पिछले कुछ सालों से दुनिया एक के बाद एक कई बड़े संकट झेल रही है. हाल ही में सभी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की वजह से पैदा हुआ बुरा वक्त देखा. तेल और गैस की मारामारी देखी, लेकिन अगले साल जो होने वाला है वो दुनिया के लिए महासंकट हो सकता है. आप सभी ने इन दिनों अल नीनो के बारे में सुना होगा, जिसकी वजह से भीषण गर्मी पड़ी, मॉनसून में देरी हुई. अल नीनो के बढ़ते खतरे के चलते साल 2027 में गंभीर खाद्य संकट पैदा हो सकता है. जेपी मॉर्गन समेत कई संस्थाओं ने ये अलर्ट दिया है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से फसलों की पैदावार, कीमतें और महंगाई आसमान छू सकती है.
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क्या कहती है रिपोर्ट्स?
न्यूज़वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद से हालात पूरी तरह संभले नहीं है. लगातार आ रहे झटकों ने ग्लोबल फूड सिस्टम को और खोखला कर दिया है. जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट की मानें तो ये संकट पहले से ही गहरा रहा होगा. इसके पीछे की वजह Five W यानी War, Weather, Warehousing, Water और Waste बताया गया है. सीनियर इकोनोमिस्ट नोरा स्जेंटिवान्यी का मानना है कि फूड रिसेशन का दबाव 2027 के पहले 6 महीने तक लोगों के लिए मुसीबत बन सकता है. इस दौरान महंगाई 2.8 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
एल नीनो का भारत पर असर?
एल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से ज्यादा गर्म होने वाली जलवायु घटना है. इसका असर दुनिया भर के मौसम पैटर्न पर पड़ता है. भारत में एल नीनो अक्सर कमजोर मानसून, कम बारिश और बढ़ते तापमान से जुड़ा होता है. एल नीनो की वजह से खेती, मछली पालन, पानी की उपलब्धता पर भारी असर पड़ सकता है. भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. कमजोर मानसून की वजह से धान, मक्का, दालें और तिलहन जैसी फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है. सिर्फ भारत ही नहीं, जितने भी देश कृषि प्रधान हैं, उनपर एल नीनो कहर बरसा सकता है.
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