कार के इंजन को सही टेंपरेचर पर बनाए रखने में कूलेंट बहुत जरूरी होता है. ये इंजन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचाता है और कूलिंग सिस्टम को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है, लेकिन कूलेंट बदलते समय की गई एक छोटी-सी गलती इंजन और पूरे कूलिंग सिस्टम पर भारी पड़ सकती है.
अलग-अलग कूलेंट मिलाना पड़ सकता है भारी

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कई लोग बिना चेक किए अलग-अलग तरह या रंग के कूलेंट के एक साथ इस्तेमाल कर लेते हैं. ये सबसे आम गलतियों में से एक है. ऐसा करने से कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और इंजन को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है.
नया कूलेंट डालने से पहले क्या करें?

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अगर आपकी कार में पहले से हरे रंग का कूलेंट है, तो दोबारा उसी तरह के कूलेंट का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. यही नियम लाल, नीले या किसी भी दूसरे रंग के कूलेंट पर लागू होता है. ध्यान रहें हमेशा वाहन निर्माता की सिफारिश के अनुसार ही कूलेंट का चुनाव करें.
इंजन को सिर्फ ठंडा ही नहीं रखता कूलेंट

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कूलेंट का कम केवल इंजन का तापमान कंट्रोल करना नहीं है. ये इंटन के अंदर जंग लगने से बचाने, मेटल वाले हिस्सों की घर्षण कम करने और कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है. इसलिए समय समय पर इसकी जांच और जरूरत पड़ने पर बदलाव करना जरूरी होता है.
सही कूलेंट चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

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बाजार में हरे, नीले, लाल, नारंगी और बैंगनी समेत कई रंगों के कूलेंट मिलते हैं, लेकिन सही कूलेंट का चयन केवल रंग देखकर नहीं करना चाहिए. हर कार के इंजन की जरूत अलग होती है, इसलिए हमेशा काम के मॉडल, कंपनी की सिफारिश के मुताबिक ही कूलेंट चुनें. (Images Credit-AI)