जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन, दोनों ही बार दिल्ली पुलिस के जवानों और अधिकारियों की वर्दी से नेम प्लेट गायब होने का मामला काफी चर्चा में रहा. प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकार और यूट्यूबर्स जब पुलिसकर्मियों से पूछते थे कि उनकी नेम प्लेट कहां है, तो कई बार उन्हें कोई जवाब नहीं मिलता था. कुछ पुलिसकर्मी कहते थे कि बैज कहीं गिर गया है, तो कुछ इसे लगाना भूल जाने की बात कहते थे. हालांकि, अब दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया है कि नेम प्लेट जानबूझकर हटाई गई थीं.
सोशल मीडिया पर ट्रोल का डर
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों और आरएएफ जवानों को सोशल मीडिया पर ट्रोल से बचने के लिए नेम प्लेट हटाने का फैसला लिया गया था. अधिकारियों ने बताया कि 20 जुलाई को संसद मार्ग पर लाठीचार्ज के बाद कई पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया था. इसी के बाद उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का फैसला लिया गया था.
परिवारों को भी किया जा रहा टारगेट
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हुईं, जिनमें पुलिसकर्मियों के बिना बैज के ड्यूटी करने पर सवाल उठाए गए. अधिकारियों का कहना है कि 20 जुलाई की घटना से यह भी सामने आया कि पुलिसकर्मियों के नाम सार्वजनिक होने के बाद उनके परिवारों को भी सोशल मीडिया पर टारगेट किया जाने लगा. एक अधिकारी ने कहा कि अगर कोई पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी ठीक से कर रहा है तो नेम प्लेट लगाने या न लगाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी. अबकी बार जंतर-मंतर पर कई आईपीएस अधिकारियों ने अपना नेम टैग लगाया था, क्योंकि उन्हें लोग आसानी से पहचान लेते हैं. वहीं जूनियर पुलिसकर्मियों को बिना टैग के ड्यूटी करने की अनुमति थी.
नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अपनाया जाता है तरीका
अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलवाद प्रभावित इलाकों और जम्मू-कश्मीर में भी सुरक्षा कारणों से नेम टैग हटाने की व्यवस्था पहले अपनाई जाती रही है. इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.