Rajkot Civil Hospital Negligence: गुजरात के राजकोट सिविल अस्पताल के सिस्टम की बेहद शर्मनाक लापरवाही सामने आई है. अस्पताल प्रशासन की चूक के कारण एक मृत बुजुर्ग का शव किसी दूसरे परिवार को सौंप दिया गया, जिसने उन्हें अपना रिश्तेदार समझकर अंतिम संस्कार भी कर दिया. उधर जब अमेरिका से आई बेटी अपने पिता का शव लेने अस्पताल पहुंची, तब इस पूरी घटना का भंडाफोड़ हुआ.
क्या है पूरा मामला?
राजकोट के नाना मवा रोड स्थित रामपार्क निवासी और स्कूल नंबर 56 के रिटायर्ड टीचर हसमुखलाल शांतिलाल ठाकर (92 साल) 24 तारीख को घर में गिरने से चोटिल हो गए थे. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. हसमुखलाल की इकलौती बेटी वर्षा बेन अमेरिका में रहती हैं. बेटी के भारत पहुंचने तक शव को सुरक्षित रखने के लिए परिजनों ने उसे राजकोट सिविल अस्पताल के कोल्ड रूम में रखवा दिया था. उसी दौरान मुंबई निवासी गोपालभाई ओधवजीभाई धाधड़ा (56), जो कैंसर के इलाज के लिए राजकोट आए थे, का निधन हो गया था. उनका शव भी उसी कोल्ड रूम में रखा गया था.
जब गोपालभाई का परिवार मुंबई से राजकोट पहुंचा, तो अस्पताल कर्मचारियों ने पहचान में बड़ी चूक करते हुए गोपालभाई की जगह हसमुखलाल ठाकर का शव उन्हें सौंप दिया. मुंबई के परिवार ने बिना आइडेंटिटी को कंफर्म किए रामनाथपरा श्मशान घाट पर हसमुखलाल के शव का अंतिम संस्कार कर दिया और वापस लौट गए.
अमेरिका से बेटी पहुंची तो उड़े होश
जब हसमुखलाल की बेटी अमेरिका से राजकोट पहुंची, तो पूरा परिवार अंतिम यात्रा की तैयारी करके अस्पताल के कोल्ड रूम से शव लेने पहुंचा. वहां पहुंचने पर पता चला कि हसमुखलाल का शव गायब है. काफी छानबीन के बाद जब सच्चाई सामने आई कि उनका अंतिम संस्कार कोई और परिवार कर चुका है, तो परिजनों के होश उड़ गए और अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ.
डॉक्टर ने जताया अफसोस
घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसल कोल्ड रूम के सेक्शन पर कोई नंबर दर्ज नहीं था. साथ ही मृतकों के शरीर या माथे पर नाम और पहचान का स्टीकर नहीं लगाया गया था. मामले के तूल पकड़ने पर सिविल सर्जन डॉ. कमलेश डोडिया ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया.
उन्होंने कहा, ‘यह एक अत्यंत संवेदनशील, कानूनी रूप से गंभीर और मानवीय भूल का मामला है. घटना की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है. भविष्य में ऐसी घटना न दोहराई जाए, इसके लिए पोस्टमार्टम और मरचुरी विभाग के लिए नई SOP तैयार की जा रही है. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’ फिलहाल पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों के समझाने के बाद दोनों परिवारों के बीच समझौता कराया गया, लेकिन अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही ने सरकारी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है.