Flydubai Attack: ‘फ्लाई दुबई’ की फ्लाइट में ओमानी पायलट ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया. ये धारदार चीज प्लेन में पहले से ही मौजूद थी. अब आपके मन में ये सवाल होगा कि आखिर बोइंग 737 प्लेन में कुल्हाड़ी क्यों थी, जबकि फ्लाइट में कोई भी शार्प ऑब्जेक्ट ले जाने की मनाही होती है. इसको लेकर दिल्ली में मौजूद एकमात्र बोइंग 737 सिम्युलेटर से News 24 ने खुद जानकारी हासिल की
इस वजह से कॉकपिट में होती है कुल्हाड़ी
ओमानी पायलट को बाहर से हथियार ले जाने की जरूरत नहीं थी, बोइंग 737 के कॉकपिट के अन्दर ही होती है इमरजेंसी या क्रैश लैंडिंग के लिए कुल्हाड़ी, इसी कुल्हाड़ी के जरिए इमरजेंसी सिचुएशन में प्रेशराइज़ गेट और कॉकपिट गेट खोला जा सकता है और बेहद मुमकिन इसी कुल्हाड़ी के जरिए ओमान के को पायलट ने कैप्टन स्मित पर किया था हमला. पायलट और फ्लाइंग क्रू की चेकिंग उतनी ही सघनता से होती है. जैसे बाकी पैसेंजर की बाहर से हथियार या शार्प ऑब्जेक्ट ले जाना संभव नहीं है.
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भारतीय पायलट की सूझबूझ
अगर कैप्टन स्मित मच्छार कॉकपिट का डोर नहीं खोलते तो हवा में ही चली जाती 174 लोगों की जान, 9/11 हादसे के बाद रिफोर्स अलॉय मेटल से बनते हैं केबिन के गेट, जो बाहर से खोलना मुमकिन नहीं था. केबिन के अंदर ही डिजिटल तरीके और मैनुअल तरीके से गेट खोला जा सकता था. केबिन के अंदर मौजूद कैमरे से बाहर की तस्वीरें भी देखी जा सकती थीं
ऑटो पायलट के जरिए इमरजेंसी लैंडिंग
कैप्टन स्मित के घायल होने के बावजूद ऑटो पायलट के जरिए मुमकिन रही एमरजेंसी लैंडिंग, एक्सपर्ट इंस्ट्रक्टर ने News 24 को बताया कि बोइंग 737 के मॉडल में ऑटो पायलट के जरिए इमरजेंसी लैंडिंग का फीचर मौजूद है. यानी बिना पायलट के भी लैंडिंग संभव रही. ये सुविधा पायलट के साथ को-पायलट के पास भी रहती हैं, तमाम इक्विपमेंट की पहुंच सबसे पहले 34000 फीट से 17000 फीट की एटीट्यूड ड्रॉप की वजह से दिया गया एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के लिए इमरजेंसी सिग्नल 7700 भेजा गया.
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इमरजेंसी सिग्नल भेजा गया
ठीक 7 मिनट बाद इमरजेंसी हाईजैक का सिग्नल 7500 भी भेजा गया, जिसके बाद इजराइल डिफेंस फोर्स और सऊदी अरब के फाइटर प्लेंस ने इमरजेंसी रिस्पॉन्ड की उड़ान भरी और स्क्रैम्बल करके फ्लाइट के पास पहुंचने की कोशिश की थी. कुछ ही पलों के अंदर 10000 फीट के अल्टीट्यूड ड्रॉप की वजह से ग्रेविटेशनल फोर्स का पड़ता है. जिसका असर दिमाग पर असर होता है. अगर केबिन का गेट नहीं खुलता, तो तेल अवीव के अंदर न्यूयॉर्क जैसे हमले को रिपीट किया जा सकता था, बेंगूरियन एयरपोर्ट के टर्मिनल से लेकर इजराइल के बड़े शहर को हजारों लीटर जेट फ्यूल के धमाके से बनाया जा सकता था निशाना.