ओडिशा सरकार ने जारी की WII-अदाणी फाउंडेशन की ऑलिव रिडले कछुओं पर स्टडी, सामने आईं अहम जानकारियां

Odisha Government: ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, ओडिशा वाइल्डलाइफ ऑर्गनाइजेशन, धामरा पोर्ट कंपनी लिमिटेड और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से यह शोध किया जा रहा है.

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ओलिव रिडले को ओडिशा की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा. (Photo: News24)

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भुवनेश्वर में ओडिशा सरकार ने ओलिव रिडले कछुओं को लेकर तीन साल की शोध परियोजना की पहले वर्ष की रिपोर्ट जारी की है. देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और अदाणी फाउंडेशन की अगुवाई में हो रहे इस अध्ययन में सैटेलाइट टेलीमेट्री, नाव से सर्वे और समुद्र तट की निगरानी के जरिए कछुओं की आवाजाही, उनके आवास और नेस्टिंग पैटर्न को समझने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट के जरिए 10 कछुओं की 1,748 दिनों तक निगरानी की गई.

स्टडी में नर और मादा ओलिव रिडले के मूवमेंट में स्पष्ट अंतर सामने आया है. आंकड़ों के मुताबिक नर कछुए समुद्र की ओर माइग्रेशन पहले शुरू करते हैं, जबकि मादा कछुए लंबे समय तक तट के नजदीक रहती हैं. शोधकर्ताओं को बंगाल की खाड़ी और महाद्वीपीय शेल्फ के आसपास कछुओं के भोजन तलाशने के संभावित ठिकानों के संकेत भी मिले हैं.

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इस अध्ययन की सबसे खास जानकारी एक मादा ओलिव रिडले कछुए की यात्रा से सामने आई. सैटेलाइट ट्रैकिंग में पता चला कि उसने 271 दिनों के दौरान कुल 6,719 किलोमीटर की दूरी तय की और श्रीलंका के पूर्वी हिस्से के समुद्री क्षेत्र तक पहुंची. एक अन्य कछुए ने गहिरमाथा से रुशिकुल्या तक करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की और फिर वापस लौटा. इससे ओडिशा के अलग-अलग तटीय इलाकों के बीच इन कछुओं की आवाजाही का पता चलता है.

समुद्र तट के पास मिले 1,390 कछुए

2025-26 के नेस्टिंग सीजन के दौरान किए गए नाव आधारित सर्वे में कुल 1,390 कछुओं की पहचान की गई. इस दौरान 67 मेटिंग पेयर भी दर्ज किए गए. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश कछुओं की मौजूदगी समुद्र तट से दो किलोमीटर के दायरे में पाई गई. शोधकर्ताओं ने कछुओं की आवाजाही और उनके आवास के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से समझने के लिए लगातार निगरानी की जरूरत बताई है.

गहिरमाथा और रुशिकुल्या हैं प्रमुख नेस्टिंग साइट

ओडिशा में गहिरमाथा और रुशिकुल्या ओलिव रिडले कछुओं के प्रमुख नेस्टिंग स्थलों में शामिल हैं, जहां बड़े पैमाने पर कछुए अंडे देने के लिए पहुंचते हैं. ओलिव रिडले को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत भारत में उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है. शुरुआती फील्डवर्क गहिरमाथा क्षेत्र पर केंद्रित रहा, जबकि सैटेलाइट टैगिंग गहिरमाथा और रुशिकुल्या दोनों जगह की गई.

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ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, ओडिशा वाइल्डलाइफ ऑर्गनाइजेशन, धामरा पोर्ट कंपनी लिमिटेड और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से यह शोध किया जा रहा है. WII के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर. सुरेश कुमार के मुताबिक, ओडिशा में ओलिव रिडले की सैटेलाइट ट्रैकिंग करीब 15 साल बाद फिर शुरू हुई है. उनके अनुसार, इस अध्ययन से मिले आंकड़े वैज्ञानिक आधार पर संरक्षण की योजना तैयार करने में मदद कर सकते हैं.

अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति जी. अदाणी ने ओलिव रिडले को ओडिशा की प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि इनके संरक्षण के लिए इनके सफर और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझना जरूरी है. उन्होंने ओडिशा सरकार के पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस की भी सराहना की.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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