लाल, हरा या नीला...कौन सा कूलेंट कार के लिए सही? एक गलती से खराब हो सकता है इंजन
कार इंजन को सही बनाए रखने के लिए कूलेंट कितना जरूरी है ये बात हर कार मालिक को पता है, लेकिन कई बार गलत कूलेंट की चयन से इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. जानते हैं सही कूलेंट चुनने का तरीका.

कार के इंजन को सही टेंपरेचर पर बनाए रखने में कूलेंट बहुत जरूरी होता है. ये इंजन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचाता है और कूलिंग सिस्टम को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है, लेकिन कूलेंट बदलते समय की गई एक छोटी-सी गलती इंजन और पूरे कूलिंग सिस्टम पर भारी पड़ सकती है.
अलग-अलग कूलेंट मिलाना पड़ सकता है भारी
2 / 7कई लोग बिना चेक किए अलग-अलग तरह या रंग के कूलेंट के एक साथ इस्तेमाल कर लेते हैं. ये सबसे आम गलतियों में से एक है. ऐसा करने से कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और इंजन को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है.
हो सकता है केमिकल रिएक्शन
3 / 7ये माना जाता है कि कूलेंट का रंग सिर्फ पहचान के लिए होता है, इसलिए किसी भी रंग का कूलेंट मिलाया जा सकता है. जबकि अलग-अलग रंग के कूलेंट की कैमिकल स्ट्रक्चर अलग हो सकता है. इन्हें मिलाने पर रिएक्शन हो सकता है, जिससे स्लज बनने का खतरा रहता है. यही स्लज रेडिएटर, पाइप और कूलिंग सिस्टम में रुकावट पैदा कर सकता है. ये भी पढे़ं- Hero HF Deluxe हुई सस्ती, कंपनी ने घटाई कीमत, अब सिर्फ इतने में खरीदें शानदार माइलेज वाली बाइक
नया कूलेंट डालने से पहले क्या करें?
4 / 7अगर आपकी कार में पहले से हरे रंग का कूलेंट है, तो दोबारा उसी तरह के कूलेंट का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. यही नियम लाल, नीले या किसी भी दूसरे रंग के कूलेंट पर लागू होता है. ध्यान रहें हमेशा वाहन निर्माता की सिफारिश के अनुसार ही कूलेंट का चुनाव करें.
कूलेंट बदलना हो तो पहले सिस्टम फ्लश करें
5 / 7अगर किसी कारण से आपको कूलेंट बदलना है तो, पहले पूरे कूलिंग सिस्टम को अच्छी तरह फ्लश करना जरूरी है. इसके बाद ही नया कूलेंट डालें. ऐसा करने से पुराने और नए कूलेंट के मिक्स होने वाली संभावित समस्याओं से बचा जा सकता है. ये भी पढ़ें- E20 पेट्रोल से बढ़ी टेंशन! 10 लाख रुपये के बजट में खरीदें ये 4 दमदार डीजल कारें, माइलेज भी मिलेगा शानदार
इंजन को सिर्फ ठंडा ही नहीं रखता कूलेंट
6 / 7कूलेंट का कम केवल इंजन का तापमान कंट्रोल करना नहीं है. ये इंटन के अंदर जंग लगने से बचाने, मेटल वाले हिस्सों की घर्षण कम करने और कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है. इसलिए समय समय पर इसकी जांच और जरूरत पड़ने पर बदलाव करना जरूरी होता है.
सही कूलेंट चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
7 / 7बाजार में हरे, नीले, लाल, नारंगी और बैंगनी समेत कई रंगों के कूलेंट मिलते हैं, लेकिन सही कूलेंट का चयन केवल रंग देखकर नहीं करना चाहिए. हर कार के इंजन की जरूत अलग होती है, इसलिए हमेशा काम के मॉडल, कंपनी की सिफारिश के मुताबिक ही कूलेंट चुनें. (Images Credit-AI)



















