Parenting Tips: जिद्दी और अपनी बात पर अड़े रहने वाले बच्चों से डील करना अक्सर ही बेहद मुश्किल होता है. बच्चे ना सिर्फ अपनी जिद पर अड़ जाते हैं बल्कि लोगों के सामने चीखना, चिल्लाना और जमीन पर लेटकर रोने जैसी हरकतें करने लगते हैं जिससे अक्सर ही पैरेंट्स को शर्मिंदा तक होना पड़ जाता है. वहीं, बच्चे की हर बात मान लेना उसकी जिद करने की आदत को बढ़ाने जैसा लगता है. ऐसे में अगर आप भी अपने बच्चे की जिद से परेशान हैं और चाहते हैं कि बच्चे की यह जिद करने की आदत छूट जाए तो यहां जानिए किस तरह आप इस काम में सफल हो पाएंगे. यहां आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं जिनकी मदद से बच्चे की जिद को कम किया जा सकता है.
कैसे छुड़ाएं बच्चे की जिद करने की आदत
खुद का कंपोजर बनाकर रखें
चीखना, चिल्लाना और जिद मनवाने के लिए गुस्सा करना बच्चे पैरेंट्स से सीख लेते हैं. ऐसे में अगर आपको किसी बात पर गुस्सा आता भी है तो बच्चे के सामने गुब्बारे की तरह फटने से परहेज करें. इससे बच्चा भी गुस्सा करना सीख लेता है और जब उसे जिद मनवानी होती है तो आपका ही उदाहरण लेकर आपके ही सामने पेश करता है.
आप जितना ज्यादा बच्चे की बात काटेंगे या उसपर चिल्लाएंगे उतनी ही वह और जिद पर अड़ने लगेगा. बच्चा सही और गलत के बीच फर्क नहीं समझता इसीलिए उसे सिखाना जरूरी है. आप यह काम संयम के साथ ही कर सकते हैं. बच्चे के साथ जेंटल तरीका अपनाएं और प्यार से समझाने की कोशिश करें.
बच्चे को बीच में ना उठाएं
अक्सर पैरेंट्स को कोई सामान चाहिए होता है या कोई काम करवाना होता है तो वे बच्चे को आवाज लगा देते हैं. अगर बच्चा अपना कोई मनपसंद काम कर रहा होता है या थका होता है और पैरेंट्स की बात मानने से इनकार कर देता है तो पैरेंट्स उसे जिद्दी कह देते हैं. ऐसा ना करें. अगर बच्चा अपनी पसंद का काम कर रहा है तो आपको उसे बीच में नहीं उठाना चाहिए. उसे भी उसका पर्सनल स्पेस देना जरूरी है.
बच्चे को ओर्डर ना दें बल्कि चॉइस दें
अगर बच्चा आपसे कुछ मांग रहा है और आप उसे सरासर मना कर देते हैं तो वह जिद करने लगता है. इसीलिए बच्चे को सीधा ओर्डर देने के बजाय, कि इसे उठाकर वापस रख दो या तुम्हें इसकी जरूरत नहीं है इसीलिए यह नहीं मिलेगा, उसे चॉइस दें. बच्चे को कहें कि यह नहीं दिला सकते लेकिन तुम्हें अगली बार यहां घुमा लाएंगे या चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाएंगे या कम बजट वाली चीज दिलाएंगे, वगैरह. बच्चे के साथ कॉमन ग्राउंड पर आने की कोशिश करें.
जिस तरह बच्चे की हर जिद को पूरी करने से मना किया जाता है उसी तरह बच्चे को हर काम के लिए ना नहीं कहना चाहिए. बच्चे को अगर हर बार ही मना कर दिया जाए तो इससे उसे समझ आ जाता है कि आप उसकी बात सुनना ही नहीं चाहते. इससे बच्चा गुस्सा करने लगता है और जिद पर अड़ जाता है.