देश के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चाएं हो रही हैं. इस बीच अल नीनो भी लोगों के बीच चर्चा का मुद्दा रहा है. वहीं, अब अल नीनो को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में 2026-27 का सबसे शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है, जिसे 'गॉडजिला अल नीनो' कहा जा रहा है.
क्लाइमेट साइंटिस्ट जेक हॉसफादर की एनालिसिस के अनुसार, 2026-27 में बन रहा अल नीनो पहले से भी ज्यादा तेजी से मजबूत हो रहा है. यह अल नीनो 150 सालों में सबसे शक्तिशाली साबित हो सकता है.
मिली जानकारी के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर के दौरान मजबूत अल नीनो (El Niño) आने की संभावना 81% है. यह 1950 से अब तक के रिकॉर्ड में सबसे बड़ी अल नीनो की घटनाओं में से एक होगी. 2026 में बन रहे इस मजबूत अल नीनो ने दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिक को चिंता में डाल दिया है.
क्या है सुपर अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर में बनने वाला एक प्राकृतिक चक्र होता है. सामान्य दिनों में समुद्र के ऊपर चलने वाली हवाएं गर्म पानी को पश्चिमी प्रशांत यानी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं. लेकिन जब ये हवाएं खुद से ही कमजोर हो जाती हैं तो वही गर्म पानी वापस महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में फैल जाता है. इससे समुद्र का तापमान भी बढ़ जाता है.
भारत पर क्या होगा सुपर अल नीनो का असर?
अल नीनो का असर भारत के मानसून पर पड़ने की संभावना है. कई बार अल नीनो के दौरान मॉनसून काफी कमजोर हो जाता है, जिसके कारण किसानों को खेती करने में कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. बारिश कम होती है और कहीं-कहीं सूखे की स्थिति भी देखने को मिलती है.
2026 का अल नीनो बढ़ा रहा मुश्किलें?
साल 2026 में तैयार हो रहा अल नीनो पहले से ही डराने वाले संकेत दे रहा है. कई वैज्ञानिक इसे अब तक का सबसे ज्यादा शक्तिशाली अल नीनो करार दे चुके हैं. वहीं कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका असर 2027 तक बना रहने का भी अनुमान है.
1877 के बाद का सबसे ताकतवर अल नीनो
- वैज्ञानिकों के अनुसार 2026-27 का अल नीनो 1877 के बाद का सबसे ताकतवर अल नीनो साबित हो सकता है. मल्टी-जानकारी के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3.6°C अधिक पहुंच सकता है, जो बेहद असाधारण है.
- अल नीनो के कारण दुनिया भर के मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. कहीं भीषण सूखा, कहीं भारी बारिश के कारण बाढ़, कहीं हीटवेव और कहीं अत्यधिक बारिश की आशंका बढ़ सकती है.
- भारत पर भी सूपर अल नीनो का असर पड़ सकता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है और किसानों को खेती करने में कई दिक्कतें हो सकती हैं.
- वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग इसकी रफ्तार और प्रभाव को और बढ़ा सकती है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने देशों से संभावित सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी स्थितियों के लिए पहले से ही तैयारी करने की अपील की है.
देश के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चाएं हो रही हैं. इस बीच अल नीनो भी लोगों के बीच चर्चा का मुद्दा रहा है. वहीं, अब अल नीनो को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में 2026-27 का सबसे शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है, जिसे ‘गॉडजिला अल नीनो’ कहा जा रहा है.
क्लाइमेट साइंटिस्ट जेक हॉसफादर की एनालिसिस के अनुसार, 2026-27 में बन रहा अल नीनो पहले से भी ज्यादा तेजी से मजबूत हो रहा है. यह अल नीनो 150 सालों में सबसे शक्तिशाली साबित हो सकता है.
मिली जानकारी के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर के दौरान मजबूत अल नीनो (El Niño) आने की संभावना 81% है. यह 1950 से अब तक के रिकॉर्ड में सबसे बड़ी अल नीनो की घटनाओं में से एक होगी. 2026 में बन रहे इस मजबूत अल नीनो ने दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिक को चिंता में डाल दिया है.
क्या है सुपर अल नीनो?
अल नीनो प्रशांत महासागर में बनने वाला एक प्राकृतिक चक्र होता है. सामान्य दिनों में समुद्र के ऊपर चलने वाली हवाएं गर्म पानी को पश्चिमी प्रशांत यानी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं. लेकिन जब ये हवाएं खुद से ही कमजोर हो जाती हैं तो वही गर्म पानी वापस महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में फैल जाता है. इससे समुद्र का तापमान भी बढ़ जाता है.
भारत पर क्या होगा सुपर अल नीनो का असर?
अल नीनो का असर भारत के मानसून पर पड़ने की संभावना है. कई बार अल नीनो के दौरान मॉनसून काफी कमजोर हो जाता है, जिसके कारण किसानों को खेती करने में कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. बारिश कम होती है और कहीं-कहीं सूखे की स्थिति भी देखने को मिलती है.
2026 का अल नीनो बढ़ा रहा मुश्किलें?
साल 2026 में तैयार हो रहा अल नीनो पहले से ही डराने वाले संकेत दे रहा है. कई वैज्ञानिक इसे अब तक का सबसे ज्यादा शक्तिशाली अल नीनो करार दे चुके हैं. वहीं कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका असर 2027 तक बना रहने का भी अनुमान है.
1877 के बाद का सबसे ताकतवर अल नीनो
- वैज्ञानिकों के अनुसार 2026-27 का अल नीनो 1877 के बाद का सबसे ताकतवर अल नीनो साबित हो सकता है. मल्टी-जानकारी के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3.6°C अधिक पहुंच सकता है, जो बेहद असाधारण है.
- अल नीनो के कारण दुनिया भर के मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. कहीं भीषण सूखा, कहीं भारी बारिश के कारण बाढ़, कहीं हीटवेव और कहीं अत्यधिक बारिश की आशंका बढ़ सकती है.
- भारत पर भी सूपर अल नीनो का असर पड़ सकता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है और किसानों को खेती करने में कई दिक्कतें हो सकती हैं.
- वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग इसकी रफ्तार और प्रभाव को और बढ़ा सकती है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने देशों से संभावित सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी स्थितियों के लिए पहले से ही तैयारी करने की अपील की है.