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भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति पर आधारित है पतंजलि गुरुकुलम, जानिए गुरुकुल कैसे शेप करता है बच्चों का भविष्य

Gurukul Education Vs Modern Education: गुरुकुल शिक्षा पद्धति क्या है, यह मॉडर्न स्कूली शिक्षा से कैसे अलग है और गुरुकुल में किस तरह बच्चे के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है, जानिए यहां. एक नहीं बल्कि अनेक तरीकों से बच्चे के भविष्य को बेहतर बनाता है गुरुकुल.

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Patanjali Gurukulam: भारत की प्राचीन और पारंपरिक शिक्षा पद्धति रही है गुरुकुल शिक्षा पद्धति. आपने रामायण और महाभारत में भी गुरुकुल का जिक्र सुना होगा. गुरुकुल में विद्यार्थी सिर्फ किताबी ज्ञान ही अर्जित नहीं करते बल्कि यज्ञ, शास्त्र और योग का भी अध्ययन करते हैं. गुरुकुल के बच्चों की दिनचर्या भी मॉडर्न स्कूली बच्चों से अलग होती है. गुरुकुल में सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक का समय निर्धारित होता है. वहीं, दिनभर में बच्चों को विविध विद्याओं और कलाओं की शिक्षा दी जाती है. इसी पारंपरिक शिक्षा पद्धति पर आधारित है पतंजलि गुरुकुलम. पतंजलि गुरुकुलम में पढ़ रहे विद्यार्थियों को विज्ञान ही नहीं बल्कि वेदों का भी ज्ञान दिया जाता है. यहां जानिए गुरुकुल की शिक्षा कैसी होती है और यह किस तरह मॉडर्न शिक्षा से अलग है.

गुरुकुल में होता है विद्यार्थी का पूर्ण विकास

गुरु शिष्य परंपरा – गुरुकुल में शिक्षक यानी गुरु बच्चों को केवल पढ़ाते ही नहीं बल्कि उनका मार्गदर्शन भी करते हैं.

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व्यवहारिक ज्ञान – गुरुकुल में जीवन के हर पहलू से परिचित कराया जाता है. विद्यार्थियों को धर्मशास्त्र, कृषि, आयुर्वेद, अर्थशास्त्र और स्किल आधारित शिक्षा दी जाती है.

सभी का एक बराबर होना – पहनावे से लेकर जीवनशैली तक सभी बच्चों की एकसमान होती है. गुरुकुल में सामाजिक समानता बनी रहती है.

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कैरेक्टर डेवलपमेंट – बच्चों के कैरेक्टर डेवलपमेंट में गुरुकुल की अहम भूमिका देखने को मिलती है. गुरुकुल की शिक्षा में बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाता बल्कि उन्हें आचार-व्यवहार भी सिखाया जाता है. बच्चों में सद्भाव और करुणा के गुण डाले जाते हैं.

अनुशासन – गुरुकुल में बच्चों को अनुशासन सिखाया जाता है. उठने का समय, पढ़ने का समय, खाने और सोने का समय भी निर्धारित होता है. इससे बच्चों में डिसिप्लिन आता है.

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मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान – गुरुकल में बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है. पतंजलि गुरुकुलम की बात करें तो यहां बच्चों को योग सिखाया जाता है. योग बच्चों को मानसिक रूप से स्वस्थ्य और मजबूत बनाता है. बच्चों पर किसी चीज का दबा ना डालते हुए ध्यान और योग के माध्यम से तनाव को दूर किया जाता है.

मूल्यों पर आधारिक शिक्षा – पतंजलि गुरुकुलम में बच्चों को मूल्यों पर आधारित शिक्षा दी जाती है. गुरुकुल में विद्या को विनय से जोड़ने की कोशिश की जाती है और बच्चों को सामाजिकता ही नहीं बल्कि नैतिकता भी सिखाई जाती है.

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सर्वांगीण विकास – बच्चों के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी लेता है गुरुकुल. गुरुकुल में बच्चों के बौद्धिक विकास पर ही नहीं बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक विकास पर ध्यान दिया जाता है.

बच्चे के भविष्य को शेप करता है गुरुकुल

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  • गुरुकुल में बच्चे आत्मनिर्भर बनना सीखते हैं.
  • बच्चों को साफ-सफाई से लेकर पशुपालन तक सिखाया जाता है.
  • बच्चों को जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है.
  • बच्चे ना सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं.
  • बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास होता है.
  • बच्चों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता होआती है.
  • बच्चे जीवन जीने की कला सीखते हैं.
  • वेदों का ज्ञान अर्जित करने के साथ ही बच्चों में आधुनिक विषयों की समझ भी होती है.
  • बच्चे गुरु-शिष्य संबंधों को बेहतर तरह से समझते हैं.
  • बच्चे प्रकृति से जुड़ाव महसूस करते हैं.

आधुनिक स्कूलों से कैसे अलग है गुरुकुल

गुरुकुल में बच्चों को कोडिंग और मैनेजमेंट भी सिखाया जाता है, लेकिन आधुनिक स्कूलों में बच्चों को शास्त्रों का वो ज्ञान नहीं दिया जाता जो गुरुकुल देता है. गुरुकुल में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है, बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाता है, बच्चों को जीवन की हर कठिनाई से लड़ने की कला सिखाई जाती है. गुरुकुल के बच्चे योग, संस्कार, व्यवहार और शास्त्रीय कलाओं में सबसे आगे होते हैं.

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यह भी पढ़ें – भारत का वो स्कूल जहां बच्चों को टेक्नोलॉजी ही नहीं बल्कि वेदों का ज्ञान भी मिलता है, जानिए पतंजलि गुरुकुलम में कैसे लें एडमिशन

First published on: Mar 31, 2026 05:56 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती है. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं. अनुभव - 7 साल शिक्षा - जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पिछला अनुभव - NDTV, दिल्ली प्रेस, डायमंड पब्लिशिंग हाउस

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