IIT Student Deaths: 2020-21 से 2024-25 के बीच भारत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई. इनमें से 45 मौतें सुसाइड की थीं और आठ अन्य अप्राकृतिक मौतें थीं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को IITs द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मरने वाले आधे से ज्यादा छात्र अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी से थे.
हाल के सालों में तेजी से इजाफा
आंकड़े बताते हैं कि इस पीरियड के आखिरी 2 सालों में छात्रों की मौतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. आईआईटी ने 2020-21 में 6, 2021-22 और 2022-23 में 6-6, 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 मौतें दर्ज कीं. कुल मिलाकर, रिपोर्ट की गई मौतों में से तकरीबन 85% खुदकुशी के मामले थे.
जनरल कैटेगरी के छात्रों की 23 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 43.4% है. OBC छात्रों की 12 मौतें हुईं, इसके बाद SC छात्रों की 10, ST छात्रों की 7 और EWS छात्रों की एक मौत हुई. कुल मिलाकर, SC, ST और OBC छात्रों की 29 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 54.7% है. OBC और ST छात्रों की सभी मौतें खुदकुशी के मामले थे, जबकि SC छात्रों की 10 मौतों में से 9 को सुसाइड के तौर पर कैटेगराइज्ड किया गया था.
सबसे ज्यादा मौतों वाले IITs
आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी हैदराबाद ने इस 5 साल की पीरियड में 7-7 मौतें दर्ज कीं. आईआईटी कानपुर और आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी ने 6-6 मौतें दर्ज कीं, जबकि आईआईटी मद्रास ने 5 मौतें दर्ज कीं. ये डेटा डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन की तरफ से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के सवालों के जवाब में कलेक्ट किया गया था. हालांकि आईआईटी ने अपने जवाब सौंप दिए थे, लेकिन इन आंकड़ों को संसद में पेश नहीं किया गया.
कैंपस में मिलने वाले सपोर्ट को लेकर चिंताएं
कई एक्सपर्ट्स ने पढ़ाई का दबाव, अकेलापन, फैकल्टी के साथ सीमित बातचीत, सामाजिक चुनौतियां और नौकरी से जुड़ी चिंता को ऐसे फैक्टर्स के तौर पर बताया है जो छात्रों की परेशानी का कारण बन सकते हैं. आईआईटी दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल राव ने समस्याओं को रोकने और फैकल्टी-स्टूडेंट के बीच बेहतर तालमेल पर ज्यादा जोर देने की बात कही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 दिसंबर 2025 तक 23 आईआईटी कैंपस में कुल 108 काउंसलर मौजूद थे.
साहिल वाकोडे की मां ने मांगा इंसाफ
आईआईटी बॉम्बे के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत के बाद, उनकी मां सोनाली वाकोडे ने न्याय की गुहार लगाई. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने परिवार को बताया था कि उसे जातिसूचक बातें कही जाती थीं और उसे ‘थोड़ा परेशान’ किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि परिवार ने मुश्किलों के बावजूद उसे आगे बढ़ने के लिए हिम्मत दी थी. साथ ही, उन्होंने अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग करते हुए क्राइम ब्रांच, प्रशासन और संविधान पर भरोसा जताया.