अंदरूनी बवासीर के क्या लक्षण हैं और बवासीर का मुख्य कारण क्या है, यहां जानिए Piles Symptoms, कारण और उपचार

Bawasir Ke Lakshan: बवासीर एक तकलीफदेह समस्या है जो एक बार हो जाए तो जल्दी ठीक होने का नाम नहीं लेती है. यहां जानिए बवासीर क्या होता है, क्यों होता है और इसे ठीक करने के लिए क्या किया जा सकता है.

Bawasir ke lakshan

बवासीर की शुरुआत कैसे पता करें?

Piles Symptoms: पाइल्स या बवासीर ऐसी समस्या है जिसमें मलाशय के निचले भाग यानी गुदा की नसें सूज जाती हैं और मस्से बनने लगते हैं. ये मस्से (Bawasir Ke Masse) गुदा के अंदर या बाहर हो सकते हैं. इसे आंतरिक या बाहरी बवासीर कहते हैं. आंतरिक बवासीर में मस्से दिखाई नहीं देते और मलाशय के अंदर होते हैं, वहीं बाहरी बवासीर में गुदा के बाहर मस्से बनते हैं और नजर आते हैं. आधी आबादी उम्र के किसी ना किसी पड़ाव पर इस समस्या से दोचार होती है. ऐसे में बवासीर क्यों होता है, बवासीर होने पर कैसे लक्षण (Bawasir Ke Lakshan) नजर आते हैं और बवासीर को किस तरह ठीक किया जा सकता है यह जानना जरूरी है.

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बवासीर होने का क्या कारण है

मलत्याग करते हुए जोर लगाना – अगर आप बहुत ज्यादा जोर लगाकर मलत्याग करते हैं यानी फ्रेश होते हैं तो इससे गुदा पर जोर लगता है और बवासीर हो सकता है.

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कब्ज होने पर – कब्ज (Constipation) की समस्या में ऐसा होता है. अगर लंबे समय तक व्यक्ति को कब्ज रहे तो इससे भी बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज्यादा देर टॉयलेट में बैठने से – बहुत से लोग फोन हाथ में लिए टॉयलेट सीट पर बैठे रहते हैं. मलत्याग करते हुए अगर 10 से 15 मिनट से ज्यादा बैठा जाए तो इससे गुदा पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और बवासीर हो सकता है.

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मोटापा – बवासीर के रिस्क फैक्टर्स में शामिल है मोटापा. ज्यादा वजन होना भी बवासीर के कारणों (Piles Causes) में शामिल है.

भारी वजन उठाना – हर दिन भारी वजन उठाते हैं या जिम में भारी वजन उठाते हैं तो बवासीर हो सकता है.

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गर्भावस्था – महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान बवासीर का खतरा बढ़ता है. पेवल्विक फ्लोर और पेल्विक वेन्स पर दबाव पड़ने के कारण ऐसा होता है.

फाइबर ना लेना – जिन लोगों की डाइट में फाइबर की कमी होती है उन्हें बवासीर हो सकता है.

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बाहर का खाना – जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, बाहर का मसालेदार, तला हुआ और मैदे से भरा खाना खाने पर बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है.

बवासीर के क्या लक्षण होते हैं

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  • बवासीर होने का सबसे बड़ा लक्षण है कि मलत्याग करते समय खून आने लगता है.
  • बवासीर का एक लक्षण है कि गुदा में हर समय खुजली, जलन या फिर असहजता महसूस होती है.
  • गुदा के पास सूजन आ जाती है और हाथ लगाने पर मस्से महसूस हो सकते हैं.
  • बैठने और चलने में परेशानी होने लगती है.
  • मलत्याग करते हुए दर्द होने लगता है.

क्या अंदरूनी बवासीर के कुछ अलग लक्षण हैं?

अंदरूनी बवासीर (Andruni Bawasir) होने पर बिना दर्द वाला रक्तस्त्राव हो सकता है. इसमें दर्द महसूस नहीं होता लेकिन मलत्याग करते हुए खून निकलता है. इसके अलावा प्रौलेप्स हो सकता है जिसमें मलत्याग करते हुए बवासीर के दाने गुदा से बाहर निकल आते हैं. इस बवासीर को उंगली से अंदर की तरफ धकेला भी जा सकता है. गुदा में खुजली होना, जलन होना, ऐसा लगना जैसे मल अंदर ही कहीं अटका हुआ है और कभी-कभी दर्द होना अंदरूनी बवासीर का लक्षण हो सकता है.

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बवासीर से बचने के लिए क्या करें

  • बवासीर ना हो इसके लिए अपनी डाइट को अच्छा रखना जरूरी होता है. बवासीर ना हो इसके लिए साबुत अनाज, दाल, फल और हरी सब्जियां अपने खाने में शामिल करें.
  • ढेर सारा पानी पिएं और इस बात का खास ध्यान रखें कि शरीर में पानी की कमी ना हो पाए.
  • रोज व्यायाम करना जरूरी है. व्यायाम करने पर पाचन अच्छा रहता है और कब्ज या बवासीर नहीं होती.
  • कोशिश करें कि आप बहुत ज्यादा देर तक ना बैठे रहें. इस बात का खासतौर से ध्यान रखें कि आप टॉयलेट में ज्यादा देर ना बैठें.
  • जोर लगाकर मलत्याग ना करें. बहुत तेज जोर लगाकर मलत्याग करने पर मलाशय अंदर से कटने-फटने का डर रहता है और गुदा की नसें सूज जाती हैं.
  • वजन को कंट्रोल में रखना जरूरी है. वेट कंट्रोल में रहता है और बवासीर की समस्या नहीं होती है.
  • मैदा और बेकरी के प्रोडक्ट्स कम खाएं. ये चीजें कब्ज की वजह बनती हैं जिससे बवासीर हो सकता है. तली-भुनी चीजों से परहेज करना भी जरूरी है.
  • शराब और धूम्रपान करने से बचें. प्रोसेस्ड और पैकेट वाले फूड्स को कम से कम खाएं.

बवासीर का क्या इलाज होता है

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बवासीर की शुरुआती स्टेज – शुरुआती स्टेज के बवासीर में डॉक्टर क्रीम लगाने के लिए देते हैं, दवाई खाने के लिए दी जाती है, गुनगुने पानी में बैठा जाता है, फाइबर के सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं और दर्द निवारक दवाइयां दी जाती हैं.

बवासीर की एडवांस स्टेज – बवासीर की एडवांस स्टेज होने पर सर्जरी से बवासीर दूर किया जाता है. इसमें लेजर सर्जरी, स्टेपलर सर्जरी या हेमोरोइडेक्टॉमी सर्जरी की जा सकती है.

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आयुर्वेदिक इलाज भी करते हैं लोग

बवासीर के बहुत से मरीज शुरुआती स्टेज में आयुर्वेदिक इलाज (Bawasir Ka Ilaj) की मदद लेते हैं. इसमें जड़ी-बूटियों वाली दवाएं दी जाती हैं जिनसे बवासीर दूर हो सके.

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बवासीर के मरीजों को क्या खाने पर आराम मिलता है

साबुत अनाज जैसे दलिया, ब्राउन राइस, मूंग की दाल, मसूर की दाल और ब्रोकली, शकरकंद, गाजर या हरी पत्तेदार सब्जियां खाने पर आराम मिल सकता है. फलों में नाशपाती, सेब, पपीता, केला और हेल्दी फैट्स में घी और अलसी के बीज फायदेमंद होते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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