेक्स बनाने की मांग, समझें कारण

8th Pay Commission Latest News: केंद्रीय कर्मचारी संगठन वर्तमान AICPI-IW इंडेक्स को बदलकर नया कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स लागू करवाना चाहते हैं। जान‍िये इस नई व्‍यवस्‍था में कैलकुलेशन कैसे होगा? यून‍ियनों ने यह मांग क्‍यों रखी है?

8th Pay Commission Update DA Calculation
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8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बीच, ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने वेतन आयोग को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपा है। कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) की गणना के तरीके को बदला जाए और इसके लिए एक नया 'कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स' (Cost of Living Index) बनाया जाए। यूनियनों का तर्क है कि मौजूदा सरकारी पैमाना कर्मचारियों की असल महंगाई को नहीं नाप पा रहा है। आइए, 4 स्लाइड्स में आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर कर्मचारी नया इंडेक्स क्यों मांग रहे हैं और इससे उन्हें क्या फायदा होगा।

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अभी कैसे तय होता है आपका DA और कहां आ रही है दिक्कत?

अभी कैसे तय होता है आपका DA और कहां आ रही है दिक्कत?2 / 5

वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की गणना एक खास इंडेक्स से होती है। अभी DA की समीक्षा ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर साल में दो बार की जाती है। सरकार ने साल 2022-23 में इस इंडेक्स के बास्केट (वस्तुओं की सूची) में बदलाव कर दिया था। इसके तहत खाने-पीने की चीजों (Food and Beverages) का वेटेज (महत्व) 45.86% से घटाकर 36.75% कर दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि इसी वजह से असल महंगाई का पता नहीं चल पा रहा है।

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कम आय वाले कर्मचारियों पर पड़ रही है ज्यादा मार, यूनियनों का तर्क

कम आय वाले कर्मचारियों पर पड़ रही है ज्यादा मार, यूनियनों का तर्क3 / 5

यूनियनों का कहना है कि इंडेक्स में बदलाव का सबसे बुरा असर निचले स्तर के कर्मचारियों पर हो रहा है। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा भोजन, जरूरी घरेलू सामान, बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर खर्च होता है। नए सरकारी इंडेक्स में हाउसिंग, डिजिटल सर्विसेज, मनोरंजन और ट्रांसपोर्ट जैसी चीजों को ज्यादा वेटेज दिया गया है, जिनकी कीमतें खाने-पीने की चीजों जितनी तेजी से नहीं बदलतीं। नतीजा यह होता है कि कर्मचारियों की जेब ज्यादा ढीली होती है, लेकिन आंकड़ों में महंगाई कम दिखती है।

पेंशनभोगियों के लिए क्यों जरूरी है नया नियम? मेडिकल खर्च का बड़ा बोझ

पेंशनभोगियों के लिए क्यों जरूरी है नया नियम? मेडिकल खर्च का बड़ा बोझ4 / 5

AIDEF ने वेतन आयोग के सामने विशेष रूप से बुजुर्गों और पेंशनभोगियों की समस्या को मजबूती से रखा है। रिटायरमेंट के बाद पेंशनभोगियों का सबसे बड़ा खर्च दवाइयों, अस्पताल के इलाज, हेल्थ इंश्योरेंस और तीमारदारी (Caregiving Services) पर होता है। अगर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की कीमतें सामान्य महंगाई दर से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो मौजूदा DR (महंगाई राहत) बढ़ने के बावजूद पेंशनभोगियों की वास्तविक क्रय शक्ति घट जाती है। यानी उन्हें हर महीने अपनी जेब से अधिक पैसे लगाने पड़ते हैं।

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क्या है यूनियनों का प्रस्ताव? 8वें वेतन आयोग से की यह बड़ी सिफारिश

क्या है यूनियनों का प्रस्ताव? 8वें वेतन आयोग से की यह बड़ी सिफारिश5 / 5

कर्मचारियों की इस समस्या को दूर करने के लिए AIDEF ने एक व्यावहारिक समाधान सुझाया है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च के पैटर्न को देखते हुए एक समर्पित कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स बनाया जाए। इस नए इंडेक्स में भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, घर का किराया, बच्चों की शिक्षा और परिवहन को ज्यादा वेटेज (महत्व) दिया जाए। ऐसा होने से भविष्य में मिलने वाला DA, फिटमेंट फैक्टर और पे-रिवीजन पूरी तरह से व्यावहारिक और सटीक होगा।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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