एशियन गेम्स में जब हम अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते हैं, तो कई बार देश का नाम देखकर कन्फ्यूजन हो जाता है. किसी देश के आगे रिपब्लिक, किसी के आगे पीपल्स रिपब्लिक, तो किसी के आगे इस्लामिक रिपब्लिक लिखा होता है. सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है कोरिया का नाम. एक तरफ रिपब्लिक ऑफ कोरिया है, जिसे आम तौर पर साउथ कोरिया कहा जाता है, वहीं दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया है, जिसे नॉर्थ कोरिया कहा जाता है. आखिर इन नामों का मतलब क्या है और दोनों कोरिया के नाम इतने अलग क्यों हैं?
सबसे पहले समझिए ‘रिपब्लिक’ का मतलब
रिपब्लिक का आसान मतलब है गणराज्य. यानी ऐसा देश जहां देश का प्रमुख किसी राजपरिवार से नहीं बनता. देश की सत्ता और बड़े पदों के लिए संविधान और सरकारी प्रक्रिया होती है. लेकिन हर रिपब्लिक देश की सरकार एक जैसी नहीं होती. इसलिए सिर्फ नाम में रिपब्लिक लिखा देखकर उस देश की पूरी राजनीतिक व्यवस्था समझना सही नहीं होगा.
‘पीपल्स रिपब्लिक’ क्या होता है?
पीपल्स रिपब्लिक का मतलब आसान भाषा में जनता का गणराज्य समझा जा सकता है. यह नाम खास तौर पर उन देशों में देखने को मिलता है जिनकी राजनीतिक व्यवस्था पर समाजवादी या कम्युनिस्ट विचारधारा का असर रहा है. उदाहरण के लिए चीन का आधिकारिक नाम पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची में भी चीन का यही औपचारिक नाम दर्ज है. हालांकि किसी देश के नाम में पीपल्स लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां जनता को राजनीतिक सत्ता में किस तरह और कितनी भागीदारी मिलती है. इसके लिए उस देश का संविधान और पूरी राजनीतिक व्यवस्था देखनी पड़ती है.
‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक’ और ‘डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक’ में क्या फर्क है?
डेमोक्रेटिक का मतलब होता है लोकतांत्रिक और पीपल्स का मतलब जनता से जुड़ा हुआ. इसलिए डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक नाम में लोकतंत्र, जनता और गणराज्य-तीनों शब्द एक साथ आते हैं. उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया है. संयुक्त राष्ट्र भी इसी नाम का इस्तेमाल करता है. यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है-किसी देश के नाम में डेमोक्रेटिक शब्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वहां की राजनीतिक व्यवस्था को दूसरे लोकतांत्रिक देशों के समान ही समझा जाए. नाम और किसी देश की असल राजनीतिक व्यवस्था को अलग-अलग देखकर समझना चाहिए.
अब सबसे बड़ा सवाल-साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया में फर्क क्या है?
साउथ कोरिया का आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ कोरिया है, जबकि नॉर्थ कोरिया का आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया है. संयुक्त राष्ट्र दोनों को अलग-अलग सदस्य देशों के रूप में मान्यता देता है. दोनों 17 सितंबर 1991 को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बने थे. साउथ कोरिया के संविधान में साफ लिखा है कि रिपब्लिक ऑफ कोरिया एक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक है. उसके आधिकारिक नाम में सिर्फ ‘रिपब्लिक’ है, लेकिन उसके संविधान में ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक’ की बात साफ तौर पर लिखी गई है. वहीं नॉर्थ कोरिया के आधिकारिक नाम में ही डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक शब्द शामिल हैं. इसलिए दोनों के नामों का अंतर सिर्फ शब्दों का अंतर नहीं है. यह कोरियाई पेनिनसुला के बंटवारे के बाद बने दो अलग-अलग राज्यों की अलग पहचान और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ा है.
फिर ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ क्या है?
ईरान का आधिकारिक नाम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान है. यहां रिपब्लिक देश की गणराज्य वाली व्यवस्था को दिखाता है, जबकि इस्लामिक शब्द देश की व्यवस्था में इस्लाम की महत्वपूर्ण भूमिका को बताता है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची में भी ईरान का यही नाम दर्ज है. इसी तरह कुछ देशों के नाम में पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक भी मिलता है. उदाहरण के लिए अल्जीरिया का आधिकारिक नाम पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ अल्जीरिया है और लाओस का आधिकारिक नाम लाओ पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची में दोनों नाम दर्ज हैं.
तो इन शब्दों को देखकर क्या समझना चाहिए?
सीधी बात यह है कि रिपब्लिक, पीपल्स, डेमोक्रेटिक और इस्लामिक जैसे शब्द देशों के आधिकारिक नाम का हिस्सा हैं. इनके पीछे देश का इतिहास, संविधान, राजनीतिक सोच और राज्य की पहचान जुड़ी हो सकती है. लेकिन किसी देश की असली व्यवस्था समझने के लिए सिर्फ उसका नाम पढ़ना काफी नहीं है. उसके संविधान, चुनाव व्यवस्था, सरकार के काम करने के तरीके को भी देखना पड़ता है.