Dahi vs Chaas for Gut Health: ज्यादातर भारतीय घरों में खाना दही या छाछ के बिना अधूरा लगता है, खासकर गर्मियों में तो ये और भी जरूरी हो जाते हैं. ऑफिस से थककर आए हों, कॉलेज से लौटे हों या बाहर का भारी खाना खा लिया हो, दही और छाछ पेट को आराम देने का काम करते हैं. दोनों ही दूध से बनते हैं और इनमें अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पेट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन जब पेट से जुड़ी दिक्कतें शुरू होती हैं, जैसे एसिडिटी, गैस, पेट फूलना या कब्ज, तब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति में दही खाएं या छाछ पिएं. आइए इसे आसान तरीके से समझते हैं कि कौन ज्यादा बेहतर है.
यह भी पढ़ें: मिट्टी के बर्तनों को साफ कैसे किया जाए? शेफ पंकज भदौरिया से जानें बिना केमिकल इस्तेमाल किए चमकाने का तरीका
गट हेल्थ के लिए दही कैसे काम करता है
- दही में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं. अगर आपका डाइजेशन थोड़ा कमजोर है या आप अक्सर बाहर का खाना खाते हैं, तो दही पेट के लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
- दही थोड़ा गाढ़ा होता है, इसलिए यह पेट को देर तक भरा हुआ महसूस कराता है. जिम जाने वाले या वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए यह अच्छा स्नैक भी बन सकता है. अगर आपको हल्की कब्ज की परेशानी है, तो रोज थोड़ा दही खाने से फायदा मिल सकता है. हालांकि, जिन लोगों को ज्यादा एसिडिटी रहती है, उनके लिए कभी कभी दही भारी लग सकता है, खासकर रात में.
छाछ क्यों मानी जाती है हल्की और ठंडी
- छाछ दरअसल दही से ही बनती है, लेकिन उसमें पानी मिलाकर उसे हल्का कर दिया जाता है. इसमें नमक, भुना जीरा या पुदीना डाल दें तो इसका स्वाद और भी अच्छा हो जाता है.
- अगर आपको अक्सर गैस, एसिडिटी या पेट में जलन रहती है, तो छाछ ज्यादा राहत दे सकती है. यह पेट को ठंडक देती है और खाना जल्दी पचाने में मदद करती है. गर्मियों में बाहर घूमने या ट्रैवल के दौरान छाछ पीना काफी फायदेमंद रहता है.
- इसके अलावा, जो लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं और पेट भारी महसूस करते हैं, उनके लिए लंच के बाद एक गिलास छाछ अच्छा विकल्प हो सकता है.
एसिडिटी, कब्ज या लूज मोशन में क्या लें
- अगर एसिडिटी और पेट में जलन ज्यादा है, तो छाछ बेहतर रहती है. यह हल्की होती है और पेट को आराम देती है.
- अगर कब्ज की शिकायत है और पेट साफ नहीं हो रहा, तो दही मदद कर सकता है. लेकिन इसे ज्यादा मात्रा में न लें.
- लूज मोशन की हालत में सादा दही थोड़ा सा लेना ठीक रहता है, क्योंकि यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करता है. ऐसे समय में मसालेदार छाछ से बचें.
आखिर किसे चुनें
दही और छाछ दोनों ही फायदेमंद हैं, फर्क बस आपकी जरूरत और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है. अगर कुछ हल्का और ठंडा चाहिए, तो छाछ लें. अगर प्रोटीन और थोड़ा भरपूर महसूस करना है, तो दही चुनें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Dahi vs Chaas for Gut Health: ज्यादातर भारतीय घरों में खाना दही या छाछ के बिना अधूरा लगता है, खासकर गर्मियों में तो ये और भी जरूरी हो जाते हैं. ऑफिस से थककर आए हों, कॉलेज से लौटे हों या बाहर का भारी खाना खा लिया हो, दही और छाछ पेट को आराम देने का काम करते हैं. दोनों ही दूध से बनते हैं और इनमें अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पेट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. लेकिन जब पेट से जुड़ी दिक्कतें शुरू होती हैं, जैसे एसिडिटी, गैस, पेट फूलना या कब्ज, तब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति में दही खाएं या छाछ पिएं. आइए इसे आसान तरीके से समझते हैं कि कौन ज्यादा बेहतर है.
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गट हेल्थ के लिए दही कैसे काम करता है
- दही में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं. अगर आपका डाइजेशन थोड़ा कमजोर है या आप अक्सर बाहर का खाना खाते हैं, तो दही पेट के लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
- दही थोड़ा गाढ़ा होता है, इसलिए यह पेट को देर तक भरा हुआ महसूस कराता है. जिम जाने वाले या वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए यह अच्छा स्नैक भी बन सकता है. अगर आपको हल्की कब्ज की परेशानी है, तो रोज थोड़ा दही खाने से फायदा मिल सकता है. हालांकि, जिन लोगों को ज्यादा एसिडिटी रहती है, उनके लिए कभी कभी दही भारी लग सकता है, खासकर रात में.
छाछ क्यों मानी जाती है हल्की और ठंडी
- छाछ दरअसल दही से ही बनती है, लेकिन उसमें पानी मिलाकर उसे हल्का कर दिया जाता है. इसमें नमक, भुना जीरा या पुदीना डाल दें तो इसका स्वाद और भी अच्छा हो जाता है.
- अगर आपको अक्सर गैस, एसिडिटी या पेट में जलन रहती है, तो छाछ ज्यादा राहत दे सकती है. यह पेट को ठंडक देती है और खाना जल्दी पचाने में मदद करती है. गर्मियों में बाहर घूमने या ट्रैवल के दौरान छाछ पीना काफी फायदेमंद रहता है.
- इसके अलावा, जो लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं और पेट भारी महसूस करते हैं, उनके लिए लंच के बाद एक गिलास छाछ अच्छा विकल्प हो सकता है.
एसिडिटी, कब्ज या लूज मोशन में क्या लें
- अगर एसिडिटी और पेट में जलन ज्यादा है, तो छाछ बेहतर रहती है. यह हल्की होती है और पेट को आराम देती है.
- अगर कब्ज की शिकायत है और पेट साफ नहीं हो रहा, तो दही मदद कर सकता है. लेकिन इसे ज्यादा मात्रा में न लें.
- लूज मोशन की हालत में सादा दही थोड़ा सा लेना ठीक रहता है, क्योंकि यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करता है. ऐसे समय में मसालेदार छाछ से बचें.
आखिर किसे चुनें
दही और छाछ दोनों ही फायदेमंद हैं, फर्क बस आपकी जरूरत और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है. अगर कुछ हल्का और ठंडा चाहिए, तो छाछ लें. अगर प्रोटीन और थोड़ा भरपूर महसूस करना है, तो दही चुनें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.